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शोध: कोविड एंटीवायरल गोली से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा हो जाता है कम
Sat, 02 Oct 2021 01:27 AM IST
Jeet Kumar
एएनआई, वाशिंगटन
एएनआई, वाशिंगटन
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 02 Oct 2021 01:27 AM IST
सार
अगर इस दवा को मंजूरी मिल जाती है तो कोरोना के उपचार के लिए ऐसी पहली दवा होगी जो वैक्सीन के अलावा मौखिक रूप से दी जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
दुनिया में अभी भी कोरोना का खतरा कम नहीं हुआ है लेकिन कोरोना की एक ऐसी गोली पाई गई है जिससे अस्पताल में भर्ती होने का खतरा आधा हो जाता है। अमेरिकी की कंपनी मर्क एंड रिजबैक बायोथेरेप्यूटिक्स द्वारा बनाई गई इस दवा को मोल्नुपिरवीर कहा जाता है।
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नैदानिक परीक्षणों के दौरान पाया गया कि इस दवा को लेने के बाद कोरोना रोगियों के अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को 50 प्रतिशत तक कम हुआ। वहीं एक मीडिया रिपोर्ट की मानें तो सबसे ज्यादा संक्रामक डेल्टा वैरिएंट पर भी यह दवा लगातार प्रभावी साबित हुई है।
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गोली बनाने वाली कंपनी ने कहा कि वह परीक्षण के परिणामों के आधार पर जल्द से जल्द यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए एक आवेदन करने की योजना बना रही है। अगर इस दवा को मंजूरी मिल जाती है तो कोरोना के उपचार के लिए ऐसी पहली दवा होगी जो वैक्सीन के अलावा दी जाएगी।
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गोली बनाने वाली कंपनी ने कहा कि वह परीक्षण के परिणामों के आधार पर जल्द से जल्द यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए एक आवेदन करने की योजना बना रही है। अगर इस दवा को मंजूरी मिल जाती है तो कोरोना के उपचार के लिए ऐसी पहली दवा होगी जो वैक्सीन के अलावा दी जाएगी।
परीक्षण संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जापान, ताइवान और दक्षिण अफ्रीका सहित देशों में 170 से अधिक साइटों पर आयोजित किया गया था। परीक्षण की अवधि के दौरान मोलनुपिरवीर लेने वाले रोगियों में कोई मौत नहीं हुई, जबकि प्लेसबॉस के साथ इलाज करने वालों में आठ मौतें हुईं।