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US: व्हाइट हाउस के बाहर चार दशक से बैठे प्रदर्शनकारी को हटाया, ट्रंप के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

Mon, 08 Sep 2025 03:12 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 08 Sep 2025 03:12 AM IST
सार

व्हाइट हाउस के बाहर चार दशक से तंबू लगाकर शांति प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारी को कानून प्रवर्तन के अधिकारियों ने रविवार सुबह हटा दिया। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद की गई। 

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decades-long peace vigil outside White House removed after Donald Trump order
व्हाइट हाउस - फोटो : ANI

विस्तार

व्हाइट हाउस के बाहर पिछले चार दशक से शांति प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारी को कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने रविवार (स्थानीय समयानुसार) को हटा दिया। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर की गई, जिन्होंने हाल ही में राजधानी वाशिंगटन में बेघर लोगों के डेरों को हटाने का निर्देश दिया था। 

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कई वर्षों से शांति जुलूस का संचालन कर रहे फिलिपोस मेलाकु-बेलो ने बताया कि पार्क पुलिस ने इसे रविवार सुबह इसे हटा दिया। उनका कहना है कि अधिकारियों ने इस स्मारक को गलत तरीके से आश्रय स्थल बताकर कार्रवाई को जायज ठहराया। मेलाकु-बेलो ने कहा, 'एक शिविर और जुलूस में फर्क होता है। शिविर वह होता है जहां बेघर लोग रहते हैं। मेरे पास यहां कोई बिस्तर नहीं है, सिर्फ पोस्टर और बैनर हैं। यह सब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रथम संशोधन के अधिकार के तहत आता है।'
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व्हाइट हाउस ने धरना हटाने की पुष्टि की
व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि करते हुए बयान में कहा कि यह धरना 'व्हाइट हाउस आने वाले लोगों और आसपास के क्षेत्र के लिए खतरा बन गया था।' ट्रंप प्रशासन ने हाल के हफ्तों में वाशिंगटन डीसी में संघीय स्तर पर पुलिसिंग की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली है। इस कार्रवाई को उसी अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसे ट्रंप ने "डीसी की सुंदरता' बहाल करने के लिए शुरू किया है।

मेलाकु-बेलो ने कहा कि वह इसे नागरिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखते हैं और अपने वकीलों से सलाह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वे किसी ऐसी जगह को 'शिविर' कह रहे हैं जो असल में है ही नहीं, सिर्फ इसलिए ताकि ट्रंप के एजेंडे के मुताबिक बेघर लोगों के डेरों को हटाने की कार्रवाई हो सके।'

1981 में विलियम थॉमस ने शुरू किया था शांति जुलूस
यह शांति जुलूस 1981 में कार्यकर्ता विलियम थॉमस ने परमाणु निरस्त्रीकरण और युद्धों के विरोध के लिए शुरू किया था। माना जाता है कि यह अमेरिका का सबसे लंबा चलने वाला सतत् युद्ध-विरोधी प्रदर्शन था। थॉमस की 2009 में मौत के बाद मेलाकु-बेलो जैसे कार्यकर्ताओं ने इस छोटे से तंबू और 'बम से जीना, बम से मरना' लिखे बैनर को चौबीसों घंटे संभालकर रखा ताकि इसे हटाया न जा सके।


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शुक्रवार को ट्रंप तक पहुंची तंबू की चर्चा
शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को व्हाइट हाउस में हुए एक कार्यक्रम के दौरान इस तंबू की चर्चा ट्रंप तक पहुंची। कंजरवेटिव चैनल 'रियल अमेरिकाज वॉइस' के संवाददाता ब्रायन ग्लेन ने इसे 'व्हाइट हाउस आने वालों के लिए बदसूरत नजारा' बताया। ग्लेन ने कहा, 'व्हाइट हाउस के ठीक सामने एक नीला तंबू है जो शुरू में परमाणु हथियारों के विरोध के लिए लगाया गया था, लेकिन अब यह अक्सर एंटी-अमेरिकन और कई बार एंटी-ट्रंप प्रदर्शन का अड्डा बन गया है।'

मेलाकु-बेलो का आरोप- ग्लेन ने दी गलत जानकारी 
ट्रंप ने तब कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी और अपने स्टाफ को निर्देश दिया 'इसे हटा दो। आज ही, अभी हटा दो।' मेलाकु-बेलो का आरोप है कि ग्लेन ने गलत जानकारी दी थी कि तंबू में चूहे हैं और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, क्योंकि इसमें हथियार छिपाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, 'कोई हथियार नहीं मिला। और चूहों की बात तो बिल्कुल झूठ है-तंबू हटाते समय एक भी चूहा बाहर नहीं आया।'

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