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चीन-पाकिस्तान इकानॉमिक कॉरिडोर से भारत-पाक में तनाव बढ़ने की आशंका: यूएन रिपोर्ट

Thu, 25 May 2017 04:43 PM IST
amarujala.com- Presented by: श्ारद मिश्र
amarujala.com- Presented by: श्ारद मिश्र Updated Thu, 25 May 2017 04:43 PM IST
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 CPEC might creates more tention between india and pakistan: UN report
चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर
चीन और पाकिस्तान के बीच करीब 50 अरब डॉलर की लागत से तैयार होने वाले इकानॉमिक कॉरिडोर से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है। संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन के इकानॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट से पाकिस्तान के बलोचिस्तान सूबे में अलगाववादी अभियान को और बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट कहती है कि कॉरिडोर से कश्मीर विवाद और उलझ सकता है। इससे भारत-पाक क्षेत्र में राजनैतिक अस्थिरता पैदा होगी। 
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चीन के आग्रह पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अफगानिस्तान में कायम राजनैतिक अस्थिरता इस कॉरिडोर की उपयोगिता पर बाधा खड़ी कर सकती है। गौरतलब है कि भारत ने पहले ही इस कॉरिडोर का विरोध कर दिया है। इसी क्रम में उसने हाल ही में बीजिंग में बीआरआई की बैठक का बहिष्कार भी किया है। 
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रिपोर्ट कहती है कि अफगानिस्तान की तनावपूर्ण स्थिति से काबुल और कांधार के आस पास के इलाके में कॉरिडोर का फायदा ज्यादा नहीं मिलेगा। रिपोर्ट में बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार इकानॉमिक कॉरिडोर का भी उल्लेख किया गया है। 
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रिपोर्ट के अनुसार ऐसे कॉरिडोर से चीन, पाकिस्तान, ईरान, भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के अन्य इलाकों में कारोबार को बढ़ावा अवश्य मिलेगा लेकिन इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। कॉरिडोर के बनने से सामाजिक और पर्यावरणीय ढांचे पर भी असर पड़ सकता है। इसके निर्माण के बाद स्‍थानीय लोगों का विस्‍थापन भी हो सकता है। 

कॉरिडोर पश्चिम पाकिस्तान के पर्वतीय इलाके से खेतिहर भूमि से गुजरेगा। जिससे फसल की पैदावार प्रभावित होगी। इससे यहां के निवासियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। कॉरिडोर के इलाके में निवास करने वाले हजारा अल्पसंख्यकों को विशेष नुकसान उठाना पड़ेगा। स्‍थानीय लोगों के विस्‍थापन के बाद अलगाववाद बढ़ेगा। जिसमें सेना की मदद भी लेनी पड़ सकती है।  


रिपोर्ट के अनुसार अगर कॉरिडोर को सामाजिक और आर्थिक रूप से सफल बनाना है तो भागीदार राज्यों के बीच विश्वास, आपसी सहयोग और बेहतर साझेदारी होना आवश्यक है।   
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