पाक ने दी कुर्बानी, आतंक को किसी देश से जोड़ना गलत : चीन
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को खत्म हुए अभी एक दिन ही बीता है कि चीन ने फिर दोगलापन दिखाना शुरू कर दिया है। चीन ने पीएम मोदी के पाक को आतंक का गढ़ बताने पर पाकिस्तान का बचाव किया है। उसके विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा है कि चीन किसी भी देश को आतंकवाद से जोड़ने के खिलाफ है और न ही भविष्य में वह ऐसा करेगा।
चुनयिंग ने यहां तक कहा कि दुनिया को पाकिस्तान का महान बलिदान समझना चाहिए जो उसने आतंकवाद से लड़ते हुए किया है।
चुनयिंग से मोदी की उस बात पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, जिसमें पीएम मोदी ने सभी देशों से मिलकर पाकिस्तान पर दवाब बनाने के लिए कहा था। पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा था कि पाकिस्तान ही आतंकवाद का जनक है, सभी देशों को उस पर नकेल कसना चाहिए। पीएम मोदी ने यह बात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में गोवा में कही थी।
'पाक के खिलाफ ऐसा कदम उठाने का सवाल ही नहीं'
चुनयिंग ने आगे कहा कि आतंकवाद पर चीन की राय हमेशा से स्पष्ट रही है। चीन किसी भी जात-धर्म या देश को आतंकवाद से नहीं जोड़ना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ है और उन्हें लगता है कि आतंकवाद से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों के लिए सुरक्षा और स्थायित्व के उपाय किए जाने बाकी हैं।
चुनयिंग ने साफ कहा कि चीन और पाकिस्तान सदाबहार दोस्त हैं, इसलिए उसके खिलाफ ऐसा कदम उठाने का सवाल ही नहीं बनता है।
चुनयिंग बोलीं कि भारत हो या पाकिस्तान, सब आतंकवाद के भुक्तभोगी हैं, पाकिस्तान ने आतंकवाद से लड़ाई में बड़ी कीमत चुकाई है, विश्व समुदाय को पाकिस्तान के बलिदान को समझना चाहिए।
क्या कहा था पीएम मोदी ने?
पाकिस्तान को आतंकवाद की 'जननी' करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स नेताओं से इस खतरे और इसके संरक्षकों के खिलाफ समग्र व सामूहिक कार्रवाई की अपील की थी। मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान न सिर्फ आतंकियों को संरक्षण देता है बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए आतंकवाद को तर्कसंगत ठहराने का ढिंढोरा पीटने वाली मानसिकता का भी पोषक है।
उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शिन जिनपिंग को भी कड़ा संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी एक देश की कार्रवाई कमजोर पड़ जाएगी और आतंकवाद का समर्थन करने वालों को पुरस्कृत नहीं, दंडित किया जाना चाहिए।
मोदी ने कहा था कि सभी देशों को सामूहिक और व्यक्तिगत, दोनों स्तर पर आतंकवाद का करारा जवाब देना होगा। उन्होंने कहा, 'हमारे क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और विकास के लिए आतंकवाद एक गंभीर खतरा है। दुखद है कि इसका जनक भारत का एक पड़ोसी देश है। विश्व में कहीं भी आतंक के मॉड्यूल इसी देश की जमीन से संचालित होते हैं। यह देश न सिर्फ आतंकियों को पनाह देता है बल्कि एक ऐसी मानसिकता की भी परवरिश करता है जो राजनीतिक लाभ के लिए आतंकवाद को न्यायसंगत ठहराने का ढिंढोरा पीटती है। हम ऐसी मानसिकता की कड़ी निंदा करते हैं। इसके खिलाफ ब्रिक्स के सभी सदस्यों को मिलकर लड़ना होगा। इस खतरे के खिलाफ ब्रिक्स सदस्यों को एकजुट होना पड़ेगा।'
मोदी ने कहा, 'आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ अकेला प्रयास न सिर्फ व्यर्थ जाएगा, बल्कि हमारी उत्पादकता को भी क्षति पहुंचाएगा। इससे मुकाबले में कृत्रिम और आत्म सेवा आधार पर भेद नहीं होना चाहिए।' उनकी यह टिप्पणी चीन के संदर्भ में ही थी जिसने भारत में पठानकोट हमला सहित कई आतंकी घटनाओं के मास्टरमाइंड मसूद अजहर पर प्रतिबंध पर रोक लगा रखी है।