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COP-28: जलवायु परिवर्तन के बड़े असर से भारत में बढ़ रही गर्मी-बारिश, सम्मेलन में डब्ल्यूएमओ ने पेश की रिपोर्ट
Wed, 06 Dec 2023 07:30 AM IST
यशोधन शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Wed, 06 Dec 2023 07:30 AM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र के डब्ल्यूएमओ ने मौसम, जलवायु व जल संसाधन पर शोध किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-20 का दशक उत्तर-पश्चिमी भारत, पाकिस्तान, चीन व अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी तट के लिए सबसे गर्म रहा है।
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जलवायु परिवर्तन
- फोटो : pixabay
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विस्तार
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन (कॉप-28) में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने भारत पर एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बिगड़ते जलवायु परिवर्तन के चलते 2011 से 2020 के दशक को औसत से ज्यादा गर्मी और सर्वाधिक बारिश वाला बताया गया। रिपोर्ट के डराने वाले आंकड़ों में बताया गया कि इस अवधि में जलवायु परिवर्तन की दर चिंताजनक रूप से बढ़ी जो रिकॉर्ड में सबसे अधिक रही।
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संयुक्त राष्ट्र के डब्ल्यूएमओ ने मौसम, जलवायु व जल संसाधन पर शोध किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-20 का दशक उत्तर-पश्चिमी भारत, पाकिस्तान, चीन व अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी तट के लिए सबसे गर्म रहा है। वहीं, ठंडे दिनों की संख्या लगातार घट रही है। पिछले दशक में 1961-1990 के दशकों की तुलना में ठंडे दिन 40% घटे हैं। भारत में बाढ़ की समस्या भी बढ़ गई है। जून 2013 में भारी बारिश, पहाड़ों की बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों के पिघलने की वजह से उत्तराखंड में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं।
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गुजरात की दो महिलाओं ने पेश किए पारंपरिक समाधान
देसी परिधान पहन संगीताबेन राठौड़ व जसुमतिबेन जेठाबाई परमार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पारंपरिक समाधानों के साथ जलवायु सम्मेलन में दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। इससे पहले कभी अपने गृह राज्य गुजरात से बाहर नहीं निकलीं अरावली की राठौड़ और जेतापुर की परमार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान पेश किए।
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अपने पारंपरिक ज्ञान के बलबूते वे नीम की पत्तियों और गोमूत्र का इस्तेमाल कर जैविक खाद एवं कीटनाशक बना रही हैं, जिसने न केवल वर्षों तक उनकी फसलों को बचाकर रखा है, बल्कि पूरे भारत में महिला किसान इसे अपना रही हैं। इससे रासायनिक खाद का एक सतत विकल्प मिला है।
लोगों की जेब पर भी बोझ बढ़ा
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2018 से 2020 के बीच भीषण बाढ़ से भारत में 2000 से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसके अलावा गर्मी से बचाव के लिए इसका जीवनयापन पर बड़ा असर पड़ा है। इससे लोगों की जेब पर भी बोझ बढ़ रहा है।
भारत को गति बनाए रखना जरूरी : यूएनडीपी
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) भारत के जलवायु प्रमुख डॉ. आशीष चतुर्वेदी ने कहा कि भारत को वैश्विक जलवायु कार्रवाई की दिशा में यहां संयुक्त राष्ट्र कॉप-28 शिखर सम्मेलन में अपनी गति और पैरवी के प्रयासों को जारी रखना जरूरी है। उन्होंने विकसित देशों से अधिक प्रतिबद्धता और वित्त पोषण की मांग को भी जरूरी बताया।
कॉप-33 की मेजबानी के लिए भारत सबसे सक्षम: यूएई
नई दिल्ली। भारत में संयुक्त अरब अमरीत (यूएई) के राजदूत अब्दुलनासिर अलशाली ने देश की संगठनात्मक शक्ति पर विश्वास जताते हुए कहा कि भारत कॉप-33 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने में सक्षम है। यदि कोई देश इस सम्मेलन की मेजबानी कर सकता है तो वह भारत है।