भारत के खिलाफ नया पैंतरा, CPEC से पाक में रेल-रोड कार्गो सर्विस शुरू करेगा चीन

amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला Updated Thu, 06 Jul 2017 05:11 PM IST
China plans to launch cargo service through CPEC from Lanzhou to Pakistan
चीन-पाकिस्तान रेल-रोड कार्गो सर्विस - फोटो : Reuters
चीन अपने सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना सिल्क रूट को जिंदा करने के लिए जितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, उतने ही तेजी से वो भारत को घेरने की भी कोशिश कर रहा है। इसी कड़ी में चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर सीपीईसी के साथ ही रेल-रोड कार्गो लाइन शुरू करने की प्लानिंग की है, जिसके बाद ग्वादर बंदरगाह के रास्ते उसकी और उसके सामानों की पहुंच मिडिल-ईस्ट के साथ ही अफ्रीकी देशों तक हो जाएगी। ऐसी ही सेवा के चलते वो नेपाल में अपनी पैठ बना चुका है।
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चीन और पाकिस्तान का ये रेल-रोड-वॉटर लाइन चीन के गेंसू प्रांत की राजधानी लानझोऊ से शुरु होकर पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक होगा। ये लाइन जिनजिआंग उईगुर स्वायत्तशाषी इलाके के काशगर से भी होकर गुजरेगा। इसके लिए नई लाइन की पहचान भी की जा रही है। हालांकि ये सेवा कबतक शुरु होगी, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है।

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सरकारी एजेंसी सिंहुआ से बात करते हुए लानझोऊ इंटरनेशनल ट्रेड और लॉजिस्टिक पार्क के निदेशक झू चुन्हुआ ने कहा कि ये रेल-रोड परियोजना भी सीपीईसी से जोड़ी जा सकती है। जो सड़क के साथ ही विकसित की जा सके। अभी इस रेल-रोड लाइन से सामान ट्रेन में भरकर जिनजिआंग तक आएंगे। यहां से सामान को ट्रकों में भरकर पाक अधिकृत कश्मीर के कराकोरम वाले इलाके से होकर पाकिस्तान के दूसरी सिरे ग्वादर बंदरगाह तक जाएंगे। फिर यहां से इस सामान को पानी के रास्ते जहाजों से अफ्रीका, मिडिल ईस्ट के देशों को भेजा जाएगा। चीन के लिए अपने माल को मिडिल ईस्ट-अफ्रीका तक पहुंचाने का ये सबसे छोटा रास्ता है। 

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चीन ने ग्वादर बंदरगाह के विकास के साथ ही उसे पाकिस्तान से लीज पर ले लिया है। चीन की कोशिश है कि इस बंदरगाह से वो हर साल 300 से 400 मिलियन टन सामानों का आयात-निर्यात कर सके। इसी के लिए वो सीपीईसी परियोजना में 57 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है, ताकि वो सिल्क रूट के हिसाब से पूरी दुनिया पर व्यापारिक कब्जा जमा सके। भारत इस सीपीईसी का विरोध करता है, क्योंकि चीन और पाक की ये परियोजना कश्मीर के इलाके से होकर गुजरती है। ऐसे में अब रेल-रोड लाइन के शुरू हो जाने के बाद भारत पर दबाव बढ़ जाएगा। ये भारत के लिए भारत-अफगानिस्तान एयर कॉरिडोर के मुकाबले चीन द्वारा दिया गया हजार गुना बड़ा जवाब हो सकता है।

गौरतलब है कि पिछले साल मई माह में चीन ने नेपाल के साथ रेल-रोड कार्गो सेवा की शुरुआत की गई थी। ये रूट लानझोऊ से काठमांडू तक है। अभी तक चीन-नेपाल के बीच 3 बिलियन युआन का व्यापार होता था, पर इस रूट से दोनों देशों के बीच व्यापार का ये आंकड़ा 10 बिलियन युआन तक पहुंचने की उम्मीद है। यही नहीं, चीन सरकार भारत को घेरने के लिए लगातार पड़ोसी देशों में निवेश कर रही है। इसके तहत बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे देशों में बंदरगाहों के विकास की पेशकश जैसी बातें शामिल हैं।

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