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चीनी दबाव: विश्व बैंक रिपोर्ट में हेरफेर पर घिरीं आईएमएफ प्रमुख, जानिए क्या है पूरा मामला

Sat, 18 Sep 2021 12:05 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, वाॅशिंगटन।
एजेंसी, वाॅशिंगटन। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 18 Sep 2021 12:05 AM IST
सार

कारोबारी सुगमता रिपोर्ट-2018 में चीन की रैंकिंग बढ़ाने के दबाव की बात सामने आई है। हालांकि तत्कालीन सीईओ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने इस जांच रिपोर्ट से असहमती जताई है। इसके साथ ही विश्व बैंक ने विवादित कारोबार सुगमता रिपोर्ट को पूर्णत: रद्द किया है। आइए जानते हैं इस मामले के बारे में और इससे जुड़ी कुछ अन्य बातें...

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Chinese pressure: IMF chief CEO Kristalina Georgieva surrounded by manipulation in World Bank report, know what is the whole matter
क्रिस्टालिना जॉर्जीवा। - फोटो : Twitter : @KGeorgieva

विस्तार

दुनिया में कारोबारी सुगमता का मापदंड समझी जाने वाली विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रिपोर्ट की विश्वसनीयता कटघरे में आ गई है। एक स्वतंत्र जांच में विश्व बैंक की ओर से 2018 की रिपोर्ट तैयार करने में चीनी दबाव के चलते हेरफेर करने की बात सामने आई है।

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जांच के मुताबिक, तत्कालीन सीईओ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा समेत विश्व बैंक नेतृत्वकर्ताओं ने बैंक की रिपोर्ट में चीन की रैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाया था। इस बीच, विश्व बैंक समूह ने 2018 और 2020 की कारोबार सुगमता रिपोर्ट के प्रकाशन को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
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बैंक की इथिक्स कमेटी के अनुरोध पर लॉ फर्म विल्मरहेल द्वारा तैयार रिपोर्ट, विश्व बैंक में चीन के प्रभाव और जॉर्जीवा के फैसले पर चिंता प्रकट करती है। जॉर्जीवा फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक हैं। हालांकि जांच रिपोर्ट आने के तुरंत बाद उन्होंने इसके निष्कर्षों और व्याख्याओं से असहमति जताई।
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जॉर्जीवा ने इस बारे में आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड को भी जानकारी दी है। आईएमएफ के तत्काली अध्यक्ष जिम योंग किम पर भी चीन का दबाव होने की बात कही गई है। विश्व बैंक ने कहा कि रिपोर्ट में डाटा से छेड़छाड़ की बात सामने आई है, इसलिए फिलहाल इसे रद्द किया गया है।

गंभीर सवाल खड़े हुए : विश्व बैंक

विश्व बैंक ने कहा है कि पूर्व बोर्ड अधिकारियों और बैंक के कुछ मौजूदा व पूर्व स्टाफ के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने इन खुलासों पर कहा है कि वह इसका अध्ययन करेगा।

विल्मरहेल की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ के पूर्व अध्यक्ष जिम योंग किम के सीनियर स्टाफ की ओर से प्रत्यक्ष व परोक्ष दबाव था कि रिपोर्ट की मैथडोलॉजी बदल दी जाए ताकि चीन का स्कोर बेहतर दिख सके।

फंड हासिल करने की एवज में किया गया खेल

रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्जिवा व एक मुख्य सलाहकार सिमियोन जांकोव की ओर से स्टाफ पर दबाव डाला गया था कि वह रिपोर्ट में कुछ बदलाव करे ताकि चीन की रैंकिंग में बदलाव किया जा सके।

उस वक्त बैंक ने पूंजी के लिए चीन से मदद मांगी थी। माना जा रहा है कि उसके ही एवज में ही रिपोर्ट में उसे यह फायदा देने की कोशिश की गई। इस रिपोर्ट में चीन ने 7 पायदान छलांग लगाते हुए 78वां स्थान हासिल किया था।

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक की साख को नुकसान

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने इस जांच रिपोर्ट से असहमति जताई है क्योंकि यह विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट-2018 में उनकी भूमिका से संबंधित है। कारोबारी सुगमता रिपोर्ट में डाटा अनियमितता को लेकर हुई जांच में जिस तरह के आरोप लगे हैं उससे आईएमएफ की कमान संभाल रही बुल्गारिया की नागरिक जॉर्जीवा की साख को काफी नुकसान पहुंच सकता है।

जॉर्जीवा का पक्ष सुनना जरूरी

विल्मरहेल की जांच रिपोर्ट में कारोबार सुगमता रिपोर्ट की कार्यप्रणाली व समस्याओं पर विस्तार से लिखने वाले सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट के जस्टिन सैंडफुर ने कहा, हमें जॉर्जीवा का पक्ष सुनने की जरूरत है। आईएमएफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वृहद आर्थिक और वित्तीय डाटा की अखंडता की निगरानी के लिए जिम्मेदार संस्था है। ऐसे में आईएमएफ के प्रमुख के लिए डाटा हेरफेर में शामिल होना बहुत ही हानिकारक आरोप हैं।

अमेरिकी दावे को मिली मजबूती

इस जांच रिपोर्ट से अमेरिका के उस दावे को मजबूती मिलती है, जिसमें वह बहुपक्षीय संगठनों द्वारा चीन की मदद का आरोप लगाता रहा है। अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय मामलों में चीन के दखल को कम करने की अपील कई सहयोगी देशों से की है। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने बयान में कहा, ये गंभीर निष्कर्ष हैं। उसने कहा कि हमारी पहली जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की अखंडता को बनाए रखना है।

चीन की धोखाधड़ी का पर्दाफाश : भारत

विश्व बैंक समूह द्वारा दुनिया के देशों में ‘कारोबार सुगमता रैंकिंग रिपोर्ट’ का प्रकाशन बंद करने के फैसले ने चीन की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इससे वैश्विक कंपनियों द्वारा अपने उत्पादन बेस भारत में स्थानांतरित करने के काम में तेजी आएगी। केंद्र सरकार के एक सूत्र ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। 

विश्व बैंक समूह ने अनियमितताओं के आरोपों के बाद इस रिपोर्ट का प्रकाशन बंद करने का निर्णय लिया है। 2017 में चीन की रैंकिंग को बढ़ाने के लिए कुछ शीर्ष बैंक अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर दबाव डाले जाने के कारण हुई डेटा संबंधी अनियमितताओं के बाद यह निर्णय लिया गया।

सूत्र ने कहा, भारतीय डेटा में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। भारत दुनिया के लिए पसंदीदा निवेश गंतव्य और एक विश्वसनीय भरोसेमंद गंतव्य बना हुआ है, जबकि चीन का आकर्षण घट रहा है।

चीन की धोखाधड़ी से विनिर्माण भारत में स्थानांतरित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसी बहुपक्षीय पहल को बढ़ावा मिलेगा। अक्तूबर 2019 में जारी विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रैंकिंग में भारत 14 स्थान की छलांग लगाकर 63वें स्थान पर पहुंच गया था।

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