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मध्य वर्ग का बुरा हाल: अमेरिका में जानबूझ कर बढ़ाई गई है गैर-बराबरी?
Wed, 28 Jul 2021 04:57 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 28 Jul 2021 04:57 PM IST
सार
यूबीएस के कर्ज विश्लेषक मैट मिश ने कहा- ‘गैर-बराबरी में बढ़ोतरी हुई है, जो कोविड के बाद और भी ज्यादा दिखने लगी है। सबसे धनी लोगों के धन को और भी बढ़ाया जा रहा है।’
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अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : pixabay
विस्तार
कोरोना वायरस महामारी शुरू होने के बाद से अमेरिका में आर्थिक गैर-बराबरी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। स्विट्जरलैंड के बहुराष्ट्रीय इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय सेवा कंपनी- यूबीएस ने अब अपने एक अध्ययन में आरोप लगाया है कि गैर-बराबरी बढ़ाने के लिए अमेरिका का केंद्रीय बैंक- फेडरल रिजर्व जिम्मेदार है। गौरतलब है कि 2020 में कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन लागू होते ही फेडरल रिजर्व ने तुरंत प्रोत्साहन पैकेज दिया। लेकिन यूबीएस का कहना है कि हालांकि उसके पैकेज से निम्न आय वर्ग के लोगों को भी कुछ राहत मिली, लेकिन उसका असल फायदा धनी लोगों को मिला। इसकी वजह यह है कि इस पैकेज के कारण जायदाद की कीमत बढ़ गई।
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यूबीएस ने अपनी गणना का आधार फेडरल रिजर्व के आंकड़ों को ही बनाया है। उसने इसके जरिए दिखाया है कि इस पैकेज के कारण देनदारी की तुलना में धनी लोगों के जायदाद की कीमत में भारी इजाफा हुआ। अब स्थिति यह है कि अमेरिका के सबसे धनी एक फीसदी लोगों की आमदनी उनकी देनदारियों की तुलना में 26 गुना ज्यादा है। उधर निचली 20 फीसदी आबादी की आमदनी उनकी देनदारियों की तुलना में सिर्फ पांच गुना ज्यादा है। नतीजा यह हुआ है कि दोनों आय वर्ग के लोगों के बीच का फासला रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
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यूबीएस के कर्ज विश्लेषक मैट मिश ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘गैर-बराबरी में बढ़ोतरी हुई है, जो कोविड के बाद और भी ज्यादा दिखने लगी है। सबसे धनी लोगों के धन को और भी बढ़ाया जा रहा है।’ फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेय पॉवेल ने स्वीकार किया है कि उच्च और निम्न वेतन वाले मजदूरों के रोजगार की हालत में सुधार अपेक्षित रूप से नहीं हुआ है। उन्होंने हाल में एक कॉन्फ्रेंस में बताया था कि 2020 के फरवरी में सर्वाधिक तनख्वाह वाले 20 फीसदी कर्मचारियों के बीच बेरोजगारी दर सिर्फ छह फीसदी थी। जबकि सबसे कम तनख्वाह वाले 10 फीसदी कर्मचारियों के बीच ये दर 20 फीसदी थी।
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पिछले महीने अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की वित्तीय सेवा समिति के सामने अपने प्रेजेंटेशन में पॉवेल ने कहा था कि जब कारोबार में बढ़ोतरी होती है, तब धन की गैर-बराबरी बढ़ जाती है। इसकी वजह यह है कि जिन लोगों ने मकान या शेयरों में निवेश किया हुआ है, उनकी आय तेजी से बढ़ती है। उन्होंने कहा- ‘क्या कोई गंभीरता से यह तर्क दे सकता है कि ऐसा होने से रोक दिया जाए? ऐसा करने का मतलब होगा कि निम्न आय वाले लोगों के लिए काम के अवसर और घट जाएंगे।’
विश्लेषकों के मुताबिक फेडरल रिजर्व के प्रोत्साहन पैकेज से गरीब तबकों को फायदा जरूर हुआ। लेकिन इस वक्त सबसे ज्यादा तनाव में मध्य आय वाले अमेरिकी हैं। उनकी देनदारी इतनी बढ़ गई है, जितनी इसके पहले कभी नहीं रही। मैट मिश ने कहा है कि महंगाई के कारण मध्य आय वाले वर्ग की स्थिति और कमजोर हो गई है। वे ना तो आज बचत करने की स्थिति में हैं और ना ही अपनी वित्तीय हालत सुधारने की। मिश ने कहा- ‘पॉवेल यह कहना चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था को इसी तरह चलाया जाए ताकि गरीब लोगों को रोजगार मिल सके। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसके लिए मध्य आय वाले घरों की बलि चढ़ाई जा रही है?’