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श्रीलंका : दुनिया के सबसे पुराने महाबोधि वृक्ष के लिए खतरा बना चीनी पावर प्लांट, बच्चों के लिए भी हानिकारक
Mon, 10 Apr 2023 06:09 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 10 Apr 2023 06:09 AM IST
सार
कोलंबो गजट की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरणविदों ने इलाके का सर्वे कर पता लगाया है कि पावर प्लांट से निकलने वाला जहरीला धुआं अनुराधापुरा में महाबोधि वृक्ष तक पहुंच रहा है। वहीं, पावर प्लांट के आसपास के पेड़ों के पत्ते जहरीले धुएं से पीले पड़ गए हैं।
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महाबोधि वृक्ष(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Social media
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विस्तार
श्रीलंका के नोरोचचोलाई में चीन के बनाए एक पावर प्लांट से निकल रहे जहरीले एसिड की वजह से दुनिया का सबसे पुराना पेड़, (महाबोधि वृक्ष) का अस्तित्व खतरे में है। इस जहरीले एसिड के वातावरण में घुलने से बच्चों में कई तरह के चर्म रोग हो रहे हैं।
कोलंबो गजट की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरणविदों ने इलाके का सर्वे कर पता लगाया है कि पावर प्लांट से निकलने वाला जहरीला धुआं अनुराधापुरा में महाबोधि वृक्ष तक पहुंच रहा है। वहीं, पावर प्लांट के आसपास के पेड़ों के पत्ते जहरीले धुएं से पीले पड़ गए हैं। नोरोचचोलाई स्थित इस पावर प्लांट का निर्माण चीनी कर्ज से चीनी कंपनी ने किया था। संचालन में भी चीन की अहम भूमिका है। 900 मेगावाट का यह प्लांट न केवल तय मानक से ज्यादा उत्सर्जन कर रहा है, बल्कि प्लांट से निकलने वाले अवशेष फ्लाई ऐश (धुएं के साथ उड़ने वाली राख) और बॉटम ऐश (भारी राख) को एक खुले गड्ढे में स्टोर किया जाता है। हवा के साथ यह धुएं में मिलकर यह जहरीली राख इलाके में नुकसान पहुंचा रही है।
पेड़ के पत्ते पीले पड़े जहरीली गैस से बच्चों में चर्म रोग की भी समस्या
चीन की सिनोपेक करेगी निवेश...श्रीलंका के राष्ट्रपति की मीडिया डिविजन (पीएमडी) के मुताबिक, चीन की सिनोपेक कंपनी हंबनटोटा में निवेश करेगी। कंपनी के अधिकारियों ने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ हाल ही में एक बैठक की, जिसके बाद यह एलान किया गया है।
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कोलंबो गजट की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरणविदों ने इलाके का सर्वे कर पता लगाया है कि पावर प्लांट से निकलने वाला जहरीला धुआं अनुराधापुरा में महाबोधि वृक्ष तक पहुंच रहा है। वहीं, पावर प्लांट के आसपास के पेड़ों के पत्ते जहरीले धुएं से पीले पड़ गए हैं। नोरोचचोलाई स्थित इस पावर प्लांट का निर्माण चीनी कर्ज से चीनी कंपनी ने किया था। संचालन में भी चीन की अहम भूमिका है। 900 मेगावाट का यह प्लांट न केवल तय मानक से ज्यादा उत्सर्जन कर रहा है, बल्कि प्लांट से निकलने वाले अवशेष फ्लाई ऐश (धुएं के साथ उड़ने वाली राख) और बॉटम ऐश (भारी राख) को एक खुले गड्ढे में स्टोर किया जाता है। हवा के साथ यह धुएं में मिलकर यह जहरीली राख इलाके में नुकसान पहुंचा रही है।
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पेड़ के पत्ते पीले पड़े जहरीली गैस से बच्चों में चर्म रोग की भी समस्या
चीन की सिनोपेक करेगी निवेश...श्रीलंका के राष्ट्रपति की मीडिया डिविजन (पीएमडी) के मुताबिक, चीन की सिनोपेक कंपनी हंबनटोटा में निवेश करेगी। कंपनी के अधिकारियों ने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के साथ हाल ही में एक बैठक की, जिसके बाद यह एलान किया गया है।
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