पाकिस्तान: पीटीआई अब विदेशी चंदा विवाद में फंसी, इमरान खान के शुरू हो चुके हैं बुरे दिन?
पीटीआई के खिलाफ विदेशी चंदा लेने से संबंधित मामला नवंबर 2014 में दायर हुआ था। लेकिन इसकी जांच के लिए समिति का गठन 2018 में हुआ। सामने आई जानकारी के मुताबिक समिति ने 150 से ज्यादा मामलों की जांच की है। बताया गया है कि पीटीआई ने जांच की कार्यवाही रोकने के लिए 54 बार अर्जी दी थी...
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कई मोर्चों पर बढ़ती मुसीबत के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को एक और तगड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग की एक जांच समिति ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने विदेशी नागरिकों और कंपनियों से धन हासिल किया। उसने उस रकम की जानकारी सरकारी एजेंसियों को नहीं दी। हाल के स्थानीय चुनावों में पीटीआई की करारी और देश में बढ़ती आर्थिक मुश्किलों को संभालने में सरकार की नाकामी के बीच इस ताजा घटनाक्रम से इमरान खान के सामने एक नई गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
निर्वाचन आयोग ने सवाल उठाए
पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने कहा है कि निर्वाचन आयोग की जांच समिति ने जो रिपोर्ट सौंपी, उसकी कॉपी उसके पास मौजूद है। उसके मुताबिक पीटीआई ने बीते 2009-10 से 2012-13 के बीच विदेश से मिले 31 करोड़ 20 लाख रुपये की सूचना नहीं दी। पार्टी को सिर्फ 2012-13 में ही साढ़े 14 करोड़ रुपये मिले थे, जिसे उसने गुप्त रखा। रिपोर्ट में पीटीआई के खातों के ऑडिट रिपोर्ट संबंधी सर्टिफिकेट्स पर भी सवाल उठाए गए हैं। ये सर्टिफिकेट इमरान खान के दस्तखत से निर्वाचन आयोग को सौंपे गए थे।
रिपोर्ट में उस विवाद का भी जिक्र है जिसके तहत पीटीआई ने अपने कर्मचारियों को अपने निजी खातों में चंदा लेने की इजाजत दी। हालांकि जांच समिति ने कहा है कि ये मामले उसकी जांच के दायरे में नहीं था। निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को पीटीआई को विदेशी धन मिलने से संबंधित मामले की सुनवाई शुरू की। ठीक उसी समय जांच समिति की रिपोर्ट मीडिया को लीक हुई है। इससे इमरान खान को घेरने के लिए विपक्ष को नया हथियार मिला है।
पीटीआई के खिलाफ विदेशी चंदा लेने से संबंधित मामला नवंबर 2014 में दायर हुआ था। लेकिन इसकी जांच के लिए समिति का गठन 2018 में हुआ। सामने आई जानकारी के मुताबिक समिति ने 150 से ज्यादा मामलों की जांच की है। बताया गया है कि पीटीआई ने जांच की कार्यवाही रोकने के लिए 54 बार अर्जी दी थी। इसीलिए समिति को जांच करने में लगभग चार साल का वक्त लग गया।
सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने रिपोर्ट को बताया गलत
पीटीआई को इस मुद्दे पर देश में सियासी तूफान उठने का अंदाजा है। इसलिए अखबार डॉन में खबर छपने के तुरंत बाद संघीय सरकार के मंत्रियों ने अपनी पार्टी के बचाव की मुहिम छेड़ दी। सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर रिपोर्ट को ‘गलत’ बताया। साथ ही उन्होंने मांग की कि सभी पार्टियों को मिले विदेशी चंदे की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में एक ही ट्रांजैक्शन (लेन-देन) को दो बार गिना गया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि तथ्यों की ऐसी भूल की तरफ इशारा करने का मकसद रिपोर्ट की साख को संदिग्ध बनाना है।
मंत्रियों ने दावा किया है कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को मिले विदेशी चंदों का मामला भी वैसा ही है, जैसा पीटीआई का है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि जांच समिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बनाई गई थी। कोर्ट ने कहा था कि सभी दलों के खातों की कानून के मुताबिक जांच की जाए। पीएमएल-नवाज और पीपीपी के खातों की जांच का क्या निष्कर्ष रहा, यह अभी सामने नहीं आया है।