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अब पश्चिम और चीन के बीच आबादी के आंकड़ों पर छिड़ा संग्राम, एक-दूसरे के दावों को ठहरा रहे हैं गलत

Fri, 14 May 2021 04:46 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 14 May 2021 04:46 PM IST
सार

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि ताजा जनसंख्या आंकड़ों के मुताबिक बीते एक दशक में चीन में नस्लीय अल्पसंख्यकों की आबादी 10.26 फीसदी बढ़ी। जबकि हान समुदाय की आबादी सिर्फ 4.93 फीसदी बढ़ी। इस दौरान पूरे चीन की आबादी 5.38 फीसदी बढ़ी। यह अब एक अरब 41 करोड़ हो गई है...

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Chinese Foreign Ministry spokesperson said population of racial minorities has increased by 10.26 percent in the last decade
उइघुर मुस्लिम - फोटो : ANI (File)

विस्तार

चीन के ताजा जनसंख्या आंकड़ों को लेकर पश्चिमी देशों में हुई आलोचना और उठाए गए सवालों से चीन में भारी नाराजगी है। खास कर शिनजियांग प्रांत की जनसंख्या को लेकर खबर पूरी दुनिया के मीडिया में छपी। उन ज्यादातर खबरों में ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एएसपीआई) के एक विश्लेषण को स्रोत बनाया गया। विश्लेषण में दावा किया गया है कि चीन ने शिनजियांग में जो नीतियां अपनाई हैं, उनकी वजह से वहां उइघुर मुसलमानों की आबादी में तेजी से गिरावट आई है। इसके अलावा पश्चिमी मीडिया में पूरे के जनसंख्या आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा गया कि चीन में अब कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या तेजी से घट रही है। इस कारण चीन अब आर्थिक गिरावट के दरवाजे पर पहुंच गया है।

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चीन में इन आलोचनाओं का क्या असर हुआ, वह इससे ही जाहिर है कि इनका जवाब देने के लिए चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक प्रवक्ता को उतारा। शिनजियांग के मामले में उसकी प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने जवाबी सवाल दागा कि आखिर ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक ने किन आंकड़ों के आधार पर अपना निष्कर्ष निकाला है। एएसपीआई ने कहा था कि शिनजियांग में जन्म दर में 48.74 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि चीनी प्रवक्ता ने दावा किया कि उइघुर मुसलमानों की आबादी साल दर साल बढ़ रही है। वहां 2010 से 2018 के बीच उइघुर मुसलमानों की जनसंख्या 25 फीसदी बढ़ी। जबकि शिनजियांग में हान समुदाय (चीन का मुख्य नस्लीय समुदाय) की आबादी महज दो फीसदी बढ़ी। हुआ ने ये दावा भी किया कि बीते 40 साल में उइघुर मुसलमानों की आबादी लगभग दो गुना हो गई है।
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एएसपीआई ने दावा किया था कि 2017 के बाद से शिनजियांग में उइघुर मुसलमानों के जन्म दर में भारी गिरावट आई है। 2017 से 2019 तक ये दर आधी रह गई। एएसपीआई का दावा है कि ऐसा चीन सरकार की जानबूझ कर लागू की गई नीतियों के कारण हुआ है। इन नीतियों में कथित तौर पर जबरन बंध्याकरण और गर्भपात कराना शामिल है। पश्चिमी मीडिया में बुधवार और गुरुवार को विस्तार से छपी रिपोर्टों में चीन के ताजा जनसंख्या आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण पेश किया गया।
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लेकिन चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि ताजा जनसंख्या आंकड़ों के मुताबिक बीते एक दशक में चीन में नस्लीय अल्पसंख्यकों की आबादी 10.26 फीसदी बढ़ी। जबकि हान समुदाय की आबादी सिर्फ 4.93 फीसदी बढ़ी। इस दौरान पूरे चीन की आबादी 5.38 फीसदी बढ़ी। यह अब एक अरब 41 करोड़ हो गई है।

लेकिन जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि 2010 से 2019 के बीच हुई जनसंख्या वार्षिक वृद्धि दर सिर्फ 0.53 फीसदी रही, जो अब तक की सबसे कम दर है। इसे इस बात का संकेत समझा गया है कि चीन में आने वाले वर्षों में युवा लोगों की हो जाएगी। इसका असर चीन के आर्थिक विकास पर पड़ेगा। साथ ही बुजुर्गों की देखभाल पर खर्च बढ़ने के कारण सामाजिक कल्याण की नीतियां महंगी हो जाएंगी। हालांकि चीन में भी इसे लेकर चिंता है, लेकिन विदेशी मीडिया में हुई चर्चाएं चीन को रास नहीं आई हैं। इसलिए विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने उनका जवाब तल्ख लहजे में दिया। उन्होंने कहा- ‘मेरे मन में सवाल उठता है कि क्या उनका (पश्चिमी मीडिया) ध्यान इस तरफ नहीं गया गया कि चीन की आबादी एक अरब 41 करोड़ है, जो अमेरिका और यूरोप की साझा आबादी से ज्यादा है। मुझे नहीं मालूम कि वे मीडिया रिपोर्टर कैसे जनसंख्या विशेषज्ञ बन गए।’


हाल के समय में ये आम रुझान रहा है कि चीन की कमियां गिनाए जाने पर चीनी प्रवक्ता उसके जवाब में तुरंत अमेरिका और यूरोप की कमियां गिनाने लगते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। चीन की आबादी में गिरावट की बात आने पर चीनी प्रवक्ता ने तुरंत जिक्र किया कि अमेरिका में जनसंख्या वृद्धि दर गिरकर पिछले दस साल में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

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