ऊर्जा संकट: यूरोपियन यूनियन में गैस और बिजली की महंगाई का शिकार बन सकती है ग्रीन डील
ईयू देशों के वित्त मंत्री अगले सोमवार को गैस और बिजली की महंगाई पर बातचीत करेंगे। अगले मंगलवार और बुधवार को इस मसले पर यूरोपियन संसद में बहस होगी। ईयू के आर्थिक आयुक्त पाओलो जेनतिलोनी ने कहा है कि मौजूदा संकट का संदेश है कि हमें फौरी जरूरत और दीर्घकालिक लक्ष्य के बीच संतुलन बनाना होगा...
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यूरोप में गैस और बिजली की बढ़ रही कीमत का असर यूरोपियन यूनियन (ईयू) के प्रस्तावित ग्रीन डील (पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रम) पर पड़ सकता है। इसके खिलाफ विरोध भाव बढ़ने के संकेत हैं। अगले हफ्ते यूरो जोन के वित्त मंत्रियों की बैठक में इसके साफ संकेत मिल सकते हैं। ग्रीन डील के तहत ये लक्ष्य रखा गया है कि पूरे ईयू क्षेत्र में 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य कर दिया जाएगा। कार्बन उत्सर्जन और जीवाश्म ऊर्जा (फॉसिल फ्यूल) पर अभी से टैक्स बढ़ाया जाने लगा है। लेकिन अब आशंका पैदा हुई है कि अभी जो ऊर्जा संकट पैदा हुआ है, उससे ग्रीन डील के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
फिनलैंड की वित्त मंत्री अनिका सारिको ने बीते सोमवार को कहा कि हम जलवायु संबंधी अपने लक्ष्यों को भूल नहीं सकते। लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है। नीदरलैंड्स के ट्रेडिंग सेंटर में प्राकृतिक गैस की कीमत सोमवार को 92 यूरोप प्रति घंटे तक पहुंच गई। वहां चलने वाली वाली दर पूरे यूरो क्षेत्र में एक तरह का पैमाना समझा जाता है। प्राकृतिक गैस की कीमत बढ़ने का असर बिजली बिल पर भी पड़ रहा है।
ईयू देशों के वित्त मंत्री अगले सोमवार को गैस और बिजली की महंगाई पर बातचीत करेंगे। अगले मंगलवार और बुधवार को इस मसले पर यूरोपियन संसद में बहस होगी। ईयू के आर्थिक आयुक्त पाओलो जेनतिलोनी ने कहा है कि मौजूदा संकट का संदेश है कि हमें फौरी जरूरत और दीर्घकालिक लक्ष्य के बीच संतुलन बनाना होगा। इसका एक उपाय यह भी हो सकता है कि ग्रीन ऊर्जा को अपनाने की गति तेज की जाए। यूरोपीय आयोग के उपाध्यक्ष वाल्दिस डोमब्रोव्स्किस ने कहा है- इस संकट से ये जरूरत और ज्यादा महसूस हुई है कि पेट्रोलियम और गैस पर निर्भरता जल्द से जल्द घटाई जाए।
लेकिन ईयू के कई सदस्य देशों में गैस निकालने की रफ्तार तेज करने का फैसला किया गया है। नॉर्वे की सबसे बड़ी गैस निर्यातक कंपनी एक्विनोर ने ज्यादा मात्रा में गैस निकालना शुरू भी कर दिया है। इस बीच कई देशों से ये मांग उठी है कि इस मामले में ईयू एक साझा कदम उठाए। स्पेन की वित्त मंत्री नाडिया कालविनो सांतामारिया ने कहा है कि बिजली की महंगाई के कारण स्पेन के लिए ये मसला प्राथमिकता में सबसे ऊपर हो गया है। इसलिए ईयू के एजेंडे पर इसे लाया जाएगा।
स्पेन सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि रूस की गैस सप्लायर कंपनी गैजप्रोम से ईयू सीधे गैस की खरीदारी करे। उसके मुताबिक अलग-अलग देशों के अपना सौदा करने से इस कंपनी को महंगी दरों पर गैस बेचने का मौका मिल रहा है। फ्रांस सरकार ने एक असाधारण कदम उठाते हुए देश में गैस की कीमत बढ़ाने पर रोक लगा दी है। इससे कंपनियों को बढ़ी कीमतों का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है।
उधर, ग्रीस ने ईयू से मांग की है कि उसने उत्सर्जन ट्रेडिंग सिस्टम के तहत जो राजस्व इकट्ठा किया है, उसका कुछ हिस्सा वह तुरंत सदस्य देशों को लौटा दे, ताकि वे ऊर्जा की महंगाई का मुकाबला कर सकें। लेकिन यूरोपीय आयोग और ईयू के कुछ सदस्य देश इस सिस्टम में किसी छेड़छाड़ के खिलाफ हैं।