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Semiconductor Industry: बढ़ता जा रहा है सेमीकंडक्टर उद्योग का संकट, पर क्या चीन पर कस सकेगी लगाम?

Sun, 20 Nov 2022 06:59 PM IST
Atul Sinha इंटरनेशनल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
इंटरनेशनल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Atul Sinha Updated Sun, 20 Nov 2022 06:59 PM IST
सार

सेमीकंडक्टर उद्योग की संस्था एसईएमआई ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि इस वर्ष दुनिया भर में चिप कंपनियां 165.5 बिलियन डॉलर का पूंजी निवेश करेंगी। अब उसने यह अनुमान घटा कर 138.1 बिलियन डॉलर कर दिया है।

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crisis of semiconductor industry is increasing but will it be able to control China
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चिप निर्माता कंपनियों के अपनी लागत में कटौती का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। इससे पूरा सेमीकंडक्टर उद्योग संकट में फंस गया है। इससे इस वर्ष के आरंभ में दिखा सकारात्मक ट्रेंड पूरी तरह पलट गया है। कोविड-19 महामारी से उबरती दुनिया में चिप की मांग तेजी से बढ़ रही थी। लेकिन अमेरिका ने चीन से कारोबार पर जो प्रतिबंध लगाए, उनकी तेज मार इस उद्योग पर पड़ी है।
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प्रमुख चिप उत्पादक कंपनियों इंटेल और ताइवान सेमीकंडक्टर मैनुफैक्टरिंग को. (टीएसएमसी) ने इस साल के आरंभ में नए कारखाने लगाने, अधिक कर्मचारियों की भर्ती और उत्पादन में काम आने वाले उपकरणों की अधिक खरीदारी का एलान किया था। अब दोनों कंपनियों ने अपनी उन योजनाओं पर विराम लगाने की घोषणा की है। सेमीकंडक्टर उद्योग की संस्था एसईएमआई ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि इस वर्ष दुनिया भर में चिप कंपनियां 165.5 बिलियन डॉलर का पूंजी निवेश करेंगी। अब उसने यह अनुमान घटा कर 138.1 बिलियन डॉलर कर दिया है।
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ताइवान की सबसे बड़ी डिसप्ले निर्माता कंपनी एयू ऑप्ट्रोनिक्स के अध्यक्ष पॉल पेंग ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘2022 की दूसरी छमाही में इस कारोबार में आई गिरावट अचानक लगे झटके की तरह है।’ अमेरिका में फ्लोरिडा स्थित निवेश कंपनी फ्रैंक फंड्स में मुख्य निवेश अधिकारी ब्रायन फ्रैंक ने इसी वेबसाइट से कहा- ‘कोई कारोबार में विस्तार के लिए पूंजी निवेश में कटौती नहीं करना चाहता। लेकिन उद्योग बहुत कठिन हाल में है। चीन और ताइवान की स्थिति को लेकर हर कोई चिंतित है।’
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अमेरिका ने हाई टेक क्षेत्र में चीन के बढ़ रहे कदमों को रोकने के लिए उस पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के मुताबिक चीन से चिप कारोबार करने वाली हर कंपनी प्रतिबंध के दायरे में आ जाएगी। इसलिए अमेरिकी कंपनियों के साथ-साथ दूसरे कई देशों की कंपनियों को भी अपनी योजना बदलनी पड़ी है। इन कंपनियों का सबसे बड़ा बाजार चीन रहा है। इसलिए उन्हें अपने कारोबार की संभावनाओं में कटौती करनी पड़ी है। जबकि जानकार इस बात को लेकर निश्चिंत नहीं हैं कि प्रतिबंधों से चीन पर लगाम कस सकेगी।

चीन के पास सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विशेषज्ञ बड़ी संख्या में हैं। शुक्रवार को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार ऐसा हुआ, जब सेमीकंडक्टर पर केंद्रित एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सबसे ज्यादा रिसर्च पेपर चीन की तरफ से पेश किए गए हैं। इस मामले में उसने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अमेरिकी शहर सैन फ्रैंसिस्को में हर साल होने वाले इंटरनेशनल सॉलिड-स्टेट सर्किट कॉन्फ्रेंस (आईएसएससीसी) को सेमीकंडक्टर सेक्टर का ओलिंपिक्स समझा जाता है।

अगले फरवरी में होने वाली 2023 की कांफ्रेंस के लिए 198 रिसर्च पेपर स्वीकृत हुए हैं। उनमें से 59 यानी 29.8 प्रतिशत पेपर चीनी विश्वविद्यालयों या कंपनियों ने पेश किए हैं। अमेरिकी विश्वविद्यालयों और कंपनियों की तरफ से 40 रिसर्च पेपर आए हैँ। इस तरह पहली बार अमेरिका दूसरे नंबर पर चला गया है। तीसरे नंबर पर दक्षिण कोरिया, चौथे पर ताइवान और पांचवें पर संयुक्त रूप से जापान और नीदरलैंड्स रहे हैं।

 
विश्लेषकों ने कहा है कि चीन के विश्वविद्यालयों में सेमीकंडक्टर पर रिसर्च पर काफी जोर दिया जा रहा है। इससे चीन में इस क्षेत्र के विशेषज्ञ तैयार हुए हैं। पश्चिमी कंपनियों को आशंका है कि जिन तकनीक से चीन को वंचित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, संभव है कि उन्हें खुद निर्मित करने में चीनी विशेषज्ञ सक्षम हो जाएं।
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