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ब्रिटेन में अमीरों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की हो रही है मांग, अर्जेंटीना में पास हो चुका है यह कानून

Thu, 10 Dec 2020 02:56 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 10 Dec 2020 02:56 PM IST
सार

रिपोर्ट में बताया गया है कि पांच लाख पाउंड से अधिक संपत्ति 17 फीसदी, दस लाख से अधिक संपत्ति छह फीसदी और 20 लाख पाउंड से अधिक की संपत्ति देश की एक फीसदी आबादी के पास है...

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economic and tax experts demand wealth tax in britain on rich persons
london - फोटो : pixabay

विस्तार

अर्जेंटीना में पिछले दिनों अति अमीर लोगों पर खास टैक्स लगाने का कानून पास हुआ। अब ब्रिटेन में भी इस दिशा में कदम उठाने की मांग तेज हो गई है। शिक्षाविदों के एक समूह ने सरकार से मांग की है कि वह करोड़पतियों पर एक बार लगने वाला वेल्थ टैक्स लगाए, ताकि कोरोना महामारी का सामना करने में देश सक्षम हो सके। महामारी के कारण ब्रिटेन का राजकोष मुश्किल में है। साथ ही इसकी वजह से देश में आर्थिक गैर-बराबरी की खाई और चौड़ी हो गई है।

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मशहूर लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स और वॉरविक यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्रियों और टैक्स विशेषज्ञों को लेकर पिछले अप्रैल में एक वेल्थ टैक्स कमीशन बनाया गया था। इस पहल के पीछे मकसद यह था कि धन कर (वेल्थ टैक्स) लगाने की संभावना पर विचार किया जाए। अब इस कमीशन ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इसमें कहा गया है कि वेल्थ टैक्स लगाकर सरकार 260 अरब पाउंड जुटा सकती है। कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी का सामना करने के लिए संसाधन जुटाने का सबसे न्यायपूर्ण और कुशल तरीका यही है कि धनी लोगों पर विशेष कर लगाया जाए।
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ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक इस रिपोर्ट की ब्रिटेन में बेसब्री से प्रतीक्षा की जा रही थी। यहां तक हाउस ऑफ कॉमन्स (ब्रिटिश संसद के निचले सदन) की वित्त समिति भी एक मौके पर इस आयोग की प्रस्तावित रिपोर्ट की चर्चा कर चुकी है। कमीशन ने कहा है कि इस समय कामगार तबकों की आमदनी या उनके उपभोग पर प्रहार करने से बेहतर होगा कि धनी लोगों पर टैक्स लगाया जाए। कमीशन की रिपोर्ट में पांच लाख पाउंड से अधिक धन के मालिकों पर एक फीसदी टैक्स लगाने का सुझाव दिया गया है। ये कर उन्हें दस लाख से ऊपर की संपत्ति पर देना होगा।
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कमीशन के सुझाव के मुताबिक अतिरिक्त कर व्यक्ति की कुल संपत्ति पर लगेगा। इसमें उसका मकान और कोई दूसरी जायदाद, कारोबार और वित्तीय संपदा और बचत भी शामिल होंगे। सुझाव दिया गया है कि अगर व्यक्ति ने कोई संपत्ति गिरवी रख कर कर्ज ले रखा है, तो उसकी उस संपत्ति को धन कर से बाहर रखा जाए। रिपोर्ट में बताया गया है कि पांच लाख पाउंड से अधिक संपत्ति 17 फीसदी, दस लाख से अधिक संपत्ति छह फीसदी और 20 लाख पाउंड से अधिक की संपत्ति देश की एक फीसदी आबादी के पास है।

कमीशन ने यह सुझाव भी दिया है कि वेल्थ टैक्स को पांच साल में किश्तों में वसूल किया जाए, ताकि अगर किसी व्यक्ति के पास नकद आय की कमी हो, तो उसे भी ये नया कर चुकाने में दिक्कत पेश ना आए। वेल्थ टैक्स कमीशन के सदस्य और वॉरविक यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर अरुण आडवाणी ने कहा कि एक सुझाव यह रहा है कि सरकार अपना राजस्व बढ़ाने के लिए आय कर, बीमा प्रीमियम या वैट पर अतिरिक्त शुल्क लगाए। लेकिन अब यह राजनीतिक फैसले का मुद्दा है। यह सरकार पर है कि वह किस पर टैक्स लगाती है।

ये रिपोर्ट उस समय आई है, जब ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनक टैक्स बढ़ाकर सरकार के राजस्व को बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान राहत देने पर सरकार को काफी खर्च करना पड़ा है। इससे उस पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है। ब्रिटिश सरकार का राजकोषीय घाटा इस साल 400 अरब पाउंड तक पहुंच चुका है। अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि अगर सरकार ने खर्च घटाया तो उसका अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने की कोशिशों पर खराब असर पड़ेगा। इसलिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना ही सरकार के लिए सबसे बेहतर तरीका होगा।


इसके मद्देनजर वेल्थ टैक्स कमीशन ने अपने सुझाव दिए हैं। उसने कहा है कि ये वक्त सोच में बड़े बदलाव का है। कोरोना महामारी ने समाज में गैर-बराबरी बढ़ाई है। ऐसे में धनी लोगों पर अतिरिक्त टैक्स लगाकर सरकार आर्थिक न्याय की दिशा में ऐसे कदम उठा सकती है, जिससे उसका अपना घाटा भी कम होगा।

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