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खतरा: डेल्टा वेरिएंट 60 फीसदी ज्यादा संक्रामक, टीके का असर कर रहा कम, इसलिए ज्यादा परिवार हुए प्रभावित

Sat, 12 Jun 2021 02:29 AM IST
Amit Mandal पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन Published by: Amit Mandal Updated Sat, 12 Jun 2021 02:29 AM IST
सार

कोरोना वायरस के डेल्टा वेरियंट का खतरा अब यूरोप पर भी मंडराने लगा है। भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान इसने जमकर तबाही मचाई है। 

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Delta variant 60 percent more infectious, reduces vaccine effectiveness
कोरोना का नया वैरिएंट - फोटो : iStock

विस्तार

ब्रिटेन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे पहले भारत में पाए गए कोविड-19 डेल्टा वेरिएंट या चिंताजनक वेरिएंट (वीओसी) बी1.617.2, ब्रिटेन में पाए गए अल्फा स्वरूप से लगभग 60 प्रतिशत अधिक संक्रामक है और टीकों की प्रभावशीलता को भी कुछ हद तक कम कर देता है। 

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इसी के कारण भारत में चल रही दूसरी लहर में यदि परिवार के किसी एक व्यक्ति को कोरोना हुआ तो उसके जरिए उसके परिवार के ज्यादातर लोग संक्रमित हो गए। डेल्टा वैरिएंट (B.1.617.2) को बताया गया है। यह सबसे पहले भारत में ही अक्टूबर 2020 में पाया गया था।
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ब्रिटेन में 90 प्रतिशत  नए मामले डेल्टा के
साप्ताहिक आधार पर वीओसी का पता लगा रहे पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) ने कहा कि देश में डेल्टा वीओसी के मामले 29,892 की वृद्धि के साथ 42,323 तक पहुंच गए हैं। इसमें लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ताजा आंकड़े यह भी बताते हैं कि ब्रिटेन में फिलहाल कोविड-19 के 90 प्रतिशत  नए मामले डेल्टा वेरिएंट के हैं, जिनकी वृद्धि दर इंग्लैंड के केंट क्षेत्र में पहली बार पहचाने गए अल्फा वीओसी की तुलना में काफी ऊंची देखी जा रही है। साथ ही यह वेरिएंट अब तक देश में प्रभुत्व जमाए हुए है।
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पीएचई ने अपने ताजा विश्लेषण में कहा, 'पीएचई के नए अध्ययन बताते हैं कि डेल्टा वेरिएंट अल्फा वेरिएंट की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत अधिक संक्रामक है। सभी क्षेत्रों में डेल्टा के मामलों की वृद्धि दर ऊंची है। स्थानीय आकलन के अनुसार इनकी संख्या 4.5 से 11.5 दिन के बीच दोगुनी हो जाती है।'

डब्ल्यूएचओ ने यूरोप में डेल्टा प्रकार के प्रसार पर चेतावनी जारी की

विश्व स्वास्थ्य संगठन के यूरोप निदेशक ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 का उच्च संचरण वाला प्रकार क्षेत्र में जड़ जमा सकता है क्योंकि कई देश प्रतिबंधों में ढील देने की तैयारी कर रहे हैं और अधिक सामाजिक कार्यक्रमों तथा सीमा पार यात्राओं की अनुमति दे रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के डॉ. हंस क्लूगे ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था कि इस प्रकार को ‘डेल्टा’ प्रकार के नाम से भी जाना जाता है और इस पर कुछ टीकों के प्रभावी नहीं होने के भी लक्षण हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आबादी का कुछ हिस्सा खासकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अब भी टीका नहीं लगा है।



डब्ल्यूएचओ यूरोप के क्षेत्रीय निदेशक ने कहा कि पिछली गर्मियों के दौरान कम उम्र के लोगों में मामले धीरे-धीरे बढ़ते गए और फिर बुजुर्ग लोगों में संक्रमण फैला, जिससे महामारी का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया। क्लूगे ने कहा कि कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के कारण 2020 की गर्मियों और सर्दियों में मौतें हुईं और फिर लॉकडाउन लगा। उन्होंने कहा कि हमें फिर वही गलती नहीं दोहरानी चाहिए। 

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