कोरोना: इटली, अमेरिका और स्पेन में 50 फीसदी मौतें, भारत में रोजाना 500 से ज्यादा नए मामले
- दुनियाभर में हुई 50 फीसदी लोगों की मौत सिर्फ तीन देशों में हुई है
- अमेरिका, स्पेन और इटली में अबतक लगभग 54 हजार लोगों की मौत
- इटली में सर्वाधिक 18,848 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा
- सर्वाधिक 5 लाख से ज्यादा कोरोना संक्रमित लोग अमेरिका में हैं
- भारत में पिछले 5 दिन से रोजाना 500 से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं
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विस्तार
मौत का दूसरा नाम बन चुके कोरोना वायरस ने दुनियाभर में एक लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो 10 अप्रैल यानि शुक्रवार को मरने वालों का आंकड़ा एक लाख पार कर गया। इस महामारी से संक्रमितों की संख्या अब 17 लाख 770 हो चुकी है। करीब 3 लाख 76 हजार और 615 लोगों के ठीक होने की भी खबर है। चीन की सरहदों को पार कर दुनियाभर में पैर पसार चुके इस वायरस की दवा बनाने के लिए समूचे विश्व के वैज्ञानिक दिन-रात काम कर रहे हैं।
भारत में रोजाना 500 से 800 नए केस
दूसरे देशों की तुलना में भारत फिलहाल बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है। यहां 30 जनवरी को केरल में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। वहीं, पहली मौत 12 मार्च को कर्नाटक में हुई थी। जब भारत में कोरोना संक्रमित पहले मरीज की मौत हुई, तब तक दुनिया के दूसरे शहरों में कोरोना वायरस ने रफ्तार पकड़ ली थी। पिछले तीन दिन में कोरोना के नए मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। 8 अप्रैल को जहां 773 नए मरीज मिले तो 9 अप्रैल को संख्या घटकर 591 हो गई थी, लेकिन पिछले 24 घंटे बेहद संवेदनशील रहे। 10 अप्रैल को भारत में रिकॉर्ड 896 कोरोना पॉजिटिव सामने आए, जो 24 घंटे में अबतक की सबसे बड़ा आंकड़ा रहा।
| तारीख | संक्रमितों की संख्या | रोजाना नए मरीज |
| 25 मार्च | 606 | 42 |
| 26 मार्च | 694 | 88 |
| 27 मार्च | 724 | 30 |
| 28 मार्च | 918 | 194 |
| 29 मार्च | 1024 | 106 |
| 30 मार्च | 1251 | 227 |
| 31 मार्च | 1397 | 146 |
| 01 अप्रैल | 1834 | 437 |
| 02 अप्रैल | 2069 | 235 |
| 03 अप्रैल | 2547 | 478 |
| 04 अप्रैल | 3072 | 525 |
| 05 अप्रैल | 3577 | 505 |
| 06 अप्रैल | 4281 | 704 |
| 07 अप्रैल | 4789 | 508 |
आंकड़े: स्वास्थ्य मंत्रालय
इस रफ्तार से फैलता गया यह वायरस
चीन के वुहान शहर में दिसंबर 2019 को कोरोना का पहला मामला सामने आया था। जनवरी 2020 को पहली मौत हुई। 2 फरवरी को चीन के बाहर पहली मौत फिलीपींस में हुई। 44 वर्षीय यह मरीज मूल रूप से वुहान का ही रहने वाला था। जब यह मौत हुई तब तक चीन में कोरोना वायरस से 300 से अधिक लोग मर चुके थे। ताजा जानकारी के मुताबिक कोरोना ने सर्वाधिक नुकसान यूरोपीय देशों को पहुंचाया है। 15 फरवरी को यूरोप में इस वायरस से पहली मौत हुई। यह एक 80 वर्षीय चीनी पर्यटक थी, जो फ्रांस घूमने गई थी। इसके बाद दुनिया ने जो देखा वो पहले कभी नहीं हुआ था। दिसंबर 2019 से शुरू हुआ मौत का सिलसिला चार माह बाद भी बदस्तूर जारी है। अब मौत का आंकड़ा एक लाख को पार कर चुका है।
पिछले 10 दिन में 50 हजार लोगों की मौत
करीब 50 ऐसे देश हैं, जहां मृतकों की संख्या दहाई के अंकों में हैं। एक अप्रैल को दुनियाभर में मौत का आंकड़ा 47 हजार 210 था, जो अब 1 लाख को पार कर चुका है। मतलब साफ है कि पिछले 10 दिन में 50 हजार से ज्यादा लोग इस बीमारी का शिकार हुए। वर्ल्डोमीटर की रिपोर्ट को आधार मानें तो दुनियभार में रोजाना 6 हजार से ज्यादा लोग मर रहे हैं।एक लाख में कहां कितनी मौत?
