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US: 'मैं बंदूक मालिकों का सबसे अच्छा दोस्त था', अपने राष्ट्रपति कार्यकाल को याद कर बोले डोनाल्ड ट्रंप
Sun, 11 Feb 2024 09:21 AM IST
काव्या मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Sun, 11 Feb 2024 09:21 AM IST
सार
डोनाल्ड ट्रंप हैरिसबर्ग में राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन (एनआरए) के ग्रेट अमेरिकन आउटडोर शो में भाषण दे रहे थे। उन्होंने दावा किया कि जब वह राष्ट्रपति थे, तो उन्होंने बंदूक नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिए किसी भी दबाव का विरोध किया था।
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डोनाल्ड ट्रंप(फाइल)
- फोटो : Social Media
विस्तार
अमेरिका में सरेआम गोलीबारी की घटनाएं बढ़ती जा रहीं है। ऐसे में बंदूक रखने वाले लोगों के अधिकारों पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। देश में यह बहस भी तेज हो गई है कि बंदूकों पर नियंत्रण कैसे किया जाए ताकि इन तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके। इस बीच, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में वापसी करने पर बंदूक मालिकों के अधिकारों की रक्षा करने की कसम खाई।
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दबाव डालने का विरोध किया
बता दें, डोनाल्ड ट्रंप पेंसिल्वेनिया के हैरिसबर्ग में राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन (एनआरए) के ग्रेट अमेरिकन आउटडोर शो में भाषण दे रहे थे। उन्होंने दावा किया कि जब वह राष्ट्रपति थे, तो उन्होंने बंदूक नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिए किसी भी दबाव का विरोध किया था।
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हमने कुछ नहीं किया...
उन्होंने लोगों से कहा, 'हमने कुछ नहीं किया, हम माने भी नहीं हैं। मैं व्हाइट हाउस में बंदूक मालिकों का सबसे अच्छा दोस्त था और आपका दूसरा संशोधन हमेशा आपके राष्ट्रपति के रूप में मेरे साथ सुरक्षित रहेगा।'
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रिपब्लिकन पार्टी की दौड़ में ट्रंप की बढ़त मजबूत
गौरतलब है, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की रेस जीतते जा रहे हैं। हाल ही में, नेवादा में रिपब्लिकन पार्टी का कॉकस का आयोजन किया गया। इस कॉकस के नतीजों में डोनाल्ड ट्रंप को जीत मिली। इस जीत से रिपब्लिकन पार्टी की दौड़ में उनकी बढ़त और मजबूत हो गई है।
तीन हजार जान जाने का दावा
ट्रंप बंदूक अधिकारों को एक मुख्य मुद्दे के रूप में रख रहे हैं। वहीं, डेमोक्रेट्स कई सामूहिक गोलीबारी के मद्देनजर सख्त बंदूक कानूनों का आह्वान कर रहे हैं। उनका दावा है कि साल 2006 से अबतक तीन हजार से अधिक लोगों की जान गोलीबारी में जा चुकी है। ऐसी ही घटनाओं में से एक पार्कलैंड नरसंहार है।
यह है पार्कलैंड नरसंहार
अमेरिका में साल 2018 में स्कूल के भीतर गोलीबारी की दिल दहला देने वाली घटना से पूरा देश हिल गया था। मियामी के उत्तर-पश्चिम में एक युवक हथियारबंद होकर अपने पूर्व स्कूल में घुस गया था और भयभीत छात्रों व शिक्षकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी। इस हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई थी।
आलोचना का करना पड़ा था सामना
पार्कलैंड और अन्य बंदूर हिंसा की घटनाओं के चलते ट्रंप को राष्ट्रपति के रूप में काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। उन्होंने शुरू में मजबूत पृष्ठभूमि की जांच के लिए समर्थन व्यक्त किया था और एनआरए से डरने के लिए एक रिपब्लिकन सीनेटर की आलोचना की थी।
उन्होंने कहा था कि वह बंदूक लॉबी का सामना करेंगे और बंदूक हिंसा की समस्या को हल करेंगे। हालांकि, बाद में एनआरए के साथ हुई बैठक के बाद वह पीछे हट गए और इसके बजाय पृष्ठभूमि की जांच प्रणाली और शिक्षकों को हथियार देने के विचार में मामूली सुधारों का समर्थन किया।
पूर्व राष्ट्रपति ने एक्स पर कहा कि बंदूक नियंत्रण के लिए राजनीतिक समर्थन बहुत ज्यादा नहीं था।