कोरोना से बचाव: विमान में बीच की सीट खाली रखने से 57 फीसदी तक कम हो सकता है खतरा
एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि अगर विमानों में बीच की सीट को खाली रखा जाए तो यात्रियों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा काफी कम हो सकता है। अमेरिकी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की ओर से बुधवार को एक अध्ययन प्रकाशित किया गया। इस अध्ययन के अनुसार विमानों में में बीच की सीट खाली रखने से यात्रियों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका को पूरी तरह भरे विमान के मुकाबले 23 से 57 फीसदी तक कम की जा सकती है।
सीडीसी और कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने इस अध्ययन में यह जानने के लिए विमान में बीच की सीट खाली रखने से वायरस से संक्रमण को कितना कम किया जा सकता है, लैबोरेटरी मॉडल का इस्तेमाल किया। ये मॉडल बैक्टीरियोफेज एयरोसॉल के प्रसार पर आधारित थे। बैक्टीरियोफेज ऐसे वायरस होते हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित कर सकते हैं। हालांकि शोधार्थियों मास्क पहनने से इस पर पड़ने वाले असर का अध्ययन नहीं किया, जो कि विमान यात्रा के लिए अनिवार्य है।
इस अध्ययन में सामने आया कि विमान में बीच की सीट को खाली रखने से संक्रमण का खतरा 23 फीसदी से लेकर 57 फीसदी तक कम हो सकता है। 23 फीसदी कम खतरा उस स्थिति में रहा जब एक यात्री संक्रमित यात्री से दो सीट दूर था और समान पंक्ति में था। वहीं, अध्ययन में 57 फीसदी कम खतरा उस हालात में दर्शाया गया जब विमान में बीच की सीट तीन पंक्तियों तक खाली रही और विमान में मौजूद यात्रियों में कोविड-19 वायरस से संक्रमित और गैर संक्रमित दोनों लोग शामिल रहे।
ब्रिटेन ने कोविड टीकों के मिश्रण और मिलान संबंधी अध्ययन का विस्तार किया
कोरोना वायरस टीकों की खुराकों के मिश्रण और मिलान से होने वाले लाभों का आकलन करने के लिए किए जा रहे एक अध्ययन का दायरा बढ़ाते हुए इसमें मॉडर्ना और नोवावैक्स टीकों को भी शामिल किया गया है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में ‘कॉम-कोव’ अध्ययन में स्वयंसेवियों को ऑक्सफोर्ड / एस्ट्राजेनेका टीके दिए जाने के बाद फाइजर टीके देने पर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर गौर किया जा रहा है। यह अध्ययन फरवरी से चल रहा है और इसमें टीके लगाए जाने की कड़ी का उलटे क्रम में भी पालन किया जा रहा है।
अध्ययन का दायरा बढ़ाने के बाद अब 50 से अधिक आयु के लोगों को इसमें शामिल करने पर जोर दिया जाएगा जिन्होंने पिछले आठ से 12 हफ्तों में टीकों की पहली खुराक ली है। उन्हें अन्य टीके की दूसरी खुराक दिए जाने के बाद उनमें प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर गौर किया जाएगा। ऑक्सफोर्ड में प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता मैथ्यू स्नेप ने कहा कि इसका और मूल अध्ययन का मकसद यह पता लगाना है कि क्या उपलब्ध विभिन्न टीकों का पहली और दूसरी खुराक के रूप में अधिक लचीलेपन के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।