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शी जिनपिंग को राजनैतिक तख्तापलट का डर, नेताओं और अफसरों की वफादारी का ले रहे हैं टेस्ट
Mon, 14 Sep 2020 01:35 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेईचिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेईचिंग
Published by: Tanuja Yadav
Updated Mon, 14 Sep 2020 01:35 PM IST
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- फोटो : पीटीआई
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दुनिया पर अपना परचम लहराने का सपना देखने वाले चीन के शासक शी जिनपिंग को अपनी ही कुर्सी संभालने का डर सताने लगा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को इस बात का डर है कि कहीं देश में राजनीतिक तख्तापलट ना हो जाए और इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कड़ी कार्रवाई करनी शुरू कर दी है।
शी जिनपिंग ये सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं कि पुलिस, जज और स्टेट सिक्योरिटी एजेंट की जवाबदेही केवल उनके प्रति हो। उइगर टाइम्स एजेंसी के संस्थापक ताहिर इमीन ने बताया कि शी जिनपिंग पूरी पृथ्वी पर अकेले ऐसे नेता हैं, जो केंद्रीय सरकार के सभी 11 पद ले सकते हैं।
इधर पूर्व सीसीपी (चीन कम्यूनिस्ट पार्टी) स्कूल प्रोफेसर चाई शिया का कहना है कि सीसीपी के अंदर शी जिनपिंग के लिए बड़ी चुनौती है। उन्हें इस बात की जानकारी है कि अगर अमेरिका लगातार चीनी अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाता गया तो पार्टी की केंद्रीय समिति उन्हें हटाने के बारे में सोच सकती है।
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2022 में होने वाले नेशनल कांग्रेस से पहले शी जिनपिंग अपना यहां का सुरक्षातंत्र मजबूत करना चाहते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि जिन अधिकारियों की वफादारी जिनपिंग के लिए नहीं होगी, उन्हें माओ स्टाइल में दंड दिया जाएगा। जिनपिंग के वफादार शेन यिशिन ने एक कैंपेन की शुरुआत किया है, जिसके तहत उन लोगों को ढूंढकर बाहर निकालना है जो पार्टी के प्रति वफादार और ईमानदार नहीं है।
हालांकि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में इस बात की नाराजगी है कि उनकी तुलना में पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्यादा संरक्षण मिलता है। साल 2018 में शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति पद की अधिकमत सीमा खत्म कर खुद को ही हमेशा के लिए चीन का राष्ट्रपति और सुपर लीडर चुनने का एलान कर दिया था।
कम्यूनिस्ट पार्टी मे शी जिनपिंग के आने से दो दशक पहले तक एक और मजबूत खेमा हुआ करता था, इसका नाम जियांग गठबंधन था। इस गठबंधन के सदस्य कभी नहीं चाहते थे कि शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति बनें। एशिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो ऐेंड्रियस फुल्डा का कहना है कि शी जिनपिंग को चीन से बाहर भी खतरा है।
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शी जिनपिंग ये सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं कि पुलिस, जज और स्टेट सिक्योरिटी एजेंट की जवाबदेही केवल उनके प्रति हो। उइगर टाइम्स एजेंसी के संस्थापक ताहिर इमीन ने बताया कि शी जिनपिंग पूरी पृथ्वी पर अकेले ऐसे नेता हैं, जो केंद्रीय सरकार के सभी 11 पद ले सकते हैं।
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इधर पूर्व सीसीपी (चीन कम्यूनिस्ट पार्टी) स्कूल प्रोफेसर चाई शिया का कहना है कि सीसीपी के अंदर शी जिनपिंग के लिए बड़ी चुनौती है। उन्हें इस बात की जानकारी है कि अगर अमेरिका लगातार चीनी अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाता गया तो पार्टी की केंद्रीय समिति उन्हें हटाने के बारे में सोच सकती है।
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2022 में होने वाले नेशनल कांग्रेस से पहले शी जिनपिंग अपना यहां का सुरक्षातंत्र मजबूत करना चाहते हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि जिन अधिकारियों की वफादारी जिनपिंग के लिए नहीं होगी, उन्हें माओ स्टाइल में दंड दिया जाएगा। जिनपिंग के वफादार शेन यिशिन ने एक कैंपेन की शुरुआत किया है, जिसके तहत उन लोगों को ढूंढकर बाहर निकालना है जो पार्टी के प्रति वफादार और ईमानदार नहीं है।
हालांकि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में इस बात की नाराजगी है कि उनकी तुलना में पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्यादा संरक्षण मिलता है। साल 2018 में शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति पद की अधिकमत सीमा खत्म कर खुद को ही हमेशा के लिए चीन का राष्ट्रपति और सुपर लीडर चुनने का एलान कर दिया था।
कम्यूनिस्ट पार्टी मे शी जिनपिंग के आने से दो दशक पहले तक एक और मजबूत खेमा हुआ करता था, इसका नाम जियांग गठबंधन था। इस गठबंधन के सदस्य कभी नहीं चाहते थे कि शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति बनें। एशिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो ऐेंड्रियस फुल्डा का कहना है कि शी जिनपिंग को चीन से बाहर भी खतरा है।