फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   coronavirus : Virosphere, Only 250 virus species attack humans, 10 trillion remains to be discovered

वायरोस्फीयर : 250 वायरस प्रजातियां ही करती हैं इंसानों पर हमला, 10 खरब खोजने तो अभी बाकी हैं

Fri, 03 Apr 2020 07:14 AM IST
योगेश साहू न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस Published by: योगेश साहू Updated Fri, 03 Apr 2020 07:14 AM IST
विज्ञापन
coronavirus : Virosphere, Only 250 virus species attack humans, 10 trillion remains to be discovered
कोरोना वायरस - फोटो : Amar Ujala
पिछले दो दशकों में सार्स, मर्स, इबोला, निपाह के बाद अब कोरोना वायरस ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है। एक के बाद एक सामने आ रहे खतरनाक वायरस को लेकर वैज्ञानिकों के हाथ भी बंधे दिखते हैं। दरअसल, धरती पर करीब 10 खरब ऐसे वायरस हैं, जिनके नाम तक हमें मालूम नहीं।

loader
पिछले दो दशकों में सार्स, मर्स, इबोला, निपाह के बाद अब कोरोना वायरस ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है। एक के बाद एक सामने आ रहे खतरनाक वायरस को लेकर वैज्ञानिकों के हाथ भी बंधे दिखते हैं। दरअसल, धरती पर करीब 10 खरब ऐसे वायरस हैं, जिनके नाम तक हमें मालूम नहीं।

यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल इस विविध विषाणु मंडल (वायरोस्फीयर) के करीब सात हजार प्रजातियों के ही नमूने जुटाए जा सके हैं। दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में शुमार इबोला और कोविड-19 पर शोधरत प्रसिद्ध वैज्ञानिक फोर्ट डाएट्रिक का कहना है कि अभी वायरसों के बारे में बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है।

100 साल पहले भी मास्क और सामाजिक दूरी
1918 में स्पेन से फैल फ्लू के दौरान भी हालात अभी जैसे ही थे। लोगों को मास्क पहनना अनिवार्य किया गया था और सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा था। दुनियाभर में करीब 5 करोड़ लोगों की जान गई थी। 15 महीने के दौरान अकेले भारत में 1.8 करोड़ लोग मारे गए थे। कोरोना के कहर के बीच 100 साल पुरानी ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं।

6,828 प्रजातियों का ही नामकरण
17वीं सदी के अंत में वायरसों की खोज के बाद यह पता चला कि रेबीज और इंफ्लूएंजा जैसी बीमारियों के कारण ये विषाणु ही हैं। दशकों की मेहनत के बाद भी 6,828 प्रजातियों का नामकरण हो सका है। हालांकि, इसके मुकाबले कीटविज्ञानशास्त्रियों ने कीटों की 3,80,000 प्रजातियों का नामकरण करने में सफलता हासिल की है।

शुरुआत...समुद्र में 15 हजार वायरस

हाल के वर्षों में वैज्ञानिक वायरस के सैंपल में जेनेटिक पदार्थ और उन्नत कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए जीन का पता लगाते हैं। अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ मैथ्यू सुलिवैन और उनके साथियों ने 2016 में समुद्र के अंदर 15 हजार से ज्यादा वायरसों की पहचान की। उन्होंने दो लाख नए वायरस ढूंढे।

कोरोना की हैं 39 प्रजातियां

कोरोना वायरस की 39 प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन की खोज के बाद मौजूदा महामारी को ‘कोरोनावायरस डिजीज 2019’ या ‘कोविड-19’ नाम दिया। इस वायरस में और सार्स में आनुवांशिक समानताएं हैं।

मार्च में इंटरनेशनल कमिटी ऑन टैक्सोनॉमी ऑफ वायरसेज ने कहा कि ये दोनों वायरस एक ही प्रजाति से हैं। सार्स फैलाने वाले वायरस को सार्स-कोव के रूप में जाना जाता है इसलिए कोविड-19 को सार्स-कोव-2 कहा जा रहा है।

सिर्फ 250 प्रजातियां मानव को चुनती हैं होस्ट

वैज्ञानिकों के अनुसार, अब तक विषाणुओं की 250 प्रजातियों ने ही मानव शरीर को अपना होस्ट (मेजबान) चुना है। यानी वायरोस्फीयर में बहुत छोटा अंश ही इंसान को संक्रमित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों, पौधों, फंगी और प्रोटोजोंस को प्रभावित करने वाले वायरसों की तादाद करोड़ों में हैं।

जीन की अदला-बदली से पहचान है मुश्किल

वायरोस्फीयर में मौजूद प्रजातियों के वर्ग का पता लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम रहा है। वायरस दूसरी प्रजातियों के साथ जीन आदान-प्रदान कर लेते हैं, जिससे इनके समूहों में स्पष्ट फर्क करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस साल फरवरी में पाया गया कि एक झील में मिले वायरस के 74 जीनों में से 68 पहले किसी वायरस में नहीं मिले।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed