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कोरोना वायरस महामारी से मंडराया वैश्विक गरीबी का खतरा: रिपोर्ट
Fri, 12 Jun 2020 08:55 AM IST
आसिम खान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: आसिम खान
Updated Fri, 12 Jun 2020 08:55 AM IST
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कोरोना वायरस से मंडराया वैश्विक गरीबी का खतरा
- फोटो : PTI
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कोरोना वायरस महामारी की वजह से दुनियाभर में गरीबी और बेरोजगारी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। शोधकर्ताओं ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस से होने वाली आर्थिक गिरावट से 395 मिलियन लोग अत्यंत गरीब हो सकते हैं। दुनियाभर में 1.90 डॉलर (करीब 145 रुपये) रोजाना कमाने वाले गरीबों की संख्या एक अरब से ज्यादा हो सकती है।
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लंदन के किंग्स कॉलेज और ऑस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक रिसर्च में पता चला है कि मध्यम आय वाले विकासशील देशों में गरीबी का स्तर तेजी से बढ़ा है। इन देशों में गरीबी रेखा से बिल्कुल ऊपर लाखों लोग रहते हैं। बांग्लादेश, भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और फिलिपींस जैसे देशों का रिसर्च में जिक्र किया गया है जहां गरीबी का खतरा अधिक हो सकता है।
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संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कई परिदृश्यों के माध्यम से अध्ययन किया गया। इसमें विश्व बैंक की विभिन्न गरीबी रेखाओं को ध्यान में रखते हुए अत्यंत गरीबी में प्रतिदिन 1.90 डॉलर या उससे कम कमाने वाले और उच्चतर गरीबी में 5.50 डॉलर से कम कमाने वाले लोगों को परिभाषित किया गया।
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अध्ययन के अनुसार अत्यधिक गरीबी में रहने वालों की संख्या 1.12 बिलियन हो सकती है। उच्च-मध्यम आय वाले देशों में 5.50 डॉलर कमाने वाले लोगों की संख्या 3.7 बिलियन से अधिक हो सकती है। रिपोर्ट के लेखकों में से एक एंडी सुमनेर ने कहा, दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए दृष्टिकोण गंभीर है और यह तब तक ऐसा ही रहेगा जब तक कि सरकारें इन लोगों के लिए ज्यादा और जल्द कुछ नहीं करती हैं।
उन्होंने कहा कि नतीजा यह है कि गरीबी में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है और गरीबी को खत्म करने का संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य एक सपना बनकर रह सकता है।