जॉर्ज सोरोस को जयशंकर की दो टूक: 'ऐसे लोग सोचते हैं कि चुनाव सिर्फ तभी अच्छे हैं, जब उनकी पसंद के लोग जीतें'
भारत के लोकतंत्र पर टिप्पणी करने वाले अरबपति निवेशक पर जयशंकर ने कहा, "मैं सोरोस को सिर्फ बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाला कहकर रुक सकता हूं। लेकिन वे बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाले के साथ खतरनाक भी हैं।"
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "सोरोस मानते हैं कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक नहीं है। कुछ समय पहले ही उन्होंने हम पर आरोप लगाया था कि हम करोड़ों मुस्लिमों की नागरिकता छीनने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि जाहिर तौर पर नहीं हुआ। मैं कह सकता है कि मिस्टर सोरोस एक बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाले व्यक्ति हैं, जो कि अभी भी न्यूयॉर्क में बैठे हैं और सोचते हैं कि उनके विचारों से फैसला होना चाहिए कि पूरी दुनिया कैसे चलेगी।
जयशंकर ने आगे कहा, "मैं सोरोस को सिर्फ बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाला कहकर रुक सकता हूं। लेकिन वे बुजुर्ग, अमीर और राय रखने वाले के साथ खतरनाक भी हैं। जब ऐसे लोग और संस्थान विचार रखते हैं, तो वे अपने संसाधनों को नैरेटिव गढ़ने में लगा देते हैं।"
भारत के विदेश मंत्री ने लोकतंत्र पर अपनी राय रखते हुए कहा, "आज जब मैं अपने लोकतंत्र को देखता हूं। यहां पर मतदाताओं की भागीदारी, जो कि अभूतपूर्व है; चुनाव के नतीजे, जो कि निर्णायक हैं; चुनावी प्रक्रिया, जिस पर सवाल नहीं उठते। हम वह देश नहीं हैं, जहां चुनाव के बाद इसे चुनौती देने के लिए कोई कोर्ट जाता है।"
क्या बोले थे जॉर्ज सोरोस?
क्या मोदी सरकार इतना कमजोर, सोरोस के एक बयान से गिर जाएगी: चिदंबरम
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस की एक हालिया टिप्पणी की पृष्ठभूमि में शनिवार को कहा कि क्या नरेन्द्र मोदी सरकार इतना कमजोर है कि सोरोस के एक बयान भर से गिर जाएगी।
उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भारत के लोग तय करते हैं कि कौन सरकार में होगा और कौन इससे बाहर होगा। मैं नहीं जानता था कि मोदी सरकार इतनी कमजोर है कि 92 साल के एक अमीर विदेशी नागरिक के बयान से गिर जाएगी।’’ चिदंबरम ने यह भी कहा कि सोरोस नहीं, बल्कि अमेरिकी अर्थशास्त्री नुरिएल रुबिनी के इस बयान पर ध्यान देना चाहिए कि भारत में बड़े कारोबारी समूहों पर बढ़ती निर्भरता का नतीजा यह हो सकता है कि प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो और नये उद्यमी आगे नहीं बढ़ सकें।
सोरोस ने पिछले दिनों कहा कि भारतीय व्यवसायी गौतम अडाणी के कारोबारी साम्राज्य में उथल-पुथल ने निवेश के अवसर के रूप में भारत में विश्वास को हिला दिया है और यह भारत में ‘‘लोकतांत्रिक पुनरुद्धार’’ के द्वार खोल सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी लोकतांत्रिक नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को सोरोस पर जोरदार हमला करते हुए उन पर न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली को भी निशाना बनाने का आरोप लगाया।