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EU Parliament's 3rd Woman President: यूरोपीय संघ की संसद की तीसरी महिला अध्यक्ष बनीं रोबर्टा मेट्सोला, उनके गर्भपात विरोधी रुख पर क्या था विवाद?
Tue, 18 Jan 2022 06:40 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Tue, 18 Jan 2022 06:40 PM IST
सार
जब माल्टा ने 2003 में यूरोपीय संघ में शामिल होने का फैसला किया तो एक छात्रा के रूप उन्होंने ‘हां’ वोट के अभियान में हिस्सा लिया था। उसके बाद वह ब्रुग्स के कॉलेज और फिर ब्रसेल्स में काम करने के लिए चली गईं।
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यूरोपीय संघ की संसद की तीसरी महिला अध्यक्ष बनीं रोबर्टा मेट्सोला
- फोटो : Twitter : @RobertaMetsola
विस्तार
माल्टा की नेशनलिस्ट पार्टी की नेता सांसद रोबर्टा मेट्सोला को मंगलवार को यूरोपीय संसद का नेतृत्व करने वाली तीसरी महिला अध्यक्ष रूप में चुना गया। मंगलवार को उनका जन्मदिन भी है और 43 साल की हो गई हैं। यूरोपीय संघ के सबसे छोटे राष्ट्र के राजनेता के तौर पर वे सबसे कम उम्र की अध्यक्ष बनी हैं। इतालवी पत्रकार एवं यूरोपीय संघ की संसद के अध्यक्ष डेविड सासोली के पिछले सप्ताह निधन के बाद मेट्सोला ने यह पदभार संभाला है। उनके गर्भपात विरोधी रुख पर विवाद के बावजूद उन्हें एक राजनीतिक उदारवादी के रूप में देखा जाता है।
बेहद छोटी आबादी वाला देश है माल्टा
मेट्सोला 2020 से यूरोपीय संघ की संसद की उपाध्यक्ष हैं। मेटसोला जिस देश माल्टा से ताल्लुक रखती हैं वह मध्य भूमध्य सागर में पांच लाख से अधिक आबादी वाला देश है। इतनी छोटी आबादी वाले देश की नेता यूरोपीय संघ में शीर्ष स्थान पर पहुंची हैं। उर्सुला फॉन डेय लाएन यूरोपीय संघ की पहली महिला अध्यक्ष रही हैं।
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बेहद छोटी आबादी वाला देश है माल्टा
मेट्सोला 2020 से यूरोपीय संघ की संसद की उपाध्यक्ष हैं। मेटसोला जिस देश माल्टा से ताल्लुक रखती हैं वह मध्य भूमध्य सागर में पांच लाख से अधिक आबादी वाला देश है। इतनी छोटी आबादी वाले देश की नेता यूरोपीय संघ में शीर्ष स्थान पर पहुंची हैं। उर्सुला फॉन डेय लाएन यूरोपीय संघ की पहली महिला अध्यक्ष रही हैं।
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यूरोपीय संघ
- फोटो : pixabay
क्या है यूरोपीय संघ
यूरोपीय संघ मुख्यत: यूरोप में स्थित 27 देशों का एक राजनैतिक एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है। यूरोपीय यूनियन के नियम सभी सदस्य देशों पर लागू होता है। यह संस्था पिछले कुछ सालों में काफी शक्तिशाली हो गई है और इसने डिजिटल अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन तथा ब्रेक्जिट जैसे मुद्दों पर 27 देशों के समूह का रुख तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जलवायु परिवर्तन पर रहेगा जोर
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अध्यक्ष चुने जाने के बाद मेटसोला ने कहा,‘डेविड सासोली ने लोगों को एक साथ लाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। यह यूरोप में रचनात्मक ताकतों को एक साथ रखने की प्रतिबद्धता है जिसे मैं आगे बढ़ाऊंगी।’ मेट्सोला ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई यूरोपीय संसद के लिए प्राथमिकता रहेगी।
यूरोपीय संघ मुख्यत: यूरोप में स्थित 27 देशों का एक राजनैतिक एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है। यूरोपीय यूनियन के नियम सभी सदस्य देशों पर लागू होता है। यह संस्था पिछले कुछ सालों में काफी शक्तिशाली हो गई है और इसने डिजिटल अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन तथा ब्रेक्जिट जैसे मुद्दों पर 27 देशों के समूह का रुख तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जलवायु परिवर्तन पर रहेगा जोर
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अध्यक्ष चुने जाने के बाद मेटसोला ने कहा,‘डेविड सासोली ने लोगों को एक साथ लाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। यह यूरोप में रचनात्मक ताकतों को एक साथ रखने की प्रतिबद्धता है जिसे मैं आगे बढ़ाऊंगी।’ मेट्सोला ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई यूरोपीय संसद के लिए प्राथमिकता रहेगी।
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गर्भपात कानून
- फोटो : Social Media
गर्भपात विरोधी रुख पर क्या विवाद था
चार बच्चों की मां मेटसोला खुद को समलैंगिक और महिलाओं के अधिकारों की चैंपियन के रूप में देखती है, लेकिन गर्भपात पर उनका रुख सख्त है, जिस कारण वे विरोधियों की आलोचना का शिकार हुईं। दरअसल उनके देश माल्टा में गर्भपात अवैध है।
माल्टा में सबसे सख्त गर्भपात कानून
माल्टा में दुनिया का सबसे सख्त गर्भपात कानून लागू है इस प्रक्रिया को प्रतिबंधित करने वाला यूरोपीय संघ का एकमात्र देश भी है। यहां तक कि दुष्कर्म के बाद गर्भवती होने या कभी-कभी मां के स्वास्थ्य के खतरे में पड़ने के बाद भी औरतों को गर्भपात की इजाजत नहीं है। माल्टा देश के नागरिक होने के कारण जब पिछले साल जून में सभी सदस्य देशों में गर्भपात को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए एक रिपोर्ट के लिए मतदान हुआ तो उन्होंने इसके विरोध में वोट किया था। आलोचक उन्हें नारीवाद के लिए एक चुनौती की तरह देखते हैं।
चार बच्चों की मां मेटसोला खुद को समलैंगिक और महिलाओं के अधिकारों की चैंपियन के रूप में देखती है, लेकिन गर्भपात पर उनका रुख सख्त है, जिस कारण वे विरोधियों की आलोचना का शिकार हुईं। दरअसल उनके देश माल्टा में गर्भपात अवैध है।
माल्टा में सबसे सख्त गर्भपात कानून
माल्टा में दुनिया का सबसे सख्त गर्भपात कानून लागू है इस प्रक्रिया को प्रतिबंधित करने वाला यूरोपीय संघ का एकमात्र देश भी है। यहां तक कि दुष्कर्म के बाद गर्भवती होने या कभी-कभी मां के स्वास्थ्य के खतरे में पड़ने के बाद भी औरतों को गर्भपात की इजाजत नहीं है। माल्टा देश के नागरिक होने के कारण जब पिछले साल जून में सभी सदस्य देशों में गर्भपात को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए एक रिपोर्ट के लिए मतदान हुआ तो उन्होंने इसके विरोध में वोट किया था। आलोचक उन्हें नारीवाद के लिए एक चुनौती की तरह देखते हैं।