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रोजाना एस्पिरिन लेने वाले कोरोना वायरस के मरीजों की मौत की संभावना 47 फीसदी कम : अध्ययन में खुलासा

Tue, 27 Oct 2020 04:29 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 27 Oct 2020 04:29 PM IST
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covid-19 hospitalized patients taking aspirin daily are 47 percent less likely to die: University of Maryland School of Medicine study reveals
एस्पिरिन दवा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : For Representation Only

एक नए अध्ययन से पता चला है कि एस्पिरिन दवा दिए जाने से अस्पताल में भर्ती कोविड-19 मरीजों के गंभीर रूप से बीमार पड़ने या मौत के खतरे को कम किया जा सकता है।

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शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजाना कम खुराक में इस गोली को लेने से आईसीयू में भर्ती होने या वेंटिलेटर पर डालने की संभावना 40 फीसदी से अधिक कम हो सकती है। इसके अलावा, यह उन लोगों की तुलना में संक्रमण से मरने का जोखिम लगभग आधा कर देता है, जो दवा नहीं ले रहे थे।
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अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के विशेषज्ञों का कहना है कि यह निष्कर्ष गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद करने के लिए एस्पिरिन का इस्तेमाल करने के लिए 'सतर्क आशा की किरण' जगाते हैं।
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सामान्य तौर पर किसी भी दवा दुकान में उपलब्ध इस दवा का उपयोग सिर दर्द, महिलाओं के मासिक धर्म, मांसपेशियों में चोट, सर्दी और फ्लू और गठिया के कारण होने वाले मामूली जकड़न, दर्द और बुखार से राहत देने के लिए किया जाता है। 

लोग दिल के दौरे और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने या हृदय रोग में खून को पतला करने के लिए भी इसका उपयोग करते हैं, जैसा कि इस अध्ययन में शामिल मरीज करते थे।

यह खून के थक्के जमने रोकने की एस्पिरिन की क्षमता हो सकती है जो इसे कोविड-19 के लिए फायदेमंद बनाता है। क्योंकि कोविड-19 बीमारी में खून 'चिपचिपा' हो सकता है, जिससे धमनियों में घातक ब्लॉकेज बन सकती हैं। 

हालांकि, एस्पिरिन को एक नॉनस्टेरॉयडल एंटी-इनफ्लेमेटरी ड्रग (एनएसएआईडी) की श्रेणी में रखा जाता है। एनएसएआईडी ऐसी दवाओं का एक समूह है जो महामारी के दौरान सुर्खियों में रहा है, जो संभावित रूप से कोविड-19 के लक्षणों को बदतर बना रहा है। 

ऐसे कम अध्ययन हुए हैं जिनमें यह दावा भी किया गया है कि एनएसएआईडी श्रेणी की दवाएं, जिनमें पैरासिटामोल और इबुप्रोफेन भी शामिल हैं, अस्पताल में भर्ती कोरोना वायरस के मरीजों के मरने की संभावना को बढ़ा सकते हैं।


ब्रिटेन के सरकारी स्वास्थ्य सुविधा नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) का कहना है कि इसके 'कोई स्पष्ट सबूत नहीं' है कि एनएसएआईडी दवाएं खतरनाक हैं और इबुप्रोफेन लेना लोगों के लिए सुरक्षित है अगर उनमें कोरोना वायरस के लक्षण हैं।

एंटी-इनफ्लेमेटरी ड्रग के प्रभावों के की समीक्षा के 13 वैज्ञानिक अध्ययनों में भी इसे इस्तेमाल करने या इसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। 

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