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उम्मीद: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के इम्युनोलॉजिस्ट का दावा, आठ महीने के भीतर आ सकती है वैक्सीन

Mon, 30 Mar 2020 06:50 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, लंदन।
वर्ल्ड डेस्क, लंदन। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 30 Mar 2020 06:50 AM IST
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Coronavirus : Expectation, Oxford University immunologist claims vaccine may come within eight months
vaccine

कोरोना की वैक्सीन जल्द ही मिल जाएगी। इम्युनोलॉजिस्ट और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. मार्टिन बाकमैन का दावा है कि अगले 6 से 8 महीने में दुनिया में पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। वैक्सीन बनाने में वायरस जैसे तत्त्व प्रयोग होते हैं जो संक्रामक नहीं होते। ये पार्टिकल शरीर में जरूरी एंटीबॉडीज को तैयार करते हैं जो रोग से लड़ने में सहायक होता है।

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कोरोना वायरस स्पाइक प्रोटीन से कोशिका पर स्थित रिसेप्टर से जुड़ता है, जो संक्रमण फैलाने की इजाजत देता है। इस रिसेप्टर को एसीई-2 कहते हैं। हम वैक्सीन बनाने की दिशा में स्पाइक प्रोटीन के एक हिस्से के साथ ही काम कर रहे हैं, जिसे रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) कहते हैं।
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आरबीडी को वायरस मानता है प्रतिरोधक तंत्र
आरबीडी डोमेन को वायरस के पार्टिकल के साथ रासायनिक रूप से जोड़ दिया। इससे प्रतिरोधक तंत्र ये मानता है कि वायरस जैसे पार्टिकल से जुड़ा आरबीडी डोमेन खुद एक वायरस है। इस कारण वह ताकतवर प्रतिरोधतंत्र तैयार करता है। यही अधिकांश वैक्सिन तैयार करने का आधार है।  वैक्सीन का परीक्षण चूहो पर हो चुका है। इसमें पाया गया है कि एसीई-2 रिसेप्टर का स्पाइक प्रोटीन से जोड़ रोक देती है जिससे संक्त्रस्मण नहीं होता। वैज्ञानिकों ने चूहों पर वैक्सीन का परीक्षण पूरा कर लिया है।

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क्लीनिकल ट्रायल जल्द

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने जल्द वैक्सीन निकालने के प्रयासों के तहत क्लिनिकल ट्रायल के लिए लोगों की तलाश शुरू कर दी है। इस परीक्षण के लिए यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट और ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप ने आपस में हाथ मिलाया है।

वैक्सीन डेवलपमेंट से जुड़े शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने आगामी परीक्षण के लिए इंग्लैंड में शुक्रवार से (18 से 55 साल उम्र के) स्वस्थ स्वयंसेवक चुनने (स्क्रीनिंग) शुरू किए। वहीं, यूनिवर्सिटी के जेन्नर इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर एड्रियन हिल ने कहा, ‘ऑक्सफोर्ड टीम को जल्द कार्रवाई का अभूतपूर्व अनुभव रहा है जैसा कि 2014 में पश्चिम अफ्रीका में इबोला महामारी के वक्त हुआ। यह उससे भी बड़ी चुनौती है।

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