कोरोना से मौत की कगार पर थी महिला.. डॉक्टर के एक प्रयोग ने जगाई उम्मीद
चंद दिनों पहले की बात है। न्यूयॉर्क के अस्पताल माउंट सिनाई में कोरोना से पीड़ित एक महिला बस दम तोड़ने ही वाली थी। अस्पताल उसके पति को ये खबर देने की तैयारी में था, क्योंकि इलाज के सभी हथकंडे नाकाम हो चुके थे। तभी वहां मौजूद फेफड़ों के डॉ. हूमान पूअर ने महिला को बचाने के लिए एक प्रयोग का जोखिम लिया।
उन्होंने संक्रमित महिला को रक्त का थक्का खत्म करने में इस्तेमाल होने वाली दवा टीपीए का इंजेक्शन दे दिया। इंजेक्शन के 20 मिनट बाद ही महिला की सांस चलने लगी। पूअर की खुशी ज्यादा देर नहीं टिक पाई, क्योंकि महिला की हालत फिर बिगड़ने लगी थी। इसके बाद उन्होंने पीड़ित को 24 घंटे के लिए कम-खुराक वाली टीपीए ड्रिप लगा दी।
पूअर का अनुमान था, इससे पुराने थक्कों को खत्म करने के साथ-साथ नए थक्कों को रोका जा सकेगा। महिला पर इलाज काम करने लगा। हालांकि, दुर्भाग्य से बीते शुक्रवार को मरीज की मौत हो गई। पर इस पूरे घटनाक्रम ने डॉक्टरों को संक्रमण का एक और पहलू समझने का मौका दे दिया। डॉक्टर इसे एक कदम आगे जाने जैसा देख रहे हैं।
शोध की मांग...रक्त का थक्का खत्म करने वाली दवा का किया इस्तेमाल
संभावनाएं पैदा करेगा यह तरीका: वह महिला जिस स्थिति में पहुंच चुकी थी, उस वक्त मेरे पास खोने को कुछ नहीं था। मैंने अभी तक पांच मरीजों पर यह इलाज अपनाया है लेकिन यह कुछ साबित नहीं करता। हालांकि, इससे आगामी शोध को लेकर संभावनाएं जरूर पैदा हुई हैं। -डॉ. हूमान पूअर
शुरूआती प्रयोग में दिख रहा फायदा
पूअर की टीम ने वैसा ही इलाज चार अन्य गंभीर मरीजों पर भी अपनाया। इनमें से एक तो नहीं बचा लेकिन तीन मरीजों में आश्चर्यजनक रूप से ऑक्सीजन का स्तर बढ़ गया। हालांकि ये मरीज अभी वेंटिलेटर पर है लेकिन इनमें पहले से सुधार है। इसे देखते हुए पूअर ने असामान्य थक्का बनने (क्लॉटिंग) से मरीजों की हालत बिगड़ने को लेकर जल्द से जल्द एक अध्ययन करने की मांग की है।
कई अन्य शोध में भी उम्मीद
पूअर के अलावा हाल ही में यूनिवर्सिटी फप कोलोराडो और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने टीपीए दवा पर शोध प्रकाशित किया है। इसमें कोलोराडो और मैसाचुसेट्स में तीन अन्य मरीजों पर भी इसके इस्तेमाल का जिक्र किया है।
ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने में कामयाबी
विशेषज्ञ इस घटना को छोटे रक्त थक्कों से फेफड़ों में रुकावट खड़ी होने के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है, डॉ. पूअर रक्त थक्के तोड़कर ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के साथ फेफड़ों को सुरक्षित कर पाने में सफल रहे।
चीनी डॉक्टरों ने चेताया था
चीनी डॉक्टरों ने मार्च में ही अमेरिका कॉलेज ऑफ कॉर्डियोलॉजी को बताया था कि उन्हें कुछ मरीजों के रक्त में अचानक थक्के बढ़ते दिख रहे थे। पर इन थक्कों के शरीर पर प्रभाव को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं थी।