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स्मार्टफोन बाजार पर हावी चीनी कंपनियां: तकनीक अमेरिका की, मगर मुनाफा चीन का!

Thu, 02 Sep 2021 04:18 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 02 Sep 2021 04:18 PM IST
सार

जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि चीनी कंपनियों ने ये कामयाबी अमेरिकी तकनीक के सहारे हासिल की है। शाओमी, ओपो और वीवो तीनों कंपनियां अमेरिकी कंपनी क्वैलकॉम के प्रोसेसरों का इस्तेमाल करती हैं। इन प्रोसेसरों का उत्पादन या तो ताइवान या दक्षिण कोरिया मे होता है...

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Chinese companies leading the smartphone market worldwide
स्मार्टफोन - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

अमेरिकी प्रतिबंधों का चीन की कंपनी हुवावे पर बहुत बुरा असर हुआ है। 2019 की तीसरी तिमाही में दुनिया के स्मार्टफोन बाजार में इस कंपनी का हिस्सा 18 फीसदी था। 2021 की पहली तिमाही में ये गिर कर सिर्फ चार फीसदी रह गया। जानकारों का कहना है कि इस सफलता पर अमेरिका के नीति निर्माता संतोष कर सकते हैं। लेकिन उनके लिए यह अच्छी खबर नहीं है कि अब भी दुनिया के स्मार्टफोन बाजार में दबदबा चीनी कंपनियों का ही है। 2021 की दूसरी तिमाही के सामने आए आंकड़ों के मुताबिक इस बाजार में चीनी कंपनियों का हिस्सा 37 फीसदी था।

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इस वक्त स्मार्टफोन के वैश्विक बाजार की पांच सबसे बड़ी कंपनियों में तीन चीन की हैं। फिलहाल इस बाजार पर सैमसंग का हिस्सा 19 फीसदी, शाओमी का 17 फीसदी, एपल का 14 फीसदी, ओपो का 10 फीसदी और वीवो का भी 10 फीसदी है। शाओमी, ओपो और वीवो चीन की कंपनियां हैं। ऐसा पहली बार हुआ है, जब शिओमी ने एपल को पीछे छोड़ दिया।
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मगर जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि चीनी कंपनियों ने ये कामयाबी अमेरिकी तकनीक के सहारे हासिल की है। शाओमी, ओपो और वीवो तीनों कंपनियां अमेरिकी कंपनी क्वैलकॉम के प्रोसेसरों का इस्तेमाल करती हैं। इन प्रोसेसरों का उत्पादन या तो ताइवान या दक्षिण कोरिया मे होता है। इसका मतलब यह हुआ कि चीनी कंपनियों का बाजार बढ़ने के साथ अमेरिका और उसके सहयोगी देश- ताइवान और दक्षिण कोरिया का मुनाफा भी बढ़ा है।

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वेबसाइट निक्कई एशिया के एक विश्लेषण के मुताबिक एपल कंपनी के सबसे बड़े 200 सप्लायरों में से 51 चीन के हैं। उनमें 48 ताइवान, 34 जापान और 32 अमेरिका के हैं। इसका मतलब हुआ कि क्वैलकॉम या एपल जैसी अमेरिकी कंपनियों को होने वाले मुनाफे में चीनी कंपनियों का बड़ा हाथ है। इसकी वजह चीनी कंपनियों का अलग नजरिया है। एपल कंपनी के एक सप्लाई चेन मैनेजर ने निक्कई एशिया से कहा- ‘ज्यादातर चीनी सप्लायर एक जैसे नजरिए से काम करते हैं। वे कम मुनाफे वाले कारोबार को स्वीकार करने को तैयार रहते हैं, जबकि दूसरे देश के सप्लायर ऐसा नहीं करते। चीनी सप्लायर एपल के साथ काम करते हुए अपनी भूमिका बढ़ाते हैं और अगली बार अधिक कारोबार की मांग करते हैं।’

अमेरिका में इन दिनों सेमीकंडक्टर उद्योग में अमेरिकी वर्चस्व बनाए रखने पर खास जोर दिया जा रहा है। ये राय जताई गई है कि सेमीकंडक्टर उद्योग में मजबूती बनाए रख कर ही अमेरिका वैश्विक कारोबार में अपनी बढ़त कायम रख सकता है। ऐसा करना उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन की मजबूती के लिए भी जरूरी है। अमेरिका सरकार ने अब सेमीकंडक्टर उद्योग में 50 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इसके जरिए उसका मकसद सेमीकंडक्टर उत्पादन की तकरीबन एक चौथाई क्षमता अमेरिका में रखना है।

अमेरिका ने सेमीकंडक्टर और दूसरे हाई टेक क्षेत्रों तक चीन की पहुंच रोकने के लिए कई उपाय किए हैं। इसी मकसद से हुवावे पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियां इस मामले में चीन की उपेक्षा करने को तैयार नहीं दिखती हैं। उनके कारोबारी संबंध चीनी कंपनियों के साथ पहले जैसे बने हुए हैं। इसी का संकेत स्मार्टफोन बाजार की ताजा सूरत है।

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