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भारत ने ब्रिक्स का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ कियाः चीनी मीडिया
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 19 Oct 2016 04:31 PM IST
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ब्रिक्स
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ब्रिक्स सम्मेलन में पाकिस्तान के खिलाफ माहौल बनाने में भारत की सफलता पर चीनी मीडिया ने अपनी चिढ़ जाहिर की है। चीनी के सरकारी मीडिया ने कहा है कि भारत ने बेहद चालाकी से पाकिस्तान को 'क्षेत्रीय अछूत' बना दिया। चीनी मीडिया ने यह भी कहा कि गोवा में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत ने अपनी छवि खूब चमकाई और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एनएसजी सदस्यता के लिए अपना दावा मजबूत करने की कोशिश की।
ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित लेख में लिखा गया है, 'भारत-पाकिस्तान के तल्ख संबंधों की पृष्ठभूमि में, जो पिछले महीने और तल्ख हुए, ब्रिक्स के प्लेटफॉर्म पर बिम्सटेक देशों को शामिल करना एक सामरिक रणनीति को हासिल करने का लक्ष्य था। ' बता दें कि बिम्सटेक - यानी 'द बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फोर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक को-ऑपरेशन' में भारत के अलावा बंगाल की खाड़ी के आस पास के देश शामिल हैं जैसे बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं।
'भारत ने पाकिस्तान को चालाकी से मात देने के लिए किया ब्रिक्स का इस्तेमाल' शीर्षक लेख में कहा गया है, 'क्योंकि भारत ने पाकिस्तान को छोड़कर क्षेत्र के सभी देशों को आमंत्रित किया। इस तरह पाकिस्तान को क्षेत्रीय अछूत बना दिया।'
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ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित लेख में लिखा गया है, 'भारत-पाकिस्तान के तल्ख संबंधों की पृष्ठभूमि में, जो पिछले महीने और तल्ख हुए, ब्रिक्स के प्लेटफॉर्म पर बिम्सटेक देशों को शामिल करना एक सामरिक रणनीति को हासिल करने का लक्ष्य था। ' बता दें कि बिम्सटेक - यानी 'द बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फोर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक को-ऑपरेशन' में भारत के अलावा बंगाल की खाड़ी के आस पास के देश शामिल हैं जैसे बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं।
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'भारत ने पाकिस्तान को चालाकी से मात देने के लिए किया ब्रिक्स का इस्तेमाल' शीर्षक लेख में कहा गया है, 'क्योंकि भारत ने पाकिस्तान को छोड़कर क्षेत्र के सभी देशों को आमंत्रित किया। इस तरह पाकिस्तान को क्षेत्रीय अछूत बना दिया।'
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भारत के लिए खास मौका लाया गोवा सम्मेलन
ब्रिक्स
उड़ी हमले के बाद दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के पाकिस्तान में होने वाले सम्मेलन में हिस्सा न लेने के संदर्भ में भी चीनी मीडिया ने टिप्पणी की है। लेख में लिखा गया है, 'सार्क सम्मेलन का बहिष्कार करने से भारत को ऐसा मौका मिल गया जिससे वह इस्लामाबाद में किसी झगड़ से बच सके। वैसे भी पाकिस्तान को छोड़कर सभी सदस्य देश गोवा में जमा होने वाले ही थे।' बिम्सटेक ने गोवा में भारत के लिए मौके को खास बना दिया। बिम्सटेक का पिछला सम्मेलन जो नई दिल्ली में हुआ था और इस बार के गोवा सम्मेलन में फर्क रहा। इस बार का सम्मेलन ब्रिक्स के ठीक पीछे हुआ।
चीनी मीडिया के लेख में कहा गया है कि गोवा सम्मेलन से भारत को अपनी एनएसजी दावेदारी को मजबूत करने में भी मदद मिली, जिसका चीन विरोध करता रहा है। साथ ही साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसकी स्थायी सीट का दावा भी मजबूत हुआ है। लेख में कहा गया है, 'ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए अपनी जैसी सोच वाले देशों के साथ मिलकर अपने दावों को नए सिरे से आगे बढ़ाने का शानदार मौका लाया।'
चीनी मीडिया के लेख में कहा गया है कि गोवा सम्मेलन से भारत को अपनी एनएसजी दावेदारी को मजबूत करने में भी मदद मिली, जिसका चीन विरोध करता रहा है। साथ ही साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसकी स्थायी सीट का दावा भी मजबूत हुआ है। लेख में कहा गया है, 'ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए अपनी जैसी सोच वाले देशों के साथ मिलकर अपने दावों को नए सिरे से आगे बढ़ाने का शानदार मौका लाया।'
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक जीत
brics
- फोटो : ANI
ब्रिक्स घोषणापत्र में भले ही भारत सीमा पार आतंकवाद का जिक्र नहीं करा पाया हो, मगर उसने आतंकवाद के मामले में चीन के इतर ब्रिक्स और बिम्सटेक के सदस्य देशों को गोलंबद कर बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है। खासतौर पर आर्थिक संकट के दौर से बाहर आने के लिए बहुत हद तक चीन के रहमोकरम पर टिके रूस का भारत के सुर में सुर मिलाना बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है।
विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स सम्मेलन ने आतंकवाद के सवाल पर चीन के लिए शर्मिंदगी वाली स्थिति पैदा कर दी है। विशेषज्ञों की मानें तो इस सम्मेलन में पाकिस्तान के लिए चीन जरा भी सहानुभूति नहीं बटोर पाया और न ही भारत के खिलाफ ब्रिक्स व बिम्सटेक के एक भी सदस्य को खड़ा कर पाया। इसके विपरीत भारत घोषणापत्र में आतंकवाद के ठिकानों को ध्वस्त करने और आतंकी संगठनों से निपटने के प्रति ब्रिक्स और बिम्सटेक सदस्यों की सहमति हासिल कर पाकिस्तान को भी कड़ा संदेश देने में सफल रहा।
विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स सम्मेलन ने आतंकवाद के सवाल पर चीन के लिए शर्मिंदगी वाली स्थिति पैदा कर दी है। विशेषज्ञों की मानें तो इस सम्मेलन में पाकिस्तान के लिए चीन जरा भी सहानुभूति नहीं बटोर पाया और न ही भारत के खिलाफ ब्रिक्स व बिम्सटेक के एक भी सदस्य को खड़ा कर पाया। इसके विपरीत भारत घोषणापत्र में आतंकवाद के ठिकानों को ध्वस्त करने और आतंकी संगठनों से निपटने के प्रति ब्रिक्स और बिम्सटेक सदस्यों की सहमति हासिल कर पाकिस्तान को भी कड़ा संदेश देने में सफल रहा।