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स्वेज नहर संकट : सोशल मीडिया पर चलाया फर्जी अभियान, मिस्र की पहली महिला कैप्टन को ठहराया दोषी

Sun, 04 Apr 2021 01:47 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काहिरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काहिरा Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 04 Apr 2021 01:47 PM IST
सार

  • स्वेज नहर में पनामा कंपनी का एवर ग्रीन जहाज करीब एक हफ्ते के लिए फंसा 
  • जहाज के फंसे होने पर सोशल मीडिया पर चलाया एक फर्जी अभियान
  • इस फर्जी अभियान का केंद्र बनी मिस्र की पहली महिला कैप्टन

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Egypt first female ship captain Marwa Elselehdar says she is blamed for blocking Suez canal
मिस्र की पहली महिला कैप्टन मारवा ऐल्सलेदार - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

स्वेज नहर में पनामा की कंपनी एवर गिवन के विशाल मालवाहक पोत एवर ग्रीन का जहाज मिस्र की ग्रेट बिटर खाड़ी में 23 मार्च को फंस गया था। हालांकि भारी मशक्कत के बाद सोमवार को यह जहाज निकाला जा चुका है लेकिन इस जहाज के फंसे रहने पर सोशल मीडिया पर एक फर्जी अभियान चलाया गया, जिसका केंद्र बनीं मिस्र की पहली महिला कैप्टन मारवा ऐल्सलेदार। 

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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर फैले फर्जी अभियान में मिस्र की पहली महिला कैप्टन को इस जहाज के फंसे होने का दोषी ठहराया गया। लेकिन पनामा कंपनी का ये जहाज जब स्वेज नहर में फंसा था, उस समय 29 वर्षीय मारवा सैकड़ों मील दूर अलेक्जेंड्रिया के भूमध्य बंदरगाह शहर में ड्यूटी पर तैनात थीं। 
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उन्होंने कहा कि इस बात को सुनकर मैं काफी आश्चर्यचकित थी। उन्होंने आगे कहा कि यह सुनते ही मुझे ऐसा लगा कि इस प्रकरण में मुझे शायद इसलिए दोषी ठहराया जा रहा है क्योंकि या तो मैं इस क्षेत्र में एक कामयाब महिला हूं या फिर मैं मिस्र से ताल्लुक रखती हूं, मैं निश्चित नहीं हूं।
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मारवा ने आगे कहा कि हमारा समाज आज भी इस बात को स्वीकार नहीं करता कि समुद्र में कोई महिला काम करे और लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहे। लेकिन जब आप वही काम करते हो, जिसे आप प्यार करते हो तो हर किसी की स्वीकृति आपके लिए मायने नहीं रखती है। 

मारवा ने कहा कि एक फर्जी लेख अंग्रेजी भाषा में छापा गया ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ सकें। मैंने लेख में लिखी बातों को नकारने की बहुत कोशिश की क्योंकि ये मेरी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर रही थी। 


इस तरह हुआ नुकसान
स्वेज कैनाल अथॉरिटी का कहना है कि मोटे तौर पर उसे सात दिन में करीब एक अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अथॉरिटी यहां से गुजरने वाले पोतों से पारगमन शुल्क वसूलती है। इसके अलावा फंसे जहाज को निकालने के दौरान भी काफी नुकसान व यांत्रिक खर्च हुआ। उपकरणों व श्रमिकों की लागत भी लगी। यह सब जोड़कर संबंधित कंपनी से हर्जाना वसूला जाएगा। 

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