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CJI Gavai: 'भारतीय न्याय व्यवस्था कानून के शासन से चलती है, बुलडोजर के नहीं'; मॉरीशस में बोले सीजेआई गवई

Fri, 03 Oct 2025 10:56 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट लुईस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट लुईस Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 03 Oct 2025 10:56 PM IST
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CJI Gavai says Indian legal system governed by rule of law, not by rule of bulldozer
सीजेआई बीआर गवई - फोटो : पीटीआई

सीजेआई जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था कानून के शासन से चलती है, न कि बुलडोजर के शासन से। मॉरीशस में सबसे बड़े लोकतंत्र में कानून का शासन विषय पर सर मौरिस रॉल्ट मेमोरियल लेक्चर 2025 का उद्घाटन करते हुए, उन्होंने बुलडोजर न्याय की निंदा करने वाले अपने ही फैसले का उल्लेख किया। प्रसिद्ध न्यायविद सर मौरिस रॉल्ट 1978 से 1982 तक मॉरीशस के मुख्य न्यायाधीश रहे।

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सीजेआई गवई ने द्वीप राष्ट्र की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। उन्होंने कानून के शासन के सिद्धांत और सुप्रीम कोर्ट की ओर से इसकी व्यापक व्याख्या पर प्रकाश डालते हुए कहा, इस फैसले ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था कानून के शासन से चलती है, न कि बुलडोजर के शासन से। बुलडोजर न्याय मामले में फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराधों के जवाब में अभियुक्तों के घरों को ध्वस्त करना कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करना, कानून के शासन का उल्लंघन करना और अनुच्छेद 21 के तहत आश्रय के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। सीजेआई ने यह भी कहा गया कि कार्यपालिका न्यायाधीश, जूरी और जल्लाद की भूमिका एक साथ नहीं निभा सकती। उन्होंने मॉरीशस के राष्ट्रपति धरमबीर गोखूल, प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और चीफ जस्टिस रेहाना मुंगली गुलबुल समेत अन्य की उपस्थिति में व्याख्यान दिया।
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सीजेआई ने 1973 के केशवानंद भारती मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख किया, जिसमें मूल संरचना सिद्धांत को शामिल किया गया था और संविधान के हर हिस्से में संशोधन करने की संसद की शक्तियों को सीमित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, भारतीय संविधान को अपनाने के बाद से पिछले 75 वर्षों में, कानून के शासन की अवधारणा कानूनी ग्रंथों से कहीं आगे विकसित हुई है और सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक विमर्श में समान रूप से व्याप्त है।

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