रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मास्को में नहीं करेंगे अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गलवां घाटी को लेकर भारत और चीन के बीच पनपा विवाद अभी तक सुलझने की स्थिति में नहीं पहुंचा है। इस बीच तीन दिनों के दौरे पर सोमवार की रात रूस की राजधानी मास्को पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी इवानोविच बोरिसोव के साथ मुलाकात की। इससे पहले वो भारतीय दूतावास पहुंचे थे। जहां उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
राजनाथ सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए रूसी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मारे गए रूसी सैनिकों को मेरी श्रद्धांजलि। इस युद्ध में लाखों भारतीय सैनिकों ने भी भाग लिया था और हम भी हताहत हुए थे। उन्होंने कहा कि मास्को (रूस) की मेरी यात्रा कोविड-19 के बाद भारत से किसी विदेशी देश में पहली आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल यात्रा है। यह भारत और रूस के बीच विशेष संबंध को दर्शाता है।
राजनाथ सिंह नहीं करेंगे अपने चीनी समकक्ष से मुलाकात
उन्होंने कहा कि हमारी चर्चा सकारात्मक रही। मुझे आश्वासन दिया गया है कि चल रहे अनुबंधों को न केवल बनाए रखा जाएगा, बल्कि जल्द ही पूरा किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हम इस वर्ष के अंत में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
भारत ने चीन के मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिसमें यह कहा गया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को मास्को में अपने चीनी समकक्ष से मिल सकते हैं। रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मास्को में चीन के रक्षा मंत्री के साथ मुलाकात नहीं करेंगे।
दिल्ली से मास्को के लिए रवाना होने से पहले राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर लिखा था कि तीन दिनों के दौरे पर मास्को जा रहा हूं। रूस की यात्रा से मुझे भारत-रूस रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर बातचीत करने का अवसर मिलेगा। मैं मास्को में 75वें विक्टरी डे परेड में भी शामिल होउंगा।
चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंगहे की भी 24 जून को मास्को में होने वाली सैन्य परेड में उपस्थित होंगे। इस परेड को द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ को मिली जीत की खुशी में मनाया जाता है। इस साल जीत की 75वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। अन्य देशों की सेनाओं के साथ परेड में भारतीय और चीनी सैनिक भी हिस्सा ले रहे हैं।