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कोरोना संकट: नेपाल की सड़कों पर दूध की नदियां, फल-सब्जियां भी फेंकने को मजबूर किसान

Sun, 05 Apr 2020 11:21 AM IST
संजीव कुमार झा डिजिटल ब्यूरो, काठमांडू
डिजिटल ब्यूरो, काठमांडू Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 05 Apr 2020 11:21 AM IST
सार

  • लॉकडाउन ने किसानों और उत्पादकों के लिए खड़ा किया गंभीर संकट
  • होटल, बाज़ार बंद, मांग आधी से भी कम हुई

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Covid19, fruit and vegetable thrown by farmer in nepal due to coronavirus outbreak
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से नेपाल की सड़कों पर दूध की नदियां बह रही हैं, सब्जी और फल सड़ रहे हैं और कृषि उत्पादक अपना सामान फेंकने को मजबूर हो गए हैं। नाराज दूध उत्पादक अपने लिए बाजार नहीं उपलब्ध कराए जाने से नाराज होकर सरकार के खिलाफ हजारों लीटर दूध रोजाना सड़कों पर बहा कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। कपिलवस्तु की सड़कों पर दूध बहाए जा रहे हैं तो नवलपरासी और रुपनदेही में लोगों को मुफ्त में ही दूध बांटा जा रहा है।

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नेपाल डेयरी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अरानिको राजभंडारी के मुताबिक अबतक करीब 50 हजार लीटर दूध सड़कों पर बहाया जा चुका है। दूध की खपत पिछले कुछ समय में तेजी से कम हुई है और सरकार की ओर से ट्रांसपोर्ट मुहैय्या कराए जाने के बाद भी होटल और बाजार बंद होने की वजह से दूध की मांग कहीं से भी नहीं आ रही है। दूध की सबसे ज्यादा खपत होटल, रेस्तरां, चाय और कॉफी की दुकानों के अलावा मिठाई की दुकानों में सबसे ज्यादा होती है, लेकिन ये सारी दुकानें बंद हैं। यहां तक कि पाउडर दूध बनाने वाली कंपनियां भी दूध नहीं ले रही हैं और उनका कहना है कि जबतक उनका पुराना स्टॉक खत्म नहीं हो जाता वो तबतक दूध नहीं ले सकतीं।
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नेपाल का सबसे बड़ा पाउडर मिल्क बनाने वाला प्लांट चितवन में है, जहां रोजाना एक लाख लीटर दूध का पाउडर बनता है, जबकि बिराटनगर और पोखरा के प्लांट में 40 से 50 हजार लीटर दूध की खपत रोजाना होती है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से ये सभी प्लांट बंद हैं।  
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हिमालयन टाइम्स की खबर के मुताबिक सब्ज़ी और फल उगाने वाले किसान भी अपनी खराब हो रही फसलों को नष्ट करने को मजबूर हैं। छिटपुट बाजार ही खुले हैं, इसलिए मांग बेहद कम हो गई है। नेपाल फारमर्स ग्रुप फेडरेशन के अध्यक्ष नवराज बासनेट बताते हैं कि किसानों के पास अपनी सब्जी और फल फेंकने के सिवा और कोई विकल्प नहीं है।


खासकर तराई क्षेत्र के किसानों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। उनके पास कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं है और ऐसी हालत में उन्हें फसलें नष्ट करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। कालीमाटी फल और सब्जी मंडी में भी मांग बिल्कुल कम हो गई है। मंडी के सूचनाधिकारी बिनय श्रेष्ठा के मुताबिक होटल और रेस्तरां बंद होने की वजह से जहां पहले रोजाना 1100 टन तक फल और सब्ज़ी की मांग होती थी,वो अब घटकर 700 टन तक रह गई है।

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