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Nepal: आयात रोक की अवधि बढ़ने से अब बेचैन हो उठे हैं नेपाल के कारोबारी

Tue, 19 Jul 2022 04:29 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 19 Jul 2022 04:29 PM IST
सार

ऑटोमोबाइल व्यापारियों ने कहा है कि देश में लगाई गई रोक के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों और बैंकरों का नेपाल में भरोसा घटने लगा है। नेपाल में साल भर में वाहनों की जितनी बिक्री होती है, उसमें त्योहार सीजन में होने वाली बिक्री का हिस्सा 50 फीसदी है...

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Due to the extension of the period of ban on the import of ten types of items by Nepal Government, despair among the traders
शेर बहादुर देउबा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल सरकार के दस प्रकार की वस्तुओं के आयात पर रोक की अवधि बढ़ा देने से देश के कारोबारियों में मायूसी छा गई है। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सरकार ने आयात पर रोक की अवधि 45 दिन और बढ़ाने का एलान किया है। सरकार ने कहा कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। इसलिए उसे ये कदम उठाना पड़ा है। इस आदेश के बाद जिन चीजों का आयात करने पर रोक जारी रहेगी, उनमें 300 डॉलर से अधिक कीमत के मोबाइल फोन, 150 सीसी से अधिक क्षमता वाली मोटरसाइकिलें, शराब, तंबाकू, हीरा, 32 इंच स्क्रीन से अधिक वाले टीवी सेट, ऑटोमोबाइल, खिलौने, ताश, और कुछ प्रकार के स्नैक्स शामिल हैं। इन वस्तुओं को लग्जरी आइटम घोषित किया गया है। इनके आयात पर पिछले 26 अप्रैल से रोक जारी है।

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नेपाल के कारोबारियों में ताजा सरकारी फैसले पर विपरीत प्रतिक्रिया हुई है। बाजार के कई जानकारों ने कहा है कि इस रोक से जहां कुछ व्यापारियों को फायदा होगा, वहीं इससे बाजार में असंतुलन पैदा होगा। कारोबारियों के मुताबिक इस समय वे त्योहार सीजन की तैयारी में हैं। इस सीजन के लिए जरूरी चीजों के आयात का ऑर्डर दो महीने पहले दिया जाता है। नेपाल ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ध्रुव थापा ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘आयात पर रोक 30 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। इसका असर ऑटोमोबिल की त्योहार सीजन की बिक्र पर पड़ेगा। ऑर्डर देने के बाद वाहनों की डिलीवरी होने में आम तौर पर तीन महीनों का वक्त लगता है।’

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ऑटोमोबाइल व्यापारियों ने कहा है कि देश में लगाई गई रोक के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों और बैंकरों का नेपाल में भरोसा घटने लगा है। नेपाल में साल भर में वाहनों की जितनी बिक्री होती है, उसमें त्योहार सीजन में होने वाली बिक्री का हिस्सा 50 फीसदी है। नेपाल के कस्टम विभाग के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में 25.59 अरब रुपये कीमत के दो लाख 57 हजार से अधिक मोटरसाइकिलों का आयात हुआ। इस दौरान देश में कुल ऑटोमोबाइल आयात 93.64 अरब रुपये का रहा। सरकार ने इस संकट के समय में आयात पर रोक इसलिए लगाई है, ताकि इतनी रकम की विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके।

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नेपाल में आर्थिक संकट लगातार बढ़ रहा है। रासायनिक खादों का अभाव हो जाने से किसान समुदाय परेशान है। इस बीच देश में महंगाई की दर दो अंकों में पहुंच चुकी है। सरकार ने विकास खर्च घटा दिया है, इसलिए बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार की तलाश में दूसरे देशों का रुख करना पड़ रहा है। विश्लेषक लगातार देउबा सरकार की इस बात के लिए आलोचना कर रहे हैं कि आर्थिक संकट के ऐसे वक्त पर वह देश में पूर्णकालिक वित्त मंत्री की नियुक्ति करने में नाकाम रही है। जनार्दन शर्मा ने बजट संबंधी एक विवाद उठने के बाद बीते छह जुलाई को वित्त मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से देश में कोई वित्त मंत्री नहीं है।

 

इस बीच आयात पर रोक जारी रखने का फैसला किया गया है। जबकि थिंक टैंक साउथ एशिया वॉच ऑन ट्रेड, इकोनॉमिक्स एंड एनवायरनमेंट के पूर्व अध्यक्ष पोशराज पांडे ने कहा है कि वस्तुओं का आयात रोकना कोई समाधान नहीं है। उलटे इससे नेपाल को डब्ल्यूटीओ के नियमों के उल्लंघन के आरोप में दंडित होना पड़ सकता है।

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