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Sri Lanka Crisis: कंगाल श्रीलंका में फिर आपातकाल, राष्ट्रपति चुनाव से पहले विक्रमसिंघे का बड़ा कदम

Mon, 18 Jul 2022 08:27 AM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 18 Jul 2022 08:27 AM IST
सार

आदेश में कहा गया है कि आर्थिक संकट को देखते हुए कानून व्यवस्था व आवश्यक वस्तुओं की सुचारू आपूर्ति के लिए 18 जुलाई से आपातकाल लगाया जा रहा है। 

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Emergency in Sri Lanka again, Acting President Wickremesinghe ordered
रॉनिल विक्रमसिंघे

विस्तार

भयावह आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में आज से  फिर आपातकाल लगा दिया गया है। कार्यवाहक राष्ट्रपति रॉनिल विक्रमसिंघे ने यह आदेश दिया। श्रीलंका में 20 जुलाई को राष्ट्रपति पद का चुनाव होने वाला है। इससे पूर्व सोमवार को तत्काल प्रभाव से देश में आपातकाल की घोषणा की गई। 225 सदस्यीय संसद के 20 जुलाई को नए राष्ट्रपति का चुनाव करने की उम्मीद है।

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आदेश में कहा गया है कि आर्थिक संकट को देखते हुए कानून व्यवस्था व आवश्यक वस्तुओं की सुचारू आपूर्ति के लिए 18 जुलाई से आपातकाल लगाया जा रहा है। इससे पहले 13 जुलाई को तत्कालीन राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के खिलाफ भारी बवाल व जनाक्रोश भड़कने पर श्रीलंका में आपातकाल लगाया गया था। राजपक्षे के देश से भागने के बाद विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था। इसके बाद आपातकाल हटा दिया गया था, लेकिन अब एक सप्ताह में दूसरी बार आपातकाल लगाना पड़ा है।
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श्रीलंका में राष्ट्रपति को सार्वजनिक सुरक्षा अध्यादेश के भाग 2 में आपातकालीन नियम लागू करने का अधिकार है। इसके अनुसार यदि राष्ट्रपति की राय है कि पुलिस किसी स्थिति से निपटने में असक्षम है तो वे आपातकाल लागू कर सेना को तैनात करने का आदेश दे सकते हैं। इसका मतलब यह है कि सुरक्षा बलों को हथियारों और विस्फोटकों की तलाशी लेने, संदिग्धों को गिरफ्तार करने, खदेड़ने और परिसरों या व्यक्तियों की तलाशी लेने का अधिकार है। 

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देश से भाग निकले गोतबाया
श्रीलंका में पिछले करीब छह माह से ज्यादा समय से आर्थिक हालात बेकाबू हो गए हैं। देश में आवश्यक वस्तुओं व ईंधन की भारी किल्लत हो गई है। जनता पूर्ववर्ती राजपक्षे सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर कई बार सड़क पर उतर चुकी है। पिछले सप्ताह उग्र प्रदर्शनकारियों ने राजधानी कोलंबे में राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति गोतबाया भूमिगत हो गए थे। दो दिन तक अज्ञातवास में रहने के बाद वह रातोंरात देश से भाग निकले थे। पहले वे मालदीव गए और वहां से सिंगापुर पहुंचे। 



आपातकाल का लंबा इतिहास
श्रीलंका में आपातकाल या इमर्जेंसी का लंबा इतिहास है। 1948 में अंग्रेजों से आजादी के बाद और उससे पहले भी कई बार देश आपातकाल भोग चुका है। आजादी के बाद सबसे पहले 1958 में देश में आपातकाल लगाया गया था तब सिंहली भाषा को एकमात्र भाषा के रूप में अपनाने के विरोध में हालात बिगड़ने पर आपातकाल लगा था। 

लिट्टे आंदोलन के कारण 28 साल रहा आपातकाल
श्रीलंका ने सबसे लंबा आपातकाल 1983 से 2011 तक रहा। श्रीलंकाई तमिलों व सिंहलियों के बीच उग्र व हिंसक आंदोलन के कारण करीब 28 साल तक आपातकाल लगा रहा। तमिल समूह लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे श्रीलंका में अलग तमिल राज्य की मांग कर रहा था। गृहयुद्ध के हालात के बीच यहां आपातकाल लागू रहा। इसके बाद 2018 में मुस्लिम विरोधी हिंसा के कारण आपातकाल लगा था।

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