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कॉप 27 : जलवायु परिवर्तन पर यूएन प्रमुख ने चेताया- नरक के हाईवे पर बढ़ रही दुनिया, सहयोग करें या मरें

Tue, 08 Nov 2022 06:42 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, शर्म-अल-शेख।
एजेंसी, शर्म-अल-शेख। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 08 Nov 2022 06:42 AM IST
सार

दुनिया को ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से गर्म कर तबाही की तरफ ले जाने वालों में 15 गीगा टन के साथ सबसे ऊपर चीन है। वह अकेला भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ के 27 देशों से ज्यादा उत्सर्जन करता है। 3.5 गीगा टन के साथ भारत तीसरे स्थान पर है।

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Cop 27: UN chief warns on climate change world moving on highway to hell, cooperate or die
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस - फोटो : social media

विस्तार

मिस्र के शर्म-अल-शेख में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता (कॉप 27) में सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने दुनिया को चेताते हुए कहा, जलवायु परिवर्तन के चलते दुनिया नरक के हाईवे और पैर एक्सेलरेटर पर है। अपनी जिंदगी की जंग हम तेजी से हार रहे हैं। हमारे पास यह आखिरी मौका है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ग्रह को बचा सकें। अब कोई विकल्प शेष नहीं है। या तो सहयोग करें या नरक में जलें। 

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दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले चीन और अमेरिका से कहा कि वे उत्सर्जन में कमी लाएं और मिलकर मानवता को नष्ट होने से बचाएं। उन्होंने कहा कि या तो हम जलवायु के लिए एकजुट होकर समझौता करें और एक-दूसरे को बचाएं, वर्ना एक साथ आत्मविनाश के रास्ते पर तो बढ़ ही चुके हैं। उन्होंने सभी देशों से अपील करते हुए कहा कि अगर किसी भी तरह से 2050 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लिया, तब भी मानवता के पास जैसे-तैसे सिर्फ जिंदा रहने का लक्ष्य होगा। 
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इसके साथ ही उन्होंने कहा हर हाल में दुनिया को 2040 तक कोयला के इस्तेमाल से मुक्त करना होगा। दुनिया के सबसे अमीर और सबसे गरीब देशों के बीच एक समझौते का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, जीवाश्म ईंधन से संक्रमण में तेजी लाई जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि गरीब देश उत्सर्जन को कम कर सकें और जलवायु प्रभावों का सामना कर सकें जो पहले ही हो चुके हैं।
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सम्मेलन की मेजबानी कर रहे मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी ने कहा, जलवायु परिवर्तन बिना मानवीय प्रयासों के रुकने वाला नहीं। दुनिया के पास अब बहुत कम वक्त बचा है। उन्होंने गरीब और अमीर देशों के बीच नए समझौते का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत अमीर और विकसित देश 2030 तक उत्सर्जन खत्म करें और बाकी देशों को 2040 तक उत्सर्जन खत्म करने में मदद करें। संयुक्त राष्ट्र जलवायु प्रमुख सिमोन स्टील ने दुनियाभर के कई बड़े देशों के नेताओं के नहीं आने पर निराशा जताते हुए कहा कि ऐसे रवैये से तो समस्या टलने वाली नहीं है। 

भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से कम
दुनिया को ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से गर्म कर तबाही की तरफ ले जाने वालों में 15 गीगा टन के साथ सबसे ऊपर चीन है। वह अकेला भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ के 27 देशों से ज्यादा उत्सर्जन करता है। 3.5 गीगा टन के साथ भारत तीसरे स्थान पर है। हालांकि, उत्सर्जन को प्रति व्यक्ति के हिसाब से आंका जाता है, तो भारत वैश्विक औसत 6.3 टन प्रति व्यक्ति के औसत से आधे से भी कम 2.4 टन प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कर रहा है। अमेरिका 15 टन प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के साथ सबसे आगे है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जियेवा ने कहा कि दुनिया फिलहाल कार्बन क्रेडिट व्यवस्था से लक्ष्यों से काफी पीछे है। 2030 तक प्रति टन कार्बन की कीमत कम से कम 75 डॉलर होनी चाहिए। फिलहाल यह 2 डॉलर प्रति टन है।

यूएई ने कहा- जारी रहेगा तेल उत्पादन 
अगले वर्ष सीओपी-28 की मेजबानी करने वाले यूएई ने कहा कि जब तक जरूरी होगा, तेल उत्पादन जारी रखा जाएगा। यूएई उन देशों में शामिल है, जो जीवाश्म ईंधन के चलन को तेजी से खत्म करने के विचार के विरोध में है। 


चेतावनी : सदी के अंत में धधकने लगेगी धरती  
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की इमिशन गैप रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन मौजूदा स्तर रहा तो सदी के अंत में धरती का तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका होगा। जीवन बचाए रखने के लिए इसमें 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए।

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