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South Africa: खनिकों-पुलिस के बीच गतिरोध में 87 की मौत; बचाव अभियान में 240 लोगों को खदान से निकाया गया बाहर
Thu, 16 Jan 2025 03:23 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोहान्सबर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोहान्सबर्ग
Published by: श्वेता महतो
Updated Thu, 16 Jan 2025 03:23 PM IST
सार
अधिकारियों का मानना है कि लगभग दो हजार खनिक पिछले साल अगस्त से जोहान्सबर्ग के दक्षिण-पश्चिम में बफेल्सफोंटेन गोल्ड माइन में अवैध रूप से काम कर रहे थे।
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खदान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दक्षिण अफ्रीका में एक सोने की खदान में अवैध रूप से भूमिगत काम करने के दौरान फंसे खनिकों और पुलिस के बीच एक महीने से जारी गतिरोध में मरने वालों की संख्या कम से कम 87 हो गई है। पुलिस ने बताया कि उन्होंने एक बचाव अभियान चलाकर 240 से अधिक जीवित लोगों को खदान से बाहर निकाला। राष्ट्रीय पुलिस प्रवक्ता एथलेंडा माथे ने कहा कि सोमवार से शुरू हुए बचाव अभियान में खदान से 78 शव निकाले गए, जबकि नौ अन्य शव पहले ही बरामद किए गए थे।
राष्ट्रीय पुलिस प्रवक्ता एथलेंडा माथे ने फिलहाल इस बात का विवरण नहीं दिया कि शव कैसे निकाले गए। कम्यूनिटी ग्रुप ने कहा कि उन्होंने अपने बचाव के प्रयास खुद शुरू किए थे, क्योंकि पिछले साल अधिकारियों ने कहा था कि वे खनिकों की मदद नहीं करेंगे, क्योंकि वे अपराधी है। खनिकों की मौत का कारण भूख और निर्जलीकरण को बताया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि लगभग दो हजार खनिक पिछले साल अगस्त से जोहान्सबर्ग के दक्षिण-पश्चिम में बफेल्सफोंटेन गोल्ड माइन में अवैध रूप से काम कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि सभी जीवित लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बुधवार को बचाव अभियान समाप्त करने की घोषणा की। उनका मानना है कि अब कोई भी भूमिगत नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए गुरुवार को एक कैमरा खदान में भेजा जाएगा।
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पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि बचाव अभियान से पहले कम से कम 13 बच्चे भी खदान से बाहर निकाले गए। पुलिस ने बताया कि अधिकांश खनिक पड़ोसी देशों के रहने वाले हैं। एक कैबिनेट मंत्री ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "खनिकों को बाहर निकालने के प्रयास में पिछले साल कुछ समय के लिए उन्हें भाजन और अन्य आपूर्ति में कटौती की गई थी।" नागरिक समूहों ने कहा कि अधिकारियों ने खनिकों की मौतों में योगदान दिया। उन्होंने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की। पुलिस ने बताया कि खनिक अलग-अलग शाफ्टों के माध्यम से बाहर आने में सक्षम थे, लेकिन कई गिरफ्तार होने के डर से बाहर आने से इनकार कर दिया।
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राष्ट्रीय पुलिस प्रवक्ता एथलेंडा माथे ने फिलहाल इस बात का विवरण नहीं दिया कि शव कैसे निकाले गए। कम्यूनिटी ग्रुप ने कहा कि उन्होंने अपने बचाव के प्रयास खुद शुरू किए थे, क्योंकि पिछले साल अधिकारियों ने कहा था कि वे खनिकों की मदद नहीं करेंगे, क्योंकि वे अपराधी है। खनिकों की मौत का कारण भूख और निर्जलीकरण को बताया जा रहा है।
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अधिकारियों का मानना है कि लगभग दो हजार खनिक पिछले साल अगस्त से जोहान्सबर्ग के दक्षिण-पश्चिम में बफेल्सफोंटेन गोल्ड माइन में अवैध रूप से काम कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि सभी जीवित लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बुधवार को बचाव अभियान समाप्त करने की घोषणा की। उनका मानना है कि अब कोई भी भूमिगत नहीं है। इसकी पुष्टि के लिए गुरुवार को एक कैमरा खदान में भेजा जाएगा।
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पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि बचाव अभियान से पहले कम से कम 13 बच्चे भी खदान से बाहर निकाले गए। पुलिस ने बताया कि अधिकांश खनिक पड़ोसी देशों के रहने वाले हैं। एक कैबिनेट मंत्री ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "खनिकों को बाहर निकालने के प्रयास में पिछले साल कुछ समय के लिए उन्हें भाजन और अन्य आपूर्ति में कटौती की गई थी।" नागरिक समूहों ने कहा कि अधिकारियों ने खनिकों की मौतों में योगदान दिया। उन्होंने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की। पुलिस ने बताया कि खनिक अलग-अलग शाफ्टों के माध्यम से बाहर आने में सक्षम थे, लेकिन कई गिरफ्तार होने के डर से बाहर आने से इनकार कर दिया।