दुनियाभर में हुई पचास फीसदी मौत का आंकड़ा सिर्फ तीन देशों से ही निकलता है। अमेरिका, स्पेन और इटली में मिलाकर लगभग 54 हजार लोगों की मौत हुई है। इटली में जहां 18,848 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे जो किसी भी देश में मृतकों की सबसे अधिक संख्या है, तो सर्वाधिक संक्रमित अमेरिका है। यहां 5 लाख से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव हैं और यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका में जिस तेजी से लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, डर है कि वह कहीं इटली को भी न पछाड़ दे। स्पेन में भी 16 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं चीन में कोरोना ने एक बार फिर से दस्तक दी है। अभी तक इससे देश में 81, 907 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 3, 339 लोगों की मौत हुई। कोरोना से सर्वाधिक ठीक होने वाले मरीज भी चीन में ही हैं। भारत में पिछले 6 दिन में रोजाना 500 से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं। छह दिनों में मृतकों की संख्या में तेजी से उछाल आया है।

| देश | कुल मामले | मृत्यु | ठीक हुए लोग |
| अमेरिका | 503,177 | 18,761 | 27,314 |
| स्पेन | 158,273 | 16,081 | 55,668 |
| इटली | 147,577 | 18,849 | 30,455 |
| फ्रांस | 124,869 | 13,197 | 24,932 |
| जर्मनी | 122,171 | 2,736 | 53,913 |
| चीन | 81,953 | 3,339 | 77,525 |
| यूके | 73,758 | 8,958 | 344 |
| ईरान | 68,192 | 4,232 | 35,465 |
| तु्र्की | 47,029 | 1,006 | 2,423 |
| बेल्जियम | 26,667 | 3,019 | 5,568 |
सभी आंकड़े Worldometers के आधार पर
कोरोना की तरह मानवजाति पर संकट बने ये वायरस
200 से अधिक देश किसी युद्ध की तरह इस वायरस से लड़ रहे हैं, ऐसे में कोविड-19 से हुई मौतों को अगर मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक गिना जाए तो गलत नहीं होगा। इतिहास के पन्नों को खंगाला जाए तो पता लगता है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब कोई वायरस मानवजाति के लिए खतरा बना हो, इससे पहले भी कई महामारियां फैलीं जिसने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली। 20वीं सदी में फैला स्मॉलपॉक्स ऐसा ही एक उदाहरण है, जिसने व्यापक तबाही मचाई थी। तब इस रोग से 30 करोड़ लोगों की जान चली गई थी। चेचक के नाम से पहचाने जाने वाले इस वायरस को खत्म करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1980 में मुहिम चलाई, जिसके बाद लोगों को टीके लगाए गए।
- एचआईवी: इसका पूरा नाम ह्युमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वायरस है। एचआईवी से पीड़ित होने पर बचने की संभावना बहुत ही कम होती है, क्योंकि इससे संक्रमित 96 फीसदी लोगों की मौत हो चुकी है। यह वायरस भी जानवरों से इंसानों में फैला था। बंदर से संक्रमण का पहला मामला 1980 में सामने आया था और अब तक यह 3.20 करोड़ लोगों की जान ले चुका है।
- सार्स का नहीं मिला कोई इलाज: जिस कोरोना वायरस से फिलहाल पूरी दुनिया संघर्ष कर रही है, सार्स को उसी वायरस के परिवार का हिस्सा माना जा रहा है। यह वायरस भी चीन से ही फैला था। चमगादड़ों के जरिए इंसानों में पहुंचे इस विषाणु ने 26 देशों के आठ हजार लोगों की जान ली थी। साल 2002 से 2003 के बीच फैले सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिन्ड्रोम (सार्स, SARS) की तरह 2012 में फैले मर्स को भी कोरोना परिवार का वायरस माना जाता है। सबसे पहले यह सऊदी अरब में फैला था। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति में निमोनिया और कोरोना वायरस के लक्षण मिले थे। इस वायरस से संक्रमित होने पर बचने की संभावना 50 फीसदी ही होती है।
- इंफ्लूएंजा: भारत में हर साल इंफ्लूएंजा के करीब 1 करोड़ मामले सामने आते हैं। यह भी महामारी की श्रेणी में ही आता है और इसके लक्षण भी कोरोना वायरस जैसे ही हैं। 1580 के करीब यह रूस, यूरोप और अफ्रीका में फैला था। रोम में इसके कारण 8,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इस वायरस ने 1918 में भी भारी तबाही मचाई थी।
- डेंगू: डेंगू मच्छरों के काटने से फैलता है और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में हर साल इसके कई मामले सामने आते हैं, हालांकि इससे मरने वालों की प्रतिशत 20 ही है। डेंगू के बारे में पहली जानकारी 1950 में फिलीपींस और थाइलैंड में मिली थी।
- इबोला वायरस: इबोला का पता पहली बार 1976 में कांगो और सूडान में चला था। इस वायरस के कारण भी कई लोगों की मौत हुई थी। 1976 के बाद इस वायरस ने 2014 में अफ्रीका में तबाही मचाई थी।