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ट्रंप के फैसले से इस्राइल पर संकट?: अमेरिकी मदद बंद होने पर नेतन्याहू घिरे, विपक्ष बोला- सुरक्षा पर बड़ा खतरा

Wed, 04 Nov 2026 07:41 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, यरूशलेम
एएनआई, यरूशलेम Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 04 Nov 2026 07:41 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल को दी जाने वाली करीब 4 अरब डॉलर की सालाना सैन्य सहायता बंद करने का एलान किया है। इस फैसले की विपक्षी नेता यायर लापिड और यायर गोलान ने आलोचना की। उन्होंने इसे इस्राइल की सुरक्षा और रक्षा तैयारियों के लिए बड़ा झटका बताते हुए प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर सवाल उठाए।

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crisis for Israel Trump decision Netanyahu under pressure US aid ceases opposition warns major security threat
यायर लापिड, विपक्ष के नेता, इस्राइल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इस्राइल के विपक्ष के नेता यायर लापिड ने बुधवार को इस्राइल को दी जाने वाली सालाना अमेरिकी सहायता को खत्म करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे देश के इतिहास की सबसे गंभीर राजनीतिक और सुरक्षा विफलताओं में से एक बताया और इस मामले को संभालने के तरीके को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर सवाल उठाए।
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लापिड ने क्या कहा? 
लापिड ने कहा, 'ट्रंप का फैसला देश के इतिहास की सबसे गंभीर राजनीतिक और सुरक्षा विफलताओं में से एक है। यह सोचना भी मुश्किल है कि नेतन्याहू ने इसके आगे घुटने टेक दिए, और उससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि वह सुरक्षा तंत्र को तैयार करने में भी नाकाम रहे।'
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ट्रंप ने क्या एलान किया था? 
उनकी यह टिप्पणी तब आई जब ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका इस साल के अंत तक इस्राइल  को दी जाने वाली लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर की सालाना सहायता बंद कर देगा। ट्रंप का तर्क है कि इस्राइल आर्थिक रूप से इतना मजबूत है कि वह अपने हथियार खुद खरीद सकता है।
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फॉक्स न्यूज से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि इस्राइल तरक्की कर रहा है। उसे अब वित्तीय सहायता की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नेतन्याहू ने खुद ही इस सहायता को खत्म करने की संभावना पर बात की थी।

रक्षा तैयारियों पर पड़ेगा असर?
इस घोषणा ने इस्राइली विपक्षी नेताओं के बीच देश की रक्षा तैयारियों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता पैदा कर दी है, खासकर ऐसे समय में जब देश को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

गोलान ने क्या कहा?
इस्राइल की डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष यायर गोलान ने भी इस कदम की आलोचना की। उन्होंने अमेरिकी सहायता बंद होने को देश की सुरक्षा और सार्वजनिक वित्त (पब्लिक फाइनेंस) के लिए एक बड़ा झटका बताया। गोलान ने कहा, 'अमेरिकी सहायता का रुकना इस्राइल की सुरक्षा और वहां के लोगों के जीवन स्तर के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि ऐसे नाजुक समय में सुरक्षा जरूरतों के लिए फंड जुटाने का पूरा बोझ इस्राइली जनता पर आ जाएगा।'

उन्होंने इस्राइल की रक्षा क्षमताओं पर पड़ रहे दबाव की ओर भी इशारा किया। इसमें लगातार चल रहे सैन्य अभियानों के बाद एयर डिफेंस सिस्टम और आक्रामक हथियारों को फिर से तैयार करने (या उनकी भरपाई करने) की जरूरत भी शामिल है।


अमेरिका इस्राइल का एक प्रमुख सैन्य साझेदार है
अमेरिका दशकों से इस्राइल का एक प्रमुख सैन्य और सुरक्षा साझेदार रहा है। 2016 में हुए 10 साल के एक समझौते (MOU) के तहत, वाशिंगटन ने 2028 तक इस्राइल को हर साल लगभग 3.8 अरब अमेरिकी डॉलर की सैन्य सहायता देने का वादा किया था। इस सहायता में सैन्य उपकरणों और मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम के लिए फंड देना शामिल है, जो अमेरिका के साथ इस्राइल के रक्षा सहयोग का एक अहम हिस्सा है।
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