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डब्ल्यूएचओ की फंडिंग में कटौती पर फिर विचार करे अमेरिका, यूरोपीय संघ ने ट्रंप से की अपील

Sun, 31 May 2020 04:38 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 31 May 2020 04:38 AM IST
सार

  • अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) से सारे संबंधों को समाप्त कर दिया है
  • यूरोपीय संघ ने ट्रंप को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है
  • अमेरिका डब्लूएचओ को हर साल 45 करोड़ डॉलर की मदद देता है

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EU requested donald Trump to rethink cutting funding to WHO
Donald trump - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) से सारे संबंधों को समाप्त कर दिया है। इन सभी संबंधो के टूटने के बाद से अमेरिका अब डब्ल्यूएचओ को हर तरह की मदद देना बंद कर देगा और इसका असर दुनिया के कई देशों पर पड़ने वाला है। 

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अमेरिका के इस कठोर फैसले के बाद यूरोपीय संघ ने शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से अनुरोध करते हुए कहा कि डब्ल्यूएचओ के फंडिंग कटौती पर फिर से विचार करें। यूरोपीय संघ ने भारत समेत अन्य देशों का हवाला देते हुए कहा कि इन देशों में कोरोना का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है इसलिए अपने फैसले पर पुनर्विचार करें और डब्ल्यूएचओ की मदद करें।
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यूरोपीय संघ ने कहा कि वैश्विक सहयोग ही इस लड़ाई (कोरोना वायरस के खिलाफ) को जीतने के लिए एकमात्र प्रभावी विकल्प है। उन्होंने कहा कि यह एकजुट रहने का वक्त है। यह किसी को निशाना बनाने या बहुपक्षीय सहयोग को कम करने का समय नहीं है।
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दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री ज्वेली मखिजे ने ट्रंप के इस कदम को "दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया। वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री हेइको मास ने ट्रम्प के फैसले को "गलत समय पर गलत कदम" कहा। उन्होंने कहा कि बर्लिन अमेरिकी सरकार को इस मामले पर पुनर्विचार के लिए अनुरोध करेगा।

बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) से अमेरिका के संबंध खत्म करने की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा कि डब्लूएचओ पूरी तरह चीन के नियंत्रण में है। अब तक उसे दिया जाने वाला फंड दूसरे संगठनों को दिया जाएगा। कोरोना संक्रमण और हांगकांग को लेकर चीन के हालिया रुख से खफा ट्रंप ने उसके खिलाफ कई नए प्रतिबंध लगाने का भी एलान किया है।

ट्रंप ने कहा कि चीन ने डब्लूएचओ को हर साल महज चार करोड़ डॉलर की राशि देकर उस पर कब्जा जमा लिया है। जबकि अमेरिका डब्लूएचओ को हर साल 45 करोड़ डॉलर की मदद देता है।

इस महामारी के दौर में डब्लूएचओ लगातार हमारे अनुरोधों और सुधार की जरूरतों की अनदेखी करता रहा। इसलिए हम उससे सारे संबंध खत्म करेंगे। इससे पहले ट्रंप ने दिन की शुरुआत में चीन के खिलाफ बड़ी घोषणा करने का संकेत दिया था।

चीनी शोधकर्ता हमारी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा

भारतीय समयानुसार रात करीब साढे़ 12 बजे ट्रंप ने व्हाइट हाउस से बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी में अध्ययनरत चीनी शोधकर्ता हमारी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। हम उन पर प्रतिबंध लगाएंगे। साथ ही अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध चीनी कंपनियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, ट्रंप ने हांगकांग को दिए गए व्यापार और यात्रा दर्जे को खत्म करने की घोषणा की।

ट्रंप ने आरोप लगाया कि चीन ने ब्रिटेन के साथ हुए व्यापार समझौते का उल्लंघन किया है। चीन ने हाल ही में हांगकांग में विवादित सुरक्षा कानून लागू किया था जिससे उसकी स्वायत्तता खतरे में आ गई है। ट्रंप की इस घोषणा के बाद ही सोशल मीडिया पर अमेरिका में ही आलोचना होने लगी है।

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के एक टैली के अनुसार दुनिया भर में 61 लाख से अधिक कोरोना संक्रमितों की संख्या हो गई है। वहीं   जिसमें 3 लाख 70 हजार से अधिक मौतें हो गईं हैं। और लगभग 27 लाख संक्रमित ठीक भी हो गए हैं।

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