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China: भारत के साथ 16वें दौर की वार्ता से पहले जिनपिंग ने किया शिनजियांग का दौरा, सैनिकों और अधिकारियों से की मुलाकात
Sat, 16 Jul 2022 07:53 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 16 Jul 2022 07:53 PM IST
सार
शी ने 12 से 15 जुलाई के बीच सीमांत प्रांत शिनजियांग का दौरा किया जहां उनकी सरकार पर अल्पसंख्यक मुस्लिमों पर व्यापक स्तर पर अत्याचार करने के आरोप लगते रहे हैं।
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शी जिनपिंग ने पश्चिमी थिएटर कमान के सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस सप्ताह लद्दाख की सीमा से सटे अशांत शिनजियांग प्रांत में तैनात पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों और अधिकारियों से मुलाकात की और अशांत प्रांत की रक्षा के लिए उनकी तारीफ की।
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शी ने शिनजियांग के सभी कमांडरों और लड़ाकों को बधाई दी
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- फोटो : पीटीआईॉ
चीनी सेना की सर्वोच्च हाईकमान केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के प्रमुख शी जिनपिंग ने शुक्रवार को प्रांतीय राजधानी उरूमकी में तैनात अधिकारियों और सैन्य प्रतिनिधियों से मुलाकात की। शी ने 12 से 15 जुलाई के बीच सीमांत प्रांत शिनजियांग का दौरा किया जहां उनकी सरकार पर अल्पसंख्यक मुस्लिमों पर व्यापक स्तर पर अत्याचार करने के आरोप लगते रहे हैं। राज्य नियंत्रित समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने प्रांत में तैनात सेना के सभी कमांडरों और लड़ाकों को बधाई दी और क्षेत्र में तैनात सैनिकों द्वारा किए गए 'उत्कृष्ट योगदान' की पूरी तरह से पुष्टि की।
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गलवान झड़प में घायल रेजिमेंटल कमांडर को दिया सम्मान
चीन द्वारा जारी किए गए वीडियो का एक दृश्य
- फोटो : twitter.com/shen_shiwei
आधिकारिक मीडिया के द्वारा जारी की गई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि जून 2020 में पूर्वी लद्दाख में झड़प के दौरान घायल हुए पीएलए के रेजिमेंटल कमांडर क्यूई फैबाओ भी बैठक में मौजूद थे। बाद में उन्हें सीमा की रक्षा के लिए हीरो रेजिमेंटर कमांडर से सम्मानित किया गया। बैठक में पीएलए के पश्चिमी थिएटर कमान के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे जो भारत और चीन के बीच की 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की देखरेख करते हैं।
शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में क्या कहा?
शी जिनपिंग
- फोटो : Agency
शी जिनपिंग के संबोधन का पूरा विवरण जारी नहीं किया गया है। हालांकि आधिकारिक मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि राष्ट्रपति शी ने इस बात पर जोर दिया कि नए युग में सेना को मजबूत करने के सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के विचार को लागू करना, नए युग की सैन्य रणनीति को लागू करना और शिनजियांग में सामाजिक और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से योगदान देना आवश्यक है।
भारतीय सेना के साथ 16वें दौर की वार्ता से पहले शी का दौरा
भारतीय और चीनी सेना (फाइल फोटो)
- फोटो : social media
सैनिकों के साथ शी की मीटिंग अहम मानी जा रही है क्योंकि पीपुल्स लिबरेशन एमी (पीएलए) की शिनजियांग सैन्य कमान मई 2020 से दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिरोध के बीच लद्दाख क्षेत्र में भारत-चीन सीमा की देखरेख कर रही है। शिनजियांग में चीनी सैनिकों के साथ उनकी बैठक भारत और चीन के बीच रविवार को होने वाली 16वें दौर की सैन्य वार्ता से पहले हुई है।
भारत इस बात पर जोर देते हुए पूर्वी लद्दाख में सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स से सैनिकों को जल्द से जल्द हटाने के लिए दबाव बना रहा है कि द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए सीमा पर शांति आवश्यक शर्त है।
भारत इस बात पर जोर देते हुए पूर्वी लद्दाख में सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स से सैनिकों को जल्द से जल्द हटाने के लिए दबाव बना रहा है कि द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए सीमा पर शांति आवश्यक शर्त है।
15 जून को भारतीय और चीनी सेना के बीच हुई थी खूनी झड़प
चीनी सेना के फौजी
- फोटो : Video Grab
15 जून 2020 को गलवान घाटी के खूनी संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। तब चीन ने अपने सैनिकों की मौत का आंकड़ा साझा नहीं किया। हालांकि लंबे समय चीन ने अपनी ओर से चार सैनिकों के हताहत होने की बात को स्वीकार किया था।
रविवार को 16वें दौर की बैठक में उम्मीद है कि भारत डेपसांग और डेमचोक में मुद्दों के समाधान के अलावा शेष सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स पर जल्द से जल्द सैनिकों को हटाने के लिए दबाव डालेगा।
रविवार को 16वें दौर की बैठक में उम्मीद है कि भारत डेपसांग और डेमचोक में मुद्दों के समाधान के अलावा शेष सभी फ्रिक्शन पॉइंट्स पर जल्द से जल्द सैनिकों को हटाने के लिए दबाव डालेगा।
एलएसी पर अब भी तैनात हैं 50 से 60 हजार सैनिक
LAC
- फोटो : अमर उजाला
सैन्य और कूटनीतिक वार्ता की एक श्रृंखला के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे और गोगरा क्षेत्र में अलगाव की प्रक्रिया पूरी की थी। दोनों पक्ष के पास वर्तमान में एलएसी के साथ संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं।