China-taiwan Conflict: नैंसी पेलोसी की यात्रा के एक महीना बाद भी ताइवान विवाद में नरमी के संकेत नहीं
China-taiwan Conflict: ताइवान के उप सेनाध्यक्ष लिन वेन-हुआंग ने इस हफ्ते कहा- ‘विमान और जहाज हमारे वायु और जल क्षेत्र में आएंगे, तो हमारी राष्ट्रीय सेना आत्म रक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगी। वह बिना किसी अपवाद के जवाबी हमला बोलेगी।’
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अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद एक महीना गुजर गया है। लेकिन इस मुद्दे को लेकर अमेरिका और चीन के बीच खड़े हुए विवाद में नरमी आने के अभी कोई संकेत नहीं हैं। इस हफ्ते ताइवान की सेना ने चीन के एक ड्रोन पर फायरिंग की। ऐसी घटना पहली बार हुई है। इसे इस बात का संकेत माना गया है कि ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ रहा है। चीनी ड्रोन पर फायरिंग से पहले ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने ताइवान की सेना को चीन के भड़काऊ कदमों के खिलाफ ‘मजबूत कार्रवाई’ करने का निर्देश दिया था।
पेलोसी की यात्रा के विरोध में चीन ने ताइवान के आसपास एक बड़ा सैनिक अभ्यास शुरू कर दिया था। इस दौरान चीन के लड़ाकू विमानों ने ताइवान के ऊपर से उड़ानें भरीं। चीन ने ताइवान के वायु क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइलें भी दागीं। उधर चीनी नौसेना ताइवान के तट के उतने पास तक पहुंची, जहां पहले वह नहीं जाती थी। इस पर ताइवान की प्रतिक्रिया पहली बार इसी हफ्ते सामने आई। ताइवान के उप सेनाध्यक्ष लिन वेन-हुआंग ने इस हफ्ते कहा- ‘विमान और जहाज हमारे वायु और जल क्षेत्र में आएंगे, तो हमारी राष्ट्रीय सेना आत्म रक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगी। वह बिना किसी अपवाद के जवाबी हमला बोलेगी।’
उधर अमेरिका में जो बाइडन प्रशासन ने ताइवान को हथियारों की नई बिक्री का प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में रखा है। इसके तहत कांग्रेस से ताइवान को हथियार देने के लिए 1.1 बिलियन डॉलर के बजट की मंजूरी मांग गई है। जो हथियार देने का प्रस्ताव है, उनमें मिसाइलें भी शामिल हैं। अमेरिकी पर्यवेक्षकों के मुताबिक ताइवान को मदद देने के मुद्दे पर अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों में पूरी सहमति है। इसलिए बाइडन प्रशासन के ताजा प्रस्ताव को मंजूरी मिलना लगभग तय है।
लेकिन रक्षा विशेषज्ञों की राय है कि ताइवान मुद्दे पर अभी अमेरिका या चीन दोनों में से कोई युद्ध नहीं चाहता। वे परोक्ष रूप से अपनी ताकत दिखाने में जुटे हुए हैं। चीन ने यह संदेश दे दिया है कि अगर बात बढ़ी तो वह ताइवान पर कब्जा कर लेने के लिए तैयार है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय से जुड़े थिंक टैंक नेशनल डिफेंस एंड सिक्युरिटी रिसर्च से संबंधित एक शोधकर्ता ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- ‘मेरी राय में चीन ने अपना इरादा साफ कर दिया है। ताइवान को घेरने और विदेशी हस्तक्षेप का मुकाबला करने में वह कोई कसर नहीं छोड़ेगा।’
इसके पहले ताइवान को लेकर एक बड़ा संकट 1995-96 में खड़ा हुआ था। लेकिन तब चीन ने समुद्र में काल्पनिक मध्य रेखा का उल्लंघन नहीं किया। ना ही उसने ताइवान के वायु क्षेत्र का उल्लंघन किया। लेकिन इस बार अलग कहानी सामने आई है। ताइपे स्थित रक्षा विशेषज्ञ ची ली-यी ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘पिछले संकट के बाद से चीन की सेना काफी मजबूत हो गई है। इस बार उसने कई युद्ध क्षेत्रों में कार्रवाई कर सकने की अपनी क्षमता दिखा दी है।’ समझा जाता है कि इससे अमेरिका चिंतित है। इसलिए वह जवाबी दांव चल रहा है। लेकिन उससे टकराव और बढ़ने का अंदेशा है।