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‘हेल्थ सिल्क रोड’ के जरिए चीन की ‘वैक्सीन डिप्लोमेसी’, सभी दोस्त देशों को देगा डोज

Wed, 02 Dec 2020 04:48 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 02 Dec 2020 04:48 PM IST
सार

  • अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी सॉफ्ट इमेज बनाना चाहता है चीन – सीएनएन की रिपोर्ट
  • चीन में कोरोना की पांच वैक्सीन बनाने का काम तीसरे चरण में

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China vaccine diplomacy through Health Silk Road, will give vaccine to all friend countries
coronavirus vaccine China - फोटो : Social Media

विस्तार

चीन ने ‘वैक्सीन डिप्लोमेसी’ की जोरदार तैयारी की है। इसे यहां हेल्थ सिल्क रोड कहा जा रहा है। गौरतलब है कि ऐतिहासिक सिल्क रोड की धारणा को चीन ने अपने बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव के जरिए फिर जिंदा किया था। अब उसमें वैक्सीन के जरिए नया पहलू जोड़ा जाएगा। इस बारे में वैश्विक मीडिया में कई रिपोर्टें छपी हैं।

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बताया जाता है कि आने वाले महीनों में चीन कोरोना वायरस की वैक्सीन के करोड़ों डोज (खूराक) अलग-अलग देशों में भेजेगा। इनमें से कई देशों में चीन की साइनोवाक और अन्य कंपनियों के वैक्सीन का इंसान पर परीक्षण किया गया है।
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चीन के सत्ताधारी नेताओं ने कहा है कि वे अपनी वैक्सीन देने में विकासशील देशों को प्राथमिकता देंगे। पर्येवक्षकों का मानना है कि इसके जरिए चीन दुनिया में अपनी बिगड़ी छवि को सुधारने की कोशिश कर रहा है। कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में खराब प्रबंधन से धूमिल हुई छवि को पीछे छोड़ कर अब वह ये धारणा बनाना चाहता है कि उसने इस महामारी से उबरने में दुनिया की मदद की है।
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वॉशिंगटन स्थित काउंसिल फॉर फॉरेन रिलेशंस के वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ यांगझोंग हुआंग ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा कि चीन वैक्सीन का इस्तेमाल विदेश नीति के उपकरण के रूप में करने जा रहा है। वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सॉफ्ट इमेज पेश करना चाहता है। गौरतलब है कि महामारी के आरंभिक दिनों में चीन  ने मास्क और कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए जरूरी चीजों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया था। हुआंग ने कहा कि वैक्सीन डिप्लोमेसी को चीन एक और अवसर के रूप में देख रहा है।

चीन में फिलहाल पांच वैक्सीन बनाने की तैयारियां चल रही हैं। बताया जाता है कि इन सबका तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। तीसरे चरण के बाद ही वैक्सीन को इस्तेमाल की अनुमति मिलती है। चीन ने अपने यहां कोरोना वायरस संक्रमण पर लगभग काबू पा लिया है। इसलिए चीनी कंपनियों को अपनी वैक्सीन के परीक्षण के लिए दूसरे देशों में जाना पड़ा। उन्होंने अपने तीन चरण के परीक्षण कुल 16 देशों में किए हैँ। चीन ने वादा किया है कि इन देशों को वैक्सीन के डोज देने के साथ- साथ वैक्सीन बनाने की विधि भी वह बताएगा।

साइनोवाक कंपनी ने ब्राजील को चार करोड़ 60 लाख डोज देने का वायदा किया है। वह टर्की को पांच करोड़ डोज उपलब्ध कराएगी। वह इंडोनेशिया को चार करोड़ डोज बनाने की सामग्री देगी। कैनसाइनो बायोलॉजिक्स कंपनी ने चीन के सेना की अनुसंधान यूनिट में कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार किया है। वह मेक्सिको को इसके साढ़े तीन करोड़ डोज देगी। उसने मेक्सिको और पांच दूसरे देशों में अपने वैक्सीन का परीक्षण किया है।

चाइना नेशनल बायोटेक ग्रुप चीन की सरकारी कंपनी नेशनल फार्मासियुटिकल ग्रुप की इकाई है। उसने दो वैक्सीन विकसित किए हैं, जिनका तीसरे चरण का परीक्षण दस देशों में चल रहा है। ये ज्यादातर पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका के देश हैं। दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन रशीद अल मखतूम ने परीक्षण के दौरान ही ये वैक्सीन लगवाई थी। दुबई में आपातकालीन मामलों में ये वैक्सीन लगाने की इजाजत दी जा चुकी है। बताया जाता है कि दुबई की एक कंपनी के साथ मिलकर चीनी कंपनी अगले साल इस वैक्सीन के साढ़े सात करोड़ से दस करोड़ के बीच डोज का उत्पादन करेगी।

जानकारों ने कहा है कि चीन का वैक्सीन अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट अभियान के बिल्कुल उलट है। चीन की मुहिम दूसरे देशों में अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाने की है। यांगझोंग हुआंग ने कहा कि अब तक यह सुनने में नहीं आया है कि अमेरिका अपने यहां बन रहे वैक्सीन का कोई हिस्सा गरीब देशों को देगा।


ट्रंप अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी बाहर कर चुके हैं। जबकि चीन बीते अक्टूबर में इस संगठन के वैक्सीन बनाने के प्रयास- कोवाक्स में शामिल हो गया था। कोवाक्स का मकसद हर देश तक वैक्सीन पहुंचाना है। साफ है, ऐसे प्रयासों से अमेरिका के अलग हो जाने का लाभ चीन ने उठाया है।

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