आतंकी मसूद अजहर पर चीन में पहली बार उठे विरोध के सुर
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मसूद एक आतंकी है और उसको संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल कराने की भारत की कोशिशों में बार-बार चीन को अड़ंगा नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन को अवसर का फायदा उठाते हुए मसूद को प्रतिबंधित करने की भारत की कोशिशों का समर्थन करना चाहिए।
माओ ने मसूद को लेकर भारत और चीन के बीच उपजे गतिरोध को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘वीचैट’ पर लंबा-चौड़ा ब्लॉग लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पठानकोट आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मसूद के खिलाफ भारत की शिकायत का चीन को फायदा उठाना चाहिए और दोनों देशों के बीच निष्क्रिय कूटनीतिक स्थिति को खत्म करना चाहिए।
मसूद पर चीन का तकनीकी अड़ंगा
माओ कोलकाता में 2007 से 2010 तक चीन के महावाणिज्यदूत रह चुके हैं। इसके पहले वह नई दिल्ली स्थिति चीनी दूतावास में राजनयिक और जेएनयू में विजिटिंग स्कॉलर के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। 28 दिसंबर को प्रकाशित अपने ब्लॉग में पूर्व चीनी राजनयिक ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा एवं जैश-ए-मोहम्मद की ओर से किए गए हमलों और इससे भारत-पाक के रिश्तों में तनाव की बात को भी उजागर किया।
उन्होेंने कहा कि जब भी भारत और पाकिस्तान ने आपसी संबंधों को सामान्य करने की कोशिश की, तभी लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद ने आतंकी हमले करके माहौल खराब कर दिया। लिहाजा अब चीन को मसूद मसले पर अपना रुख बदलना चाहिए। मसूद को यूएन की वैश्विक आतंकियों की सूची में शामिल कराने के भारत के आवेदन पर फिर से तकनीकी अड़ंगा से पहले माओ का यह ब्लॉग प्रकाशित हुआ है।
मसूद पर चीन के तकनीकी अड़ंगा की अवधि खत्म होने वाली थी, लेकिन चीन ने फिर से इसे बढ़ा दिया। चीनी राजनयिक ने पठानकोट आतंकी हमले में मसूद के खिलाफ भारतीय सबूत का हवाला दिया है, जिसके आधार पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है। इनमें मसूद के खिलाफ फेसबुक, टेलीफोन रिकॉर्ड के अलावा खाद्य पदार्थ के रैपिंग पेपर के डीएनए सैंपल और वॉकी-टॉकी से जुड़े सबूत शामिल हैं।