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विदेश मंत्री का दौरा: अमेरिकी एनएसए और जयशंकर ने की मुलाकात, इन मुद्दों पर हुई बात
Fri, 28 May 2021 10:20 AM IST
अजय सिंह
पीटीआई, वाशिंगटन
पीटीआई, वाशिंगटन
Published by: अजय सिंह
Updated Fri, 28 May 2021 10:20 AM IST
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी एनएसए जेक सुलीवन
- फोटो : पीटीआई
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अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवन और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच मजबूत साझेदारी की समीक्षा करने के लिए गुरुवार को मुलाकात की।
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व्हाइट हाउस ने यह जानकारी दी।
वहीं, जयशंकर ने बैठक के बाद ट्वीट किया, 'एनएसए जेक सुलीवन से मिलकर प्रसन्नता हुई। हिंद-प्रशांत और अफगानिस्तान सहित कई मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। कोविड से निपटने के लिए अमेरिका द्वारा दिखाई गई एकजुटता की सराहना की। टीके को लेकर भारत-अमेरिका की साझेदारी बड़ा बदलाव ला सकती है।'
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बैठक के बाद सुलीवन ने ट्वीट किया, 'दोनों देशों के लोगों का एकदूसरे से संपर्क और हमारे मूल्य अमेरिका-भारत साझेदारी की नींव हैं और यह साझेदारी वैश्विक महामारी का खात्मा करने, जलवायु संबंधी मामले का नेतृत्व करने और स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत का समर्थन करने के लिए हमारी मदद करेगी।'
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अमेरिकी सरकार और अमेरिकी जनता ने भारत को कोविड-19 संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए अभी तक 50 करोड़ डॉलर से अधिक की मदद की है। सुलीवन ने ट्वीट किया, 'हम वैश्विक महामारी का खात्मा एकसाथ मिलकर करेंगे।'
व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता एमिली होर्न ने बताया कि बैठक के दौरान सुलीवन और जयशंकर ने हाल हफ्तों में किए गए सहयोग का स्वागत किया, जिसके तहत अमेरिका की संघीय सरकार और राज्य सरकारों, अमेरिकी कम्पनियों और अमेरिकी नागरिकों ने भारत के लोगों को कोविड-19 संबंधी राहत पहुंचाने के लिए 50 करोड़ डॉलर से अधिक की मदद की।
उन्होंने कहा कि दोनों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की और इस बात पर सहमत हुए अमेरिका और भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना जारी रखना चाहिए।
होर्न ने कहा, 'वे इस बात पर भी सहमत हुए कि लोगों का लोगों से संपर्क और साझा मूल्य अमेरिका-भारत की रणनीतिक साझेदारी की नींव है जो वैश्विक महामारी का खात्मा करने, स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत का समर्थन करने और जलवायु संबंधी चुनौतियों को वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने में मदद कर रही है।'
जो बाइडन के अमेरिकी राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद किसी भारतीय शीर्ष नेता की अमेरिका की यह पहली यात्रा है। जयशंकर शुक्रवार को अमेरिकी समकक्ष टोनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन से भी मुलाकात करेंगे।
चीन की आक्रामकता के चलते अहम बैठक
हिंद-प्रशांत क्षेत्र और खासतौर पर हिंद महासागर में चीन की आक्रामक उपस्थिति के चलते भारत-अमेरिका की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। भारत, अमेरिका और कई अन्य वैश्विक शक्तियां इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य युद्धाभ्यास और आक्त्रसमकता को देखते हुए एक स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए मुखर हो रही हैं।
टीकों को पेटेंट मुक्त कराने पर भी बात
विदेश मंत्री जयशंकर ने बृहस्पतिवार को ही अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कैथरीन ताई से भी अहम मुलाकात की। इस मुलाकात का मकसद दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार से जुड़े मसलों पर बातचीत के अलावा कोरोना टीकों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (इंटेलेक्चुअल पेटेंट राइट्स या आईपीआर) को लेकर भी समर्थन मांगना था।
बता दें कि भारत और दक्षिण अफ्रीका लगातार विश्व व्यापार संगठन से इन टीकों को पेटेंट के दायरे से बाहर कर सभी देशों को इनका उत्पादन करने देने की मांग कर रहे हैं ताकि वैश्विक स्तर पर टीकों की किल्लत दूर हो सके और कमजोर देशों की भी टीके तक कम कीमत में पहुंच संभव हो सके। अमेरिका की तरफ से ताई ने पिछले दिनों इस अभियान का समर्थन किया था।
ताई से बैठक के बाद एक ट्वीट में जयशंकर ने कहा, हमारी रणनीतिक साझेदारी के मूल में व्यापार, प्रौद्योगिकी और कारोबारी सहयोग है। कोविड महामारी के बाद आर्थिक सुधार के लिए इन्हें बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
भारत-अमेरिका व्यापार
- 9वें नंबर का ट्रेड पार्टनर है अमेरिका के लिए भारत
- 24.8 अरब डॉलर का व्यापार इस साल जनवरी से मार्च तक हुआ दोनों देशों में
- 1.98 लाख नौकरियां टिकी थीं अमेरिका के भारत को वस्तु व सेवा निर्यात से 2015 में
- 82 हजार नौकरियां वस्तु निर्यात और 1.16 लाख रोजगार सेवा निर्यात पर निर्भर