{"_id":"60c91c418ebc3e343612aa3f","slug":"chinese-former-officer-proposal-to-make-buffer-zone-for-stop-border-dispute","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमा विवाद: चीन के पूर्व सैन्य अफसर का प्रस्ताव, टकराव रोकने को खतरनाक क्षेत्रों में बने बफर जोन","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
सीमा विवाद: चीन के पूर्व सैन्य अफसर का प्रस्ताव, टकराव रोकने को खतरनाक क्षेत्रों में बने बफर जोन
Wed, 16 Jun 2021 03:01 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, बीजिंग।
एजेंसी, बीजिंग।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 16 Jun 2021 03:01 AM IST
सार
चीन के पूर्व सैन्य अफसर ने कहा- यह वक्त पीछे मुड़कर देखने का भी है, विश्वास बहाली के उपायों को लागू करें दोनों देश, बफर जोन बनाना इसी दिशा में आगे बढ़ने का एक कदम है और यह संभव भी है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चीन के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अफसर ने प्रस्ताव दिया है कि चीन और भारत को मौजूदा विश्वास बहाली उपायों को लागू करना चाहिए। सीमा विवाद को टकराव का रूप लेने से रोकने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से लगे ‘सर्वाधिक खतरनाक क्षेत्रों’ में ‘बफर जोन’ बनाने के साहसिक कदम के साथ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए।
विज्ञापन
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सेवानिवृत्त वरिष्ठ कर्नल (सेवानिवृत्त) झाउ बो ने कहा, दोनों पक्ष इस पर सहमत हुए हैं कि एलएसी के जिन इलाकों में साझा सहमति नहीं है, उन इलाकों में वे गश्त नहीं करेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, यह वक्त पीछे मुड़कर देखने का है। 1993 और 2013 के बीच चीन और भारत के बीच विश्वास बहाली उपायों पर सरकारी एवं सैन्य स्तरों पर चार समझौते हुए थे। चीन द्वारा किसी अन्य देश के साथ हस्ताक्षर किए गए द्विपक्षीय समझौतों से यह कहीं अधिक है। इन समझौतों में दोनों देशों ने एक बार फिर से यह दोहराया कि वे एलएसी पर अपने-अपने सैन्य बलों को घटाएंगे या सीमित कर न्यूनतम संख्या पर ले जाएंगे।
विज्ञापन
भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवां घाटी झड़प के एक साल पूरे होने के मौके पर हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट समाचार पत्र में मंगलवार को ‘चीन और भारत को सीमा गतिरोध पर आगे बढ़ने के लिए अतीत पर विचार करना चाहिए’ शीर्षक वाले आलेख में बो ने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा, यह जानलेवा घटना खौफनाक थी जो बल प्रयोग नहीं करने के दोनों देशों के बीच बनी दशकों पुरानी सहमति को तोड़ने के करीब थी। शिन्हुआ विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इंटरनेशनल सिक्युरिटी एंड स्ट्रेटेजी में सीनियर फेलो बो ने तनाव घटाने के लिए अपने प्रस्तावों वाले आलेख को चीन की आधिकारिक मीडिया के बजाय हांगकांग मीडिया में प्रकाशित करने का विकल्प चुना।
नए उपायों पर करें गौर
बो ने कहा कि विश्वास बहाली के नए उपायों पर भी काम करना चाहिए। कोर कमांडर स्तर की 11 दौर की वार्ता से तनाव घटाने में मदद मिलने का जिक्र करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि अग्रिम पंक्ति के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच इस तरह की नियमित बैठकें जारी रखनी चाहिए।
दोनों देशों के बीच हो हॉटलाइन
बो ने कहा, समय पर संवाद के लिए दोनों देशों को हॉटलाइन स्थापित करने पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने रूस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और वियतनाम के साथ चीन के सैन्य हॉटलाइन का जिक्र करते हुए यह सुझाव दिया। बो ने कहा, भारत अक्सर ही पाकिस्तान के साथ अपने हॉटलाइन का इस्तेमाल करता है। ऐसे में सीमा विवाद वाले दो पड़ोसियों में इस तरह का माध्यम होना चाहिए।