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उपचार न मिलने से दांत रोगी बेहाल, मसूड़ों में संक्रमण से सूजन, हृदय रोग और मधुमेह का खतरा

Fri, 12 Jun 2020 02:15 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: आसिम खान Updated Fri, 12 Jun 2020 02:15 PM IST
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Due to lack of treatment the risk of inflammation heart disease diabetes from gum infections of dental patients around the world
सांकेतिक तस्वीर

दुनियाभर में कई हफ्तों तक चले लॉकडाउन में अस्पतालों ने दांतों की देखभाल समेत जरूरी सेवाएं बंद कर दी थीं। इससे ढेरों मरीजों को जरूरी सफाई कैविटी रूट कैनाल इन प्लांट से लेकर मसूड़ों का इलाज टालना पड़ा। डॉक्टर को भी मरीजों के ऑपरेशन जैसे काम रोकने पड़े। 

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विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज बहाल होने पर क्लीनिकों पर गंभीर मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है। आलम यह है कि कई मरीजों में हफ्तों पहले आसानी से ठीक हो सकने वाली बीमारियों ने बड़ा रूप ले लिया है। मसूड़ों में संक्रमण जैसी स्थिति में तो मरीजों में हृदय रोग और मधुमेह का जोखिम बढ़ गया है। जिसने उन्हें कमजोर करने का काम किया है।
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इलाज में देरी से परेशानी बढ़ी
दंत चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण इलाज टालने वाले मरीज अब ज्यादा परेशान हैं। जनवरी में जिस मरीज की हल्की कैविटी साधारण फिलिंग से सही हो सकती थी। अब वह दांत के बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचा चुकी है। इससे मरीज को रूट कैनाल से लेकर इन प्लांट या दांत निकलवाने की भी जरूरत पड़ रही है। उसने सिर्फ ज्यादा दर्द सहना पड़ रहा है बल्कि उसका खर्च भी बढ़ेगा। जानकारों का कहना है कि दांतों की बीमारियां दिखने-सुनने में भले हल्की लगे लेकिन वे फौरन बड़ा स्वरूप ले लेती हैं। 
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हृदय रोग-मधुमेह का जोखिम...
डॉक्टरों का कहना है कि मसूड़ों में संक्रमण से पूरे शरीर में सूजन के साथ-साथ हृदय रोग और मधुमेह का जोखिम बढ़ता है। मधुमेह से संक्रमण की आशंका वैसे ही बढ़ जाती है। जानकारों के अनुसार, शरीर में सूजन पैदा होना संक्रमण का अपने आप में बड़ा जोखिम है।

बीमारी टली तो सर्जरी की नौबत
दांतो के मरीजों को लंबे समय तक इलाज डालने के बाद ज्यादा गहन चिकित्सा ही करनी पड़ती है। यह अधिक दर्दनाक होती है। बच्चों का समय पर इलाज न हो तो बड़े होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है।


हर 20वां वयस्क बीमारी से पीड़ित 
20 से 64 साल का हर 20वां वयस्क दातों की बीमारी से जूझ रहा होता है। दंत चिकित्सालय ले पाना गंभीर बीमारी वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

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