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कोरोना वायरस से जुड़े कुछ सवालों का जवाब दे रहे हैं अमेरिकी चिकित्सक और विशेषज्ञों

Sat, 18 Jul 2020 04:03 PM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 18 Jul 2020 04:03 PM IST
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coronavirus antibody testing india us has many diffences american experts tried to give answer of some
नमूना एकत्र करता स्वास्थ्य कर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भारत अब अमेरिका और ब्राजील के बाद कोरोना से प्रभावित तीसरा देश बन गया है। अमेरिका जहां दावा करता है कि उसने दुनिया में सबसे ज्यादा परीक्षण किए हैं इसी कारण वहां मामलों की संख्या ज्यादा है। वहीं भारत में अब ज्यादा परीक्षण किए जा रहे हैं। ऐसे में कोरोना वायरस को लेकर आपके मन में कई तरह के सवाल होंगे। जिनके जवाब अमेरिकी चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने दिए हैं।

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अमेरिका में डीपीएम बहुत ज्यादा है लेकिन एंटीबॉडी प्रतिशत कम है लेकिन भारत में इसका उलट है। यह कैसे संभव है?
भारत और अमेरिका ने एक साथ अपनी कोविड-19 यात्रा शुरू की थी। अमेरिका में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम है और इसी कारण यहां ज्यादा लोगों की मौत हुई है। वहीं भारत में उच्च रोग-प्रतिरोधक क्षमता है और इसलिए यहां मृत्यु दर कम है।
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भारत में प्रयोग में लाई जाने वाली किट्स सकारात्मक के ज्यादा अनुमान दिखा रही हैं?
सभी किट्स अमेरिका के एफडीएफ से अनुमोदित हैं और सीई और आईसीएमआर द्वारा चिन्हित हैं। अमेरिका में भी इसी तरह की किट्स का इस्तेमाल होता है। हालांकि अलग-अलग किट में कुछ परिवर्तन हो सकता है। हमारे पास सभी उपलब्ध चार ब्रांड्स और वैश्विक तौर पर मशहूर किट्स का 15 प्रतिशत औसत है।
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एंडीबॉडीज के साथ क्रॉस रिएक्टिविटी क्या होनी चाहिए, भारत और अमेरिका दोनों में यह अनुमान से अधिक है?
दिल्ली में यह 30 प्रतिशत है जबकि अलीबाग और जमशेदपुर में यह केवल दो प्रतिशत है। यह गैर विशिष्ट है। पूरे भारत में यह एक समान सकारात्मकता होनी चाहिए।

प्लाज्मा थेरेपी के मामले में आप ऐसा क्यों कहते हैं कि अस्पताल से मिली एंटीबॉडीज के मुकाबले एसिप्टोमैटिक वाले मरीजों की एंटीबॉडीज ज्यादा बेहतर होती हैं?
1965 में मुझे किसी चीज के लिए प्रतिरक्षित किया गया था। मेरे गांव के 40 लोगों में से पांच गंभीर रूप से बीमार, पांच सामान्य और 30 में किसी तरह का कोई लक्षण नहीं था। जिसका मतलब है कि जिन लोगों में एंटीबॉडी का स्तर ज्यादा था उन्होंने टीके के दुष्प्रभावों का बेहतर तरीके से मुकाबला किया। 1985 में हमने थायरॉयड हार्मान्स के लिए खरगोशों को प्रतिरक्षित किया। अगले तीन दिनों तक हमने खरगोशों की निगरानी की। कुछ की विषाक्तता के कारण मौत हो गई। कुछ बीमार पड़े लेकिन ठीक हो गए। केवल कुछ ही स्वस्थ रहे। जो लोग स्वस्थ थे उन्होंने बीमार के मुकाबले बेहतर एंडीबॉडी का उत्पादन किया।

भारत में उच्च सकारात्मकता एंटीबॉडी को लेकर क्या कहेंगे?

पहले तो हम उम्मीद करते हैं कि सभी अवलोकन तकनीकी और तार्किक रूप से सही हैं। यदि यह सही हैं तो ऐसा लगता है कि हर एक मौत के मुकाबले 10,000 एंटीबॉडी के प्रति प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जोकि काफी ज्यादा है। दिसंबर 2020 तक राष्ट्रीय औसत 50 प्रतिशत होगा और वायरस गंभीर लक्षण वाले स्तर तक नहीं रहेगा और इसका प्रभाव भी कम हो जाएगा।

एंटीबॉडी की प्रतिक्रिया कितने लंबे समय तक रहेगी?
एमएमआर प्रतिरक्षा मंप्स, मीजल्स और रूबेला टीका है। हम गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्या के मामले में महिलाओं का रूबेला एलजी परीक्षण करते हैं। आश्चर्यजनक रूप से पहले महीने में प्रतिरक्षण करने पर 30 साल की उम्र तक इसके 90 प्रतिशत सकारात्मक नतीजे आए हैं। जब तक शरीर में वायरस रहेगा वह एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को उत्तेजित करता रहेगा।

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