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US Federal Funding: क्या ट्रंप प्रशासन ने अदालती आदेश को ठेंगा दिखाया? जिला जज ने खारिज की न्याय विभाग की दलील

Tue, 11 Feb 2025 02:02 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 11 Feb 2025 02:02 AM IST
सार

अमेरिका में अदालतों और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिला न्यायाधीश के आदेश का अनुपालन करने के बजाय ट्रंप प्रशासन 'संघीय अनुदान पर रोक' मामले में अपने तर्क पेश कर रहा है। एक जिला जज ने इस बात को रेखांकित किया है कि ट्रंप प्रशासन अदालत के आदेश का पूर्ण अनुपालन करने में विफल रहा है। जानिए क्या है पूरा मामला..

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Did the Trump administration flout the court order? District judge rejected the Justice Department's argument
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेश पर रोक लगाने वाले जज ने पाया है कि अदालत के आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं किया गया है। मामला संघीय अनुदान रोकने से जुड़ा है। ट्रंप ने सरकार की तरफ से दिए जाने वाले फंड को रोकने का फरमान जारी किया था, जिसे संघीय न्यायाधीश ने गलत मानते हुए तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया था। 
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फंडिंग फ्रीज मामले में न्यायाधीश की टिप्पणी
समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक जिला न्यायाधीश जॉन मैककोनेल ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन ने 'फंडिंग फ्रीज' मामले में आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया है, व्हाइट हाउस को संबंधित फंड जारी करना चाहिए। बता दें कि चार साल बाद सत्ता में लौटे ट्रंप के नेतृत्व वाले रिपब्लिकन प्रशासन ने 'संघीय खर्च रोकने' को राष्ट्रपति ट्रंप के एजेंडे में शामिल प्रमुख मुद्दों में जरूरी बताया है। 
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राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले के खिलाफ दो दर्जन से अधिक मुकदमे
हालांकि, ट्रंप के इस विवादास्पद कार्यकारी आदेश के खिलाफ लगभग दो दर्जन राज्यों ने अलग-अलग अदालतों में मुकदमा भी दायर किया है। व्हाइट हाउस ने अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद कहा कि सरकार न्यायाधीश के फैसले का पालन करने का सद्भावनापूर्ण प्रयास कर रही है। 
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आर्थिक मदद रोकने के पक्ष में न्याय विभाग की दलील
अमेरिकी न्याय विभाग ने तर्क दिया कि न्यायाधीश मैककोनेल का फैसला उन व्यय रोकों पर लागू नहीं होता, जिसमें राष्ट्रपति जो बाइडन के हस्ताक्षर वाले जलवायु, स्वास्थ्य देखभाल और टैक्स पैकेज शामिल हैं। जिसे जस्टिस मैककोनेल ने खारिज कर दिया। वाशिंगटन में एक अन्य संघीय न्यायाधीश ने भी ट्रंप के फैसले पर अस्थायी रोक लगाई है। अदालत ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि गैर-लाभकारी समूहों को सरकार की तरफ से जरूरी आर्थिक मदद नहीं मिल रही है।

जानिए क्या है ट्रंप का कार्यकारी आदेश
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के ब्रेनन सेंटर के अध्यक्ष और कानूनी विशेषज्ञ और लेखक माइकल वाल्डमैन का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट की परीक्षा होगी कि वे संविधान के सिद्धातों के साथ हैं या नहीं। कई चीजें गैरकानूनी हैं और मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट उनके लिए स्टैंड लेगा। डोनाल्ड ट्रंप के कई कार्यकारी आदेशों पर विवाद है और बहुत संभव हैं कि उन्हें चुनौती दी जाए। जन्मसिद्ध नागरिकता और संघीय कर्मचारियों को नौकरी से निकालने जैसे सरकार के कदमों को पहले ही निचली अदालतों में चुनौती दी गई और उन पर रोक भी लगी। अब सरकार इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने वाली है। 


अब एक नजर पूरे मामले पर भी
देखा जाए तो, जिन आदेशों पर विवाद है, उनमें ट्रांसजेंडर्स पर प्रतिबंध, शरणार्थियों की संख्या सीमित करने, यूएसएआईडी द्वारा फंडिंग पर रोक, एलन मस्क औऱ उनकी टीम की संवेदनशील डेटा तक पहुंच जैसे मामले हैं, जिन पर भी सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर सकता है। अपने पिछले कार्यकाल में भी ट्रंप को अपने कई फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के विरोध का सामना करना पड़ा था। वहीं कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप सरकार के आदेशों को बरकरार भी रखा था। अब इस कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है, इस पर लोगों की निगाहें हैं। 
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