पाकिस्तान ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर लगाई पाबंदी, देश के पास मौजूद ढाई करोड़ से ज्यादा गोलियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इस वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका है। जहां पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड 2108 लोगों की मौत हुई और इसी के साथ मृतकों की संख्या 18 हजार से ज्यादा हो गई है।
वहीं, अब तक कोरोना की कोई वैक्सीन तैयार नहीं की गई है, लेकिन वर्तमान समय में दुनियाभर के डॉक्टरों द्वारा कोरोना के उपचार के लिए मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों को मलेरिया रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दी जा रही है। इस कारण दुनिया के तमाम देशों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की मांग में तेजी आ गई है।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने अमेरिका समेत कुछ देशों द्वारा मलेरिया रोधी दवा का इस्तेमाल कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए किए जाने के बाद इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी है। मीडिया में आई खबरों में यह जानकारी दी गई है।
पाकिस्तान में कोरोना वायरस के मामलों के बढ़ने के बीच वाणिज्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक कोविड-19 पर राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसी) जब तक उचित समझेगी यह प्रतिबंध जारी रहेगा।
पाकिस्तान में शुक्रवार को कोरोना वायरस के 190 नए मामले सामने आए और देश में संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़कर 4,788 हो गई। देश में महामारी के कारण अब तक 71 लोगों की जान जा चुकी है। इस बीमारी से अब तक देश में 762 लोग ठीक हो चुके हैं जबकि 50 की हालत अभी गंभीर बनी हुई है।
एक सप्ताह में दूसरी बार लगाया दवा के निर्यात पर प्रतिबंध
एक हफ्ते के अंदर यह दूसरा मौका है जब पाकिस्तान सरकार ने मलेरिया रोधी दवा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। पिछले दो सप्ताह में मलेरिया रोधी दवाओं खासकर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की अंतरराष्ट्रीय मांग में खासा इजाफा हुआ है। अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की पहचान कोरोना वायरस के संभावित इलाज के तौर पर की है।
डॉन अखबार के मुताबिक पाकिस्तान में इस बात को लेकर भ्रम है कि पाकिस्तान में कौन सा विभाग-वाणिज्य डिवीजन या राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय- दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अधिकृत है। पूर्व में वाणिज्य डिवीजन ने पाकिस्तान के औषधि नियामक प्राधिकरण के उस पत्र को अनुचित बताया गया था जिसमें मास्क के आयात पर प्रतिबंध की बात थी।
एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक, वाणिज्य डिवीजन ने एनसीसी की बैठक के मद्देनजर तीन अप्रैल को आदेश जारी किया था जिसमें सभी मलेरिया रोधी दवाओं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की बात कही गई थी।
अधिकारी ने कहा कि हमने फैसले को तेजी से लागू कराने के लिए आदेश जारी किया था। उन्होंने कहा कि यह भी तय किया गया था मंत्रिमंडल से बाद में इसका अनुमोदन ले लिया जाएगा। यह तय किया गया था कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय मलेरिया रोधी दवा के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित संघीय मंत्रिमंडल के अनुमोदन के लिए उसे विस्तृत जानकारी देगी।
सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल ने छह अप्रैल को हुई अपनी बैठक में प्रतिबंध को मंजूरी दे दी थी। वाणिज्य मंत्रालय ने हालांकि छह अप्रैल को एक अन्य आदेश जारी कर अपने तीन अप्रैल वाले उस आदेश को वापस ले लिया जो प्रतिबंध लगाने से संबंधित था।
पाकिस्तान में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की करीब ढाई करोड़ गोलियां मौजूद
मंत्रिमंडल के फैसले को लागू करने के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध के लिए एक नई अधिसूचना जारी की जिस पर नौ अप्रैल की तारीख थी। यह अधिसूचना मीडिया के लिए शुक्रवार को जारी की गई। करीब 20 कंपनियां हैं जो मलेरिया रोधी दवाओं का उत्पादन करती हैं।
इसके साथ ही प्राधिकरण ने घरेलू बाजार में भी इन दवाओं के सीमित इस्तेमाल का निर्देश दिया है। दवा विक्रेताओं से इन दवाओं को सिर्फ डॉक्टर का पर्चा देखकर ही देने को कहा गया है। प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब ढाई करोड़ गोलियां हैं और इन दवाओं के निर्माण के लिए करीब 9000 किलो कच्चा माल बाजार में उपलब्ध है।