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CPEC: जिनपिंग बोले- पिछले 10 साल में मिले सार्थक नतीजे, बीजिंग में पाक और चीन के राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकात

Thu, 19 Oct 2023 11:14 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 19 Oct 2023 11:14 PM IST
सार

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान में आतंकी हमले और चीनी श्रमिकों को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने सैकड़ों चीनी श्रमिकों के लिए सुरक्षा बढ़ाने की मांग के साथ सीपीईसी को अपग्रेड करने का प्रस्ताव भी रखा।

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CPEC China Pak Cooperation President Xi Jinping pak caretaker PM Anwar-ul-Haq Kakar meeting
शी जिनपिंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक काकर के साथ बैठक की। उन्होंने 60 अरब अमेरिकी डॉलर लागत वाले चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को अपग्रेड करने का प्रस्ताव रखा। जिनपिंग ने पाकिस्तानी राष्ट्राध्यक्ष से चीनी श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील भी की।
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दरअसल, आए दिन होने वाले आतंकी हमलों और आतंक के वित्तपोषण के गंभीर आरोपों के कारण दुनियाभर में पाकिस्तान पर असुरक्षित देश का ठप्पा लगा है। ताजा घटनाक्रम में पाक के करीबी सहयोगी चीन ने भी दहशतगर्दी का मुद्दा उठाया है। चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा, आए दिन होने वाले हमलों के कारण सैकड़ों चीनी श्रमिकों को नुकसान होता है। गुरुवार को पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक काकर के साथ बैठक के दौरान जिनपिंग ने पाक से श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए कहा
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बता दें कि काकर और जिनपिंग की मुलाकात तीसरे बेल्ट एंड रोड इंटरनेशनल कोऑपरेशन फोरम में बीजिंग में हुई। इसमें श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे भी पहुंचे हैं। काकर के साथ अपनी बैठक में, जिनपिंग ने कहा कि चीन और पाकिस्तान सदाबहार रणनीतिक सहयोगी, भागीदार और कट्टर मित्र हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सरकारों ने लगातार बेल्ट एंड रोड परियोजना में सक्रिय रूप से सहयोग किया है।
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पाकिस्तान का समर्थन करता रहेगा चीन
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में, सीपीईसी ने सार्थक परिणाम प्राप्त किए हैं। जिनपिंग के अनुसार सीपीईसी के कारण पाकिस्तान के आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि बेल्ट एंड रोड सहयोग की एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर परियोजना बन गई है। उन्होंने कहा कि चीन राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में पाकिस्तान का समर्थन करना जारी रखेगा।

शी ने कहा कि दोनों देशों को सीपीईसी का एक उन्नत संस्करण बनाना चाहिए जो विकास, लोगों की भलाई, नवाचार, हरित विकास और खुलेपन को बढ़ावा दे। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें औद्योगिक पार्क, कृषि, खनन और नई ऊर्जा सहित क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ठोस परिणामों के लिए प्रमुख कनेक्टिविटी परियोजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।

जिनपिंग से बैठक के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री काकर ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले बेल्ट और रोड सहयोग का समर्थन करने के लिए राष्ट्रपति शी द्वारा घोषित आठ प्रमुख कदम वैश्विक कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगे। इससे अधिक न्यायसंगत और उचित वैश्विक शासन प्रणाली को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे पाकिस्तान और अन्य देशों को बेहतर विकास हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण अवसर मिलेंगे। .

दोस्ती कमजोर करने की इजाजत किसी को नहीं
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा चीन का विश्वसनीय और भरोसेमंद दोस्त रहेगा। काकर ने साफ किया कि पाकिस्तान दुनिया की किसी भी ताकत को पाकिस्तान-चीन की दोस्ती को कमजोर करने की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चीन के साथ हर मौसम में रणनीतिक सहयोग और साझेदारी को गहरा करने के लिए भी प्रतिबद्ध होगा।

श्रीलंका के राष्ट्रपति भी चीन के दौरे पर
पाकिस्तान के साथ बातचीत से पहले बुधवार को बैठक के समापन सत्र में अपने भाषण में, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वादा किया कि दो चीनी समर्थित विकास बैंक, चाइना डेवलपमेंट बैंक और एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक ऑफ चाइना की वित्तपोषण विंडो स्थापित करेंगे। दोनों बैंकों का मूल्य 350 बिलियन युआन (47.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर) बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (बीआरआई) की परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए बीजिंग के सिल्क रोड फंड में अतिरिक्त 80 बिलियन युआन (USD11 बिलियन) का निवेश किया जाएगा।

भारत क्यों कर रहा है बीआरआई का विरोध
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के लिए पाकिस्तान को सबसे अधिक बीआरआई फंड मिलता है। भारत ने बीआरआई फोरम की बैठक का बहिष्कार किया है। चीन की सीपीईसी परियोजना का भारत मुखर विरोध कर रहा है। भारत का कहना है कि सीपीईसी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजर रही है। विवादित और संवेदनशील इलाके में ऐसी परियोजना से संप्रभुता को भी चुनौती दिए जाने की आशंका है।


दूसरी तरफ पाकिस्तान सीपीईसी के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए चीन के साथ निकट सहयोग करने को इच्छुक है। काकर ने कहा, पाकिस्तानी सरकार पाकिस्तान में चीनी कर्मियों और संस्थानों की सुरक्षा और हितों को सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
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