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US: ट्रंप की नाराजगी का दिखने लगा असर, अमेरिका ने जर्मनी के साथ पोलैंड में भी अमेरिकी सैनिकों की तैनाती रोकी
Sat, 16 May 2026 09:11 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 16 May 2026 09:11 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर पेंटागन ने पोलैंड और जर्मनी में सैनिकों की नई तैनाती रोक दी है। ईरान युद्ध पर सहयोगियों से मतभेद के कारण यह फैसला लिया गया है। हालांकि, पोलैंड ने इसे सुरक्षा के लिए खतरा नहीं माना है।
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पेंटागन
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका ने यूरोप में अपने सैनिकों की संख्या कम करने का बड़ा फैसला लिया है। पेंटागन ने पोलैंड और जर्मनी जाने वाले हजारों सैनिकों की तैनाती रद्द कर दी है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने यूरोप से करीब 5,000 सैनिक कम करने को कहा था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वह पोलैंड और जर्मनी में होने वाली नई तैनाती को रद्द करके ऐसा कर रहा है, न कि वहां पहले से तैनात सैनिकों को वापस बुला रहे है।
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सेना की पहली कैवेलरी डिवीजन की दूसरी आर्मर्ड ब्रिगेड के 4,000 सैनिकों को इस हफ्ते पोलैंड जाना था, लेकिन अब उनकी रवानगी रोक दी गई है। इसके अलावा, लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल दागने वाली एक विशेष बटालियन की जर्मनी में होने वाली तैनाती भी रद्द कर दी गई है। यह बटालियन टेक्सास के फोर्ट हुड में स्थित है।
अधिकारियों के मुताबिक, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक आधिकारिक मेमो पर हस्ताक्षर करके सैन्य नेतृत्व को यूरोप से एक ब्रिगेड हटाने का निर्देश दिया था। ट्रंप प्रशासन ने पहले केवल जर्मनी से सैनिक हटाने की बात कही थी, जिससे वॉरसॉ और वॉशिंगटन में सवाल उठने लगे थे। इस फैसले के पीछे ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और उसके पुराने सहयोगियों के बीच बढ़ता तनाव बताया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने नाटो देशों की इस बात के लिए आलोचना की है कि वे ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का पर्याप्त साथ नहीं दे रहे हैं।
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ये भी पढ़ें: क्या ईरान का साथ छोड़ देगा ड्रैगन?: चीन से लौटे ट्रंप बोले- तेहरान परमाणु संपन्न नहीं बन सकता, जिनपिंग भी सहमत
बता दे कि, हाल ही में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा था कि ईरानी नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है। उन्होंने युद्ध को लेकर वाशिंगटन की रणनीति की भी आलोचना की थी। इसके बाद ही ट्रंप और पेंटागन ने जर्मनी से कम से कम 5,000 सैनिक कम करने की बात कही थी।
हालांकि, इस फैसले को लेकर सेना के भीतर भी कुछ भ्रम की स्थिति दिखी। यूरोप में तैनात कुछ अधिकारियों को यह स्पष्ट नहीं था कि पोलैंड की तैनाती रोकना पहले से घोषित कटौती का हिस्सा है या नहीं। दूसरी ओर, पोलैंड के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर पोलैंड के खिलाफ नहीं है। वहीं, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि यह केवल सैन्य प्रबंधन से जुड़ा फैसला है। उन्होंने साफ किया कि इससे पोलैंड की सुरक्षा और दुश्मनों को रोकने की क्षमता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
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अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सेना की पहली कैवेलरी डिवीजन की दूसरी आर्मर्ड ब्रिगेड के 4,000 सैनिकों को इस हफ्ते पोलैंड जाना था, लेकिन अब उनकी रवानगी रोक दी गई है। इसके अलावा, लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल दागने वाली एक विशेष बटालियन की जर्मनी में होने वाली तैनाती भी रद्द कर दी गई है। यह बटालियन टेक्सास के फोर्ट हुड में स्थित है।
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अधिकारियों के मुताबिक, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक आधिकारिक मेमो पर हस्ताक्षर करके सैन्य नेतृत्व को यूरोप से एक ब्रिगेड हटाने का निर्देश दिया था। ट्रंप प्रशासन ने पहले केवल जर्मनी से सैनिक हटाने की बात कही थी, जिससे वॉरसॉ और वॉशिंगटन में सवाल उठने लगे थे। इस फैसले के पीछे ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और उसके पुराने सहयोगियों के बीच बढ़ता तनाव बताया जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने नाटो देशों की इस बात के लिए आलोचना की है कि वे ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का पर्याप्त साथ नहीं दे रहे हैं।
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बता दे कि, हाल ही में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा था कि ईरानी नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है। उन्होंने युद्ध को लेकर वाशिंगटन की रणनीति की भी आलोचना की थी। इसके बाद ही ट्रंप और पेंटागन ने जर्मनी से कम से कम 5,000 सैनिक कम करने की बात कही थी।
हालांकि, इस फैसले को लेकर सेना के भीतर भी कुछ भ्रम की स्थिति दिखी। यूरोप में तैनात कुछ अधिकारियों को यह स्पष्ट नहीं था कि पोलैंड की तैनाती रोकना पहले से घोषित कटौती का हिस्सा है या नहीं। दूसरी ओर, पोलैंड के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला सीधे तौर पर पोलैंड के खिलाफ नहीं है। वहीं, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि यह केवल सैन्य प्रबंधन से जुड़ा फैसला है। उन्होंने साफ किया कि इससे पोलैंड की सुरक्षा और दुश्मनों को रोकने की क्षमता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